Wednesday, July 1, 2026
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मेयर और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सेक्टर 34 डिज्नीलैंड कार्निवाल का किया दौरा

चंडीगढ़ । चंडीगढ़ नगर निगम की मेयर हरप्रीत कौर बबला और चंडीगढ़ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जतिंदर मल्होत्रा ने सेक्टर 34 एग्जीबिशन ग्राउंड में चल रहे डिज्नीलैंड कार्निवाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कार्निवाल प्रबंधन द्वारा मेले में किए गए इंतजाम और झूलों की सुरक्षा का भी निरीक्षण किया। मेयर हरप्रीत कौर बबला और चंडीगढ़ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जतिंदर मल्होत्रा ने इस अवसर पर डिज्नीलैंड कार्निवाल प्रबंधन जिंदल इवेंट्स की सराहना की कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में फुर्सत के पल गुजारने के लिए ट्राईसिटी वासियों के लिए कार्निवाल का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्निवाल हमे हमारी संस्कृति से जोड़ते हैं। मेलों का आयोजन दशकों से होता चला आ रहा है। यह अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होते है, यह उन्हें हमारी परंपरागत मेला संस्कृति से अवगत करवाते हैं। डिज्नीलैंड कार्निवाल प्रबंधन जिंदल इवेंट्स संचालक बिपन जिंदल ने कार्निवाल में विजिट करने पर मेयर हरप्रीत कौर बबला और चंडीगढ़ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जतिंदर मल्होत्रा का आभार जताया।

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए ट्राइडेंट ग्रुप ने अर्थ वीक 2025 मनाया

पंजाब / चंडीगढ़ । सस्टेनेबिलिटी के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भारत के अग्रणी समूह और वैश्विक कपड़ा निर्माताओं में से एक ट्राइडेंट ग्रुप, ने समुदाय-संचालित पहलों की एक श्रृंखला के साथ अर्थ वीक 2025 मनाया। कर्मचारियों ने ग्रीन ऑफिस प्रैक्टिस और आंतरिक प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लिया। ये प्रयास सस्टेनेबिलिटी को न केवल अपनी नीति में शामिल करने बल्कि रोज़मर्रा की कार्रवाई में अपनाने की समूह की संस्कृति को रेखांकित करता है। पंजाब में ट्राइडेंट के निर्माण संयंत्र संघेरा में इस अवसर पर कई गतिविधियां आयोजित की गईं। संयंत्र में “अर्थ वीक 2025” समारोह के अवसर पर पवन सेवा समिति द्वारा संचालित स्कूल में स्पेशियली एबल्ड बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता ने युवाओं को प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को रचनात्मक ढंग से व्यक्त करने का मौका दिया बल्कि कला के जरिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने लिए प्रेरित भी किया। बच्चों ने सुंदर विस्तृत चित्रों के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपने स्नेह को व्यक्त किया। प्रतिभागियों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना ट्राइडेंट प्रतिनिधियों द्वारा बच्चों को सम्मनित कर के की गई।मध्य प्रदेश के बुधनी में अवली घाट पर ट्राइडेंट द्वारा निर्मल नर्मदा अभियान चलाया गया। ग्रुप 0 के सीएसआर विंग के तहत ट्राइडेंट ह्यूमैनिटी फाउंडेशन द्वारा यह पहल की गई। भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक नर्मदा को संरक्षित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम था। इस अभियान में 100 से अधिक स्वयंसेवकों—ट्राइडेंट कर्मचारियों, सी.एस.आर टीम और स्थानीय निवासियों—ने भाग लिया, जो नदी के पुनरुद्धार के लिए एकजुट हुए। ये पहल ट्राइडेंट ग्रुप के मानद चेयरमैन पद्मश्री राजिंदर गुप्ता और सीएसआर प्रमुख श्रीमती मधु गुप्ता के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संपन्न हुईं। यह ट्राइडेंट की पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के प्रति पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयास करने की बड़ी दृष्टि के साथ सतत प्रतिबद्धता, को रेखांकित करता है ।

सेवा ही हमारे जीवन का ध्येय होना चाहिए:अमिताभ रुंगटा

पंचकूला । पंचकूला के औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में श्री श्याम करुणा फाउंडेशन द्वारा श्रद्धा और सेवाभाव के साथ 163वां अन्न भंडारा आयोजित किया गया। इस आयोजन में सैकड़ों लोगों ने अन्न ग्रहण किया और आयोजित भंडारे की सेवा में भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडेशन के संस्थापक और समाजसेवी अमिताभ रूंगटा ने कहा कि निस्वार्थ भाव व जन कल्याण के लिए आयोजित यह अन्न भंडारा मानवता को बढ़ावा देता है। सेवा ही हमारे जीवन का ध्येय होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यह परंपरा आगे भी निरंतर जारी रहेगी और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जाती रहेगी। भंडारे के दौरान फाउंडेशन के सदस्य सक्रिय रूप से उपस्थित रहे और अन्न वितरण सेवा में पूरे समर्पण एवं उत्साह के साथ योगदान दिया। आयोजन में स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों तथा युवा स्वयंसेवकों की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली।

प्रौढ शिक्षा कर्मी यूनियन ने पूर्व जेबीटी अध्यापकों की ग्रेज्युटी व पेंशन जल्द जारी करने की मांग उठाई

चंडीगढ़ । प्रौढ शिक्षा कर्मी यूनियन हरियाणा ने पूर्व अनुदेशक (जेबीटी अध्यापकों) की बकाया राशि का भुगतान करने पर हरियाणा राज्य सरकार और राजेश खुल्लर-(एसीएस) का आभार जताया है। यूनियन ने राज्य सरकार से उनकी ग्रेज्युटी व पैशन भी जल्द से जल्द जारी किए जाने की मांग की है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यूनियन के पदाधिकारी सत्यपाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 1978 में राज्य में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम चलाया गया था। प्रौढ़ शिक्षा कर्मियों ने सितंबर 1985 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर एक समान वेतन की मांग उठाई थी। वर्ष 1988 में इस कार्यक्रम में सेवारत कर्मचारियों ने नियमित कर्मचारियों के सम्मान वेतन की मांग को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार करते हुये राज्य सरकार को निर्देश दिये गये।
वर्ष 1990 में राज्य सरकार द्वारा प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम बंद करने का निर्णय लिया गया। जिसके विरूद्ध हम जैसे याची समायोजन की मांग के साथ पुनः सुप्रीम कोर्ट में गए तथा 17.11.1992 को सुप्रीम कोर्ट ने याची तथा उन समान अन्य कर्मचारियों को उनकी योग्यता के आधार पर शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी में समायोजन के आदेश दे दिए।
वर्ष 1993 में उक्त आदेशों की पूर्ण अनुपालना न होने के कारण दायर की गई कंटेंप्ट पिटीशन को ये कहते हुये खारिज कर दिया कि 28 करोड़ एरिएर में से सरकार 20 करोड़ के करीब दे चुकी है। अतः ये विथफुल्ल कंटेंप्ट के दायरे में नही आती। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने शेष 8 करोड़ रूपये विद होल्ड कर लिये। जो अब तक नहीं दिये गए। जबकि कोर्ट में शिक्षा विभाग ने कहा कि बाकी राशि 8 करोड़ रुपये जल्द ही भुगतान कर देगें। इन आदेशों के संदर्भ में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में कार्य कर रहे कर्मचारियों (लिपिक, चपरासी, ड्राईवर आदि) की 22 श्रेणियों में से 21 श्रेणियों के कर्मचारियों को समायोजित कर लिया गया। जिसमें सुपरवाईजर को एसएस मास्टर के तौर पर समायोजित किया गया। परन्तु हम जैसे इंस्ट्रक्टर्स (जेबीटी) को समायोजित करने की कार्यवाही आज तक पूरी नहीं हुई। राजेश खुल्लर सीपीएससीएम ने केके अग्निहोत्री परामर्शदाता की अगवाई से विरेन्द्र सिंह (एपीओ ) के साथ अनुदेशक (इंस्ट्रक्टर्स) 1. सतपाल शर्मा (जिला हिसार) 2. जयसिंह (जिला भिवानी) 3. औमप्रकाश (जिला पलवल) इन सभी की मौजूदगी में यह फैसला हुआ कि बकाया 8 करोड़ की राशि तुरंत दी जाये और ग्रेच्युटी एवं पेंशन देने का सरकार को परामर्श दिया। राजेश खुल्लर के प्रयