Wednesday, July 1, 2026
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ओशनीक टेक्नोलॉजीज़ और चंडीगढ़ हॉस्पिटल ने मिलकर आयोजित किया ‘बैसाखी हेल्थ फेयर’

नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर में रूपनगर के सैकड़ों लोगों ने लिया भाग

रूपनगर क्षेत्र में रोगों से बचाव हेतु स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मिलकर अभियान चलाया

रूपनगर । रूपनगर में स्वास्थ्य और जागरूकता के संदर्भ में ओशनीक टेक्नोलॉजीज़ और चंडीगढ़ हॉस्पिटल ने संयुक्त रूप से ‘बैसाखी हेल्थ फेयर’ का आयोजन किया। यह विशेष नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर चंडीगढ़ हॉस्पिटल, एनएच-205, सोल्खियां गुरुद्वारे के सामने, रूपनगर टोल प्लाज़ा के पास आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श मुहैया कराना था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सामान्य जांच, जीवनशैली से जुड़ी सलाह और विशेषज्ञ सत्र उपलब्ध कराए गए। कैप्टन सुनील शर्मा, फाउंडर – एलेक्सार्या हेल्थकेयर (जो चंडीगढ़ हॉस्पिटल की मूल कंपनी है) और मैनेजिंग डायरेक्टर – ओशनीक टेक्नोलॉजीज़; प्रो. जसप्रीत प्रीति शाहिद, चेयरवुमन – चंडीगढ़ हॉस्पिटल और संदीप सैनी, सीओओ– ओशनीक टेक्नोलॉजीज़ ने स्वास्थ्य शिविर के दौरान मीडिया को संबोधित किया। कैप्टन शर्मा ने कहा कि हर किसी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच मिलनी चाहिए। इस हेल्थ फेयर के ज़रिए हमने उस दूरी को कम करने और स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक सोच पैदा करने की कोशिश की। प्रो. जसप्रीत प्रीति शाहिद ने बताया कि शिविर में छह प्रमुख क्षेत्रों — नेत्र, दंत, फिजियोथेरेपी, ऑर्थोपेडिक्स, डर्मेटोलॉजी और गायनेकोलॉजी — में सामान्य जांच की गई। इसके साथ ही बच्चों के लिए समर्पित वेलनेस सेवाओं के तहत खानपान और जीवनशैली से जुड़ी सलाह, बीपी और बीएमआई जांच भी शामिल थी। कैप्टन शर्मा ने बताया कि शिविर में सात विशेषज्ञ डॉक्टरों और दस प्रशिक्षित पैरा-मेडिकल कर्मियों की टीम ने उपस्थित लोगों को अपनी विशेषज्ञता और समय प्रदान किया।

ये सेवाएं अस्पताल के 10 किलोमीटर के दायरे से आए लाभार्थियों को दी गईं। शिविर की सफलता में जिन डॉक्टरों का विशेष योगदान रहा, उनमें डॉ. सुरिंदर पाल (एमडी – मेडिसिन), डॉ. ध्रुव वशिष्ठ (एमएस – ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. मोनिका अग्रवाल (गायनेकॉलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स), डॉ. दीक्षित गोयल (एमडी – डर्मेटोलॉजी), डॉ. सुधाकर यादव (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. पुष्किन शर्मा (एमबीबीएस, मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) तथा डॉ. चेतना कोटवाल (बीएएमएस, योग एवं नेचुरोपैथी में पीजीडी) शामिल थे। संदीप सैनी ने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने में ओशनीक टेक्नोलॉजीज़ का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने लॉजिस्टिक्स संभालने से लेकर आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाने, ऑनलाइन प्रचार करने और समुदाय से जुड़ने के नए-नए तरीके अपनाने तक हर पहलू में सहयोग किया। युवाओं को केंद्र में रखकर काम करने का हमारा तरीका इस आयोजन में जोश और अपनापन लेकर आया। हम मानते हैं कि तकनीक के ज़रिए समाज में अच्छा बदलाव लाया जा सकता है। हमारा मकसद सिर्फ प्रचार करना नहीं था, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ना था — वो भी एक मजेदार और असरदार तरीके से। उन्होंने कहा कि ओशनीक की टीम ने कुछ मजेदार खेलों का आयोजन किया, और विजेताओं को गुडी बैग्स और नकद पुरस्कार दिए गए ताकि युवा पीढ़ी को ‘हेल्थ चेकअप’ की ज़रूरत को लेकर जागरूक किया जा सके।बैसाखी हेल्थ फेयर 2025 आने वाले महीनों में होने वाली कई स्वास्थ्य केंद्रित गतिविधियों की शुरुआत है। चंडीगढ़ हॉस्पिटल ने यह संकल्प लिया है किवह ऐसे और भी बड़े और बार-बार होने वाले हेल्थ कैंप लगाएगा, और अपने मरीजों को दवाओं पर 30% तक की छूट देता रहेगा।

द फैशन हबीब ने जीरकपुर में खोला अपना 5वां स्मार्ट सैलून और अकादमी

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जीरकपुर । सौंदर्य और वेलनेस इंडस्ट्री में एक नए युग की शुरुआत हुई, जब द फैशन हबीब स्मार्ट सैलून एंड अकादमी ने जीरकपुर के ग्राउंड फ्लोर एससीओ 17 सुषमा इन्फिनियम में अपने पांचवें ब्रांच का भव्य उद्घाटन किया। अत्याधुनिक ब्यूटी सलूशन्स और प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए मशहूर, द फैशन हबीब अब सुंदरता के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दे रहा है। इस अवसर पर, द फैशन हबीब ने मिस्टिक वेलनेस क्लब के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की, जो होलिस्टिक न्यूट्रिशन और वेलनेस सेवाओं में बड़ा नाम है। इस सहयोग से एक राष्ट्रव्यापी वेलनेस और ब्यूटी अभियान की शुरुआत होगी, जो आधुनिक सौंदर्य अनुभव को एक नई परिभाषा देगा। उद्घाटन कार्यक्रम में मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब, द फैशन हबीब के सीईओ संदीप कुमार और मिस्टिक वेलनेस क्लब के सीईओ जतिन चौहान मौजूद रहे। इस मौके संदीप कुमार ने कहा कि अब हम सिर्फ लोगों को स्टाइल नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें हेल्दी, हैप्पी और नैचुरली ग्लोइंग बनाने में मदद कर रहे हैं, जो सुंदरता की नई परिभाषा है। इस मौके जतिन चौहान ने कहा कि सच्ची सुंदरता भीतर से शुरू होती है। इस साझेदारी के माध्यम से हम हर घर तक वेलनेस एजुकेशन, ब्यूटी केयर और पर्सनलाइज्ड हेल्थ सॉल्यूशन्स पहुंचाना चाहते हैं। संदीप कुमार ने कहा कि यह सहयोग कई अभिनव पेशकशों को लेकर आया है, जो सौंदर्य देखभाल को समग्र स्वास्थ्य के साथ मिलाते हैं। ग्राहक अब विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए वेलनेस और ब्यूटी पैकेज का उपयोग कर सकते हैं, जिनका उद्देश्य त्वचा की चमक बढ़ाना, एंटी-एजिंग को बढ़ावा देना, शरीर को डिटॉक्सीफाई करना और समग्र कायाकल्प का समर्थन करना है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के नेतृत्व में वजन प्रबंधन और फिटनेस प्लान के साथ-साथ आहार, त्वचा की देखभाल, बालों की देखभाल और तनाव प्रबंधन जैसे आवश्यक विषयों को कवर करने वाली इन-सैलून कार्यशालाएं भी शामिल हैं।

पार्किंसन रोग के इलाज में न्यूरोलॉजिस्ट्स ने जेनेटिक्स, डाइट और आधुनिक इलाज के महत्व पर दिया जोर

चंडीगढ़ । फोर्टिस अस्पताल मोहाली के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट्स ने पार्किंसन रोग के इलाज के लिए समग्र और व्यक्ति-विशेष दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि जेनेटिक्स , पोषण और उन्नत सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नए विकास इस बीमारी के इलाज को बेहतर बना रहे हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि जेनेटिक टेस्टिंग, मिलेट्स आधारित डाइट और डीप ब्रेन स्टिमुलेशन जैसी तकनीकें अब रोगियों की देखभाल और लक्षणों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्ल्ड पार्किंसन डे के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों की टीम डॉ. सुदेश प्रभाकर, न्यूरोलॉजी डायरेक्टर,डॉ. अनुपम जिंदल, एडिशनल डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी, डॉ. निशित सावल, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी और डॉ. रवनीत कौर, एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल जेनेटिक्स ने पार्किंसन रोग के कारणों, लक्षणों और इलाज के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. सुदेश प्रभाकर ने बताया कि यह बीमारी आमतौर पर 60 साल से ऊपर के लोगों में होती है, लेकिन कभी-कभी युवा लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं, हाथ-पैर कांपना, शरीर में अकड़न, गति में कमी, लिखने और बोलने में परेशानी। इसके अलावा नींद न आना और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं। कुछ लक्षणों में गंभीर कब्ज की समस्या भी हो सकती है, जो पार्किंसन रोग के शुरुआती लक्षणों में से एक है। पार्किंसन रोग के इलाज में तरल एल-डोप़ा फॉर्मूलेशन और मिलेट्स आधारित डाइट की महत्वता को उजागर करते हुए, डॉ. निशित सावल ने कहा कि एल-डोप़ा, जो पार्किंसन रोग की मुख्य दवा है, को एलसीएएस फॉर्मूलेशन के रूप में देने पर इसका अवशोषण कई गुना बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से उन्नत बीमारी के मामलों में फायदेमंद है, जब गोलियों का असर कम हो जाता है और उसका प्रभाव कम समय तक रहता है, और उन मरीजों के लिए भी है जो डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी नहीं करना चाहते। मिलेट्स आधारित डाइट एल-डोप़ा के अवशोषण को बढ़ाती है, क्योंकि इनमें सामान्य अनाजों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी अमीनो एसिड होते हैं। ‘फ्रीजिंग ऑफ गेट’ एक ऐसा लक्षण है जो न तो दवाओं से ठीक होता है और न ही डीबीएस से। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली ने अब डीप टीएमएस तकनीक को अपनाया है, जो कुछ हद तक एफओजी में मदद कर सकता है। इसके अलावा, एमआरआई-गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रा साउंड सर्जरी, जो कि सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है, अब तक एक अप्रमाणित और एक्सपेरिमेंटल एब्लेटिव विधि है।

गर्ल्स पावर पर आयोजित फैशन शो में अंशिका, रब्बी और मनीषा रहे ‘ओवरऑल बेस्ट’

मनीमाजरा में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का भी हुआ आयोजन, 200 मरीजों की हुई जांच

डिप्टी मेयर तरूणा मेहता और ट्रिनिटी अस्पताल की डॉयरेक्टर डॉ. कमला कौशल महिला शक्ति पुरस्कार से हुईं सम्मानित

चंडीगढ़। आगामी बैसाखी के पर्व को मनाते हुए शहर की स्वयंसेवी संस्था युवसत्ता ने चंडीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और ट्रिनिटी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से मनीमाजरा में कश्यप राजपूत धर्मशाला में ‘गर्ल्स पावर पर फैशन शो वा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में चंडीगढ़ की डिप्टी मेयर तरुणा मेहता, ट्रिनिटी हॉस्पिटल एवं मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉयरेक्टर डॉ. कमला कौशल, सीसीपीसीआर-चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर देवी सिरोही, युवसत्ता के संस्थापक प्रमोद शर्मा, सेक्टर 26 स्थित आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष कृष्ण लाल शामिल थे। ट्रिनिटी हॉस्पिटल एवं मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉ. निकिता चंदेल के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा लगभग 200 मरीजों की जांच की गई तथा उन्हें सुरक्षित यौन संबंध और परिवार नियोजन के लिए आवश्यक दवाएं, चिकित्सीय सलाह, कंडोम दिए गए। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागी लड़कियों वा महिलाओं को स्वच्छ, उचित मासिक धर्म उत्पादों, जैसे पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप्स का उपयोग करने,संक्रमण और गंध को रोकने के लिए उन्हें नियमित रूप से कम से कम हर 4 से 6 घंटे में बदलने के लिए भी जागरूक किया। इसके बाद प्रयुक्त उत्पादों का स्वच्छतापूर्वक निपटान के बारे में भी बताया गया। उन्हें बताया गया कि फेंकने से पहले कागज में लपेट लें। इससे स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण के प्रति सम्मान बनाए रखने में मदद मिलती है। दिन का मुख्य आकर्षण क्षेत्र की आर्थिक तौर पर वंचित लड़कियों के लिए एक फैशन शो था, जिन्होंने रैंप पर वॉक किया और जजों के सवालों के जवाब भी दिए कि वे लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को कैसे बढ़ावा देंगी। तीन शीर्ष प्रतिभागियों अंशिका यादव, रब्बी और मनीषा को ‘ओवरऑल बेस्ट’ चुना गया । रिया व अंशिका को सांत्वना पुरस्कार मिला। उन्हें डिप्टी मेयर तरुणा मेहता, डॉ. निकेता चंदेल और प्रो. देवी सिरोही द्वारा सम्मानित किया गया। बाद में प्रो. देवी सिरोही और प्रमोद शर्मा ने डिप्टी मेयर तरुणा मेहता और ट्रिनिटी अस्पताल की डॉयरेक्टर डॉ. कमला कौशल को अपने-अपने क्षेत्रों में लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ जीवन की दिशा में उनके योगदान के लिए विशेष ‘महिला शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. कमला कौशल ने कहा कि हमारा स्वास्थ्य हमारे हाथ में है, तथा स्वस्थ जीवनशैली में सही विचार, अच्छा भोजन और विषाक्त पदार्थों से दूरी शामिल है। उन्होंने आर्थिक तौर पर वंचित लड़कियों और महिलाओं के बीच कल्याण, स्वस्थ जीवन शैली को सशक्त बनाने और समर्थन देने के लिए अनुकरणीय कार्य के लिए युवसत्ता और चंडीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी जैसी संस्थाओं की भूमिका की सराहना की।

चंडीगढ़ ग्रुप मुख्यालय से एसडी कॉलेज पहुंचे वरिष्ठ एनसीसी अधिकारी, कैडेट्स को किया प्रोत्साहित

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कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स ने दिया औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर, प्रिंसिपल ने किया अधिकारियों का स्वागत

चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज ने चंडीगढ़ ग्रुप मुख्यालय से वरिष्ठ राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिकारियों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल का कॉलेज पहुंचने पर स्वागत किया। इन गणमान्य व्यक्तियों में ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर विक्रम सिंह चौहान, वाईएसएम, कर्नल परमजीत सिंह, वीएसएम, ऑफिसर कमांडिंग 2 चंडीगढ़ बटालियन एनसीसी, सूबेदार मेजर सिया राम गुर्जर और ट्रेनिंग जेसीओ सूबेदार अजय कुमार शामिल थे, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से कॉलेज परिसर को गौरवान्वित किया। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजय शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कॉलेज के एनसीसी कैडेटों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया जो यूनिट के अटूट अनुशासन और उत्साही प्रतिबद्धता को दर्शाता था।
स्वागत के बाद, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी मेजर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कॉलेज की एनसीसी यूनिट की जीवंत गतिविधियों और उत्कृष्ट उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हुए एक व्यापक और आकर्षक प्रस्तुति दी। उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड, अखिल भारतीय थल सैनिक शिविर, राष्ट्रीय एकता शिविर, पर्वतारोहण और ट्रैकिंग अभियान, सेना संलग्नक शिविर और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह सहित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के शिविरों और प्रतियोगिताओं की एक विस्तृत श्रृंखला में भागीदारी पर प्रकाश डाला। कॉलेज के कैडेटों ने शूटिंग, स्पोर्ट्स, लीडरशिप रोल्स और सांस्कृतिक प्रयासों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिससे बटालियन और संस्थान दोनों का नाम रोशन हुआ है।

इसके अलावा लेफ्टिनेंट रितिका सिन्हा ने सामाजिक सेवा अभियान और गोद लिए गए गांव बुड़ैल के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों ने कैडेटों के साथ उत्साहपूर्वक बातचीत की तथा उन्हें प्रोत्साहन एवं प्रेरणा के शब्द कहे। उनके समृद्ध व्यक्तिगत अनुभव से प्राप्त टिप्पणियों ने युवा कैडैट्स पर गहरी छाप छोड़ी, जिनमें से कई सशस्त्र बलों या सिविल सेवाओं के माध्यम से राष्ट्र की सेवा करने की आकांक्षा रखते हैं। कैडेटों ने उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी तथा बातचीत के दौरान अपने अनुभवों और आकांक्षाओं को गर्व के साथ साझा किया। इन सम्मानित अधिकारियों के दौरे ने न केवल कॉलेज की एनसीसी यूनिट की उपलब्धियों को मान्यता मिली, बल्कि युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा के मूल्यों को स्थापित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका की भी पुष्टि की। जीजीडीएसडी कॉलेज एक मजबूत और गतिशील एनसीसी प्रोग्राम के माध्यम से जिम्मेदार नागरिकों और भविष्य के लीडर्स को पोषित करने के अपने मिशन में दृढ़ है।

कालीबाड़ी चंडीगढ़ में आज से शुरू होगी श्री रामकृष्ण की चार दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा

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चंडीगढ़ । कालीबाड़ी चंडीगढ़ अपने मंदिर परिसर में भगवान श्री रामकृष्ण की प्राण प्रतिष्ठा शनिवार से प्रारम्भ करेगा। शनिवार शाम को पवित्र अनुष्ठान शुरू होने के साथ ही रामकृष्ण मिशन (आरकेएम) के विभिन्न केंद्रों से भिक्षु आ रहे हैं। प्राण प्रतिष्ठा की प्रमुख रीति “आधिबास” अनुष्ठान में मूर्ति को शुद्ध करने और किसी भी दोष की पहचान करने के लिए जल, अनाज और अन्य पवित्र पदार्थों में विसर्जित करना होता है । यह आवश्यक कदम दिव्य ऊर्जा के साथ मूर्ति के अभिषेक से पहले होता है। इसके बाद अमृता गांगुली द्वारा परिकल्पित और निर्देशित ‘सिद्धार्थ से बुद्ध तक – श्रीरामकृष्ण की दिव्य लीला’ नामक एक आत्मा को झकझोर देने वाली नृत्य नाटिका की प्रस्तुति होगी। यह मेगा प्रोडक्शन गौतम बुद्ध और श्रीरामकृष्ण के जीवन और आध्यात्मिक मिशनों के बीच गहरी समानताएं दर्शाता है। चार दिवसीय पवित्र प्राण प्रतिष्ठा समारोह का नेतृत्व गुरुग्राम के रामकृष्ण मिशन के स्वामी शांतात्मानंद और भुज के रामकृष्ण मिशन के स्वामी सुखानंद रविवार को तंत्रधारक के रूप में करेंगे। प्रत्येक दिन काली पूजा, मंगल आरती, भक्ति गीत और प्रामाणिक बंगाली शाकाहारी प्रसाद जैसे पारंपरिक अनुष्ठान होंगे। सांस्कृतिक आकर्षणों में हिंदी नाटक ‘दिव्य स्पर्श’ शामिल है। प्रसिद्ध कीर्तनिया पड्डा पोलाश और उनका समूह भक्ति कीर्तन प्रस्तुत करेंगे। समापन दिवस पर विशेष काली पूजा, रक्तदान अभियान और समुदाय के लिए निःशुल्क चिकित्सा और नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे।

शिवा इंटरनेशनल ने फार्मा टेक एक्सपो में शोकेस किए अपने प्रोडक्ट्स

चंडीगढ़ । परेड ग्राउंड सेक्टर 17 में चल रहे फार्मा टेक एक्सपो में फार्मास्यूटिकल से जुड़ी नेशनल और इंटरनेशनल कंपनीज अपने अपने उत्पाद पेश कर रही हैं। 10 से 12 अप्रैल तक चलने वाले फार्मा टेक एक्सपो में नालागढ़- बद्दी की विख्यात पैकेजिंग इंडस्ट्री शिवा इंटरनेशनल, जो प्लास्टिक कंटेनर और कैप्स, विशेष रूप से ड्राई सिरप और आई ड्रॉप बोतल सेट का प्रमुख निर्माता है, ने भी अपने उत्पाद शोकेस किए हैं।

शिवा इंटरनेशनल के सीईओ राजन चोपड़ा ने बताया कि शिवा इंटरनेशनल एक पार्टनरशिप फर्म है। हमारी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हमारी नवीनतम प्रौद्योगिकी मशीनें और इनहाउस स्लीविंग सुविधाओं के साथ-साथ अपनी स्वयं की लॉजिस्टिक्स सुविधाएं है। उन्होंने आगे बताया कि हम पूरे उत्तर भारत और कुछ मध्य भारत राज्यों में सफलतापूर्वक सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में उनके कई एक्सपेंशन प्लान्स है। जिससे दवा उधोग के अधिक बड़े वर्ग तक भी हम अपनी पहुंच बना सके। किसी भी तरह की जानकारी के लिए उनकी अधिकृत वेबसाइट www.shivaint.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।

ड्रग जागरूकता पर विशेषज्ञ सत्र और वाडा क्लब की विदाई समारोह

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चंडीगढ़। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन सेक्टर 50, चंडीगढ़ ने कॉलेज कांफ्रेंस रूम में ड्रग जागरूकता पर एक विशेषज्ञ सत्र और उसके बाद वाडा क्लब की विदाई समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना और शैक्षणिक सत्र के दौरान वाडा क्लब के समर्पित छात्र सदस्यों द्वारा किए गए योगदान को मान्यता देना था।

इस सत्र में 100 से अधिक छात्र और संकाय सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर की मुख्य अतिथि डॉ. मीनाक्षी गुप्ता, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ की एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ थीं। डॉ. गुप्ता ने मादक पदार्थों की लत के स्वास्थ्य और समाज पर विनाशकारी प्रभाव के बारे में बात की और छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ध्यान और माइंडफुलनेस को प्रभावी उपकरण के रूप में जोर दिया जो सहकर्मी दबाव का विरोध करने और मादक पदार्थों से बचने में मदद करते हैं। प्राचार्य डॉ. शशि वाहि खुल्लर ने सभा को संबोधित किया और वाडा क्लब के निरंतर और प्रशंसनीय प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने जागरूकता फैलाने और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को संलग्न करने में उत्कृष्ट कार्य किया। कार्यक्रम का समापन वाडा क्लब के संयोजक गुरजिंदर सिंह द्वारा दिए गए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने क्लब की पहलों की सफलता के लिए कॉलेज प्रशासन, संकाय सदस्यों और छात्र स्वयंसेवकों के समर्थन को स्वीकार किया।

पार्किंसंस दूसरा सबसे आम न्यूरोलॉजिकल विकार : डॉ. राहुल महाजन

चंडीगढ़ । पार्किंसंस दूसरा सबसे आम न्यूरोलॉजिकल विकार है। यह एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसके परिणामस्वरूप कंपन, अकड़न और संतुलन और समन्वय में कठिनाई जैसी अनपेक्षित या अनियंत्रित हरकतें होती हैं। हालांकि इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक इसके विकास में योगदान करते हैं। मैक्स अस्पताल, मोहाली के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल महाजन ने कहा कि पार्किंसंस के लक्षणों का शुरुआती चरण किसी का ध्यान नहीं जाता है। शुरुआत में, कंपन और मुद्रा में बदलाव जैसे सूक्ष्म लक्षण एक तरफ दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, दोनों तरफ प्रभावित होते हैं, संतुलन संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं और दैनिक कार्य चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। बाद के चरणों में, गतिशीलता गंभीर रूप से कम हो जाती है, जिससे अक्सर सहायता या व्हीलचेयर पर निर्भरता हो जाती है। शुरुआती लक्षणों को पहचानने से समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। उपचार विकल्पों के बारे में बात करते हुए, डॉ. महाजन ने कहा कि हालांकि वर्तमान में पार्किंसंस के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन दवाएँ, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं और बीमारी की प्रगति को धीमा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि चुनिंदा रोगियों में, डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी ने मोटर लक्षणों को नियंत्रित करने और रोगी की गतिशीलता में सुधार करने में लाभ दिखाया है। “पार्किंसंस रोग के साथ जीना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही चिकित्सा सहायता और पुनर्वास के साथ, व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता बनाए रख सकते हैं और अपनी भलाई को बढ़ा सकते हैं। डॉ. महाजन ने कहा कि व्यायाम और फिजियोथेरेपी पार्किंसंस के लक्षणों को प्रबंधित करने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पार्किंसंस के शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें : डॉ. अनुराग लांबा

पंचकूला । विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर पारस हेल्थ पंचकूला ने शुक्रवार को एक स्वास्थ्य वार्ता और जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्किंसंस बीमारी, इसके लक्षणों और समय पर पहचान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें मरीज, उनके परिजन और अस्पताल के स्टाफ सदस्य शामिल थे। पार्किंसंस जागरूकता माह के अंतर्गत आयोजित इस पहल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि यह केवल एक मूवमेंट डिसऑर्डर नहीं, बल्कि नींद, मनोदशा और सोचने-समझने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। भारत में अनुमानित 5.76 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉ. अनुराग लांबा, डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी, पारस हेल्थ पंचकूला ने कहा, “पार्किंसंस धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। हल्का कंपन, धीमी आवाज़, या छोटी लिखावट जैसी छोटी बातें भी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान की प्रगति के साथ अब इस बीमारी के प्रभाव को धीमा करना और मरीज को बेहतर जीवन देना संभव है। डॉ. पार्थ बंसल, कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी ने बताया कि पार्किंसंस के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान इलाज की दिशा में पहला और सबसे जरूरी कदम है। “मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। डॉ. पंकज मित्तल, फैसिलिटी डायरेक्टर, ने कहा कि इस बीमारी से लड़ने के लिए हमें मल्टीडिसिप्लीनरी और टेक्नोलॉजी-समर्थित दृष्टिकोण अपनाना होगा। जागरूकता इसके लिए पहला कदम है। कार्यक्रम के अंत में जागरूकता और एकजुटता के प्रतीक स्वरूप अस्पताल परिसर में 100 ग्रे गुब्बारे छोड़े गए। इस मौके पर वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. अनिल ढींगरा और डॉ. दिनेश वर्मा भी उपस्थित रहे। पारस हेल्थ का उद्देश्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए जागरूक, सहानुभूतिपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।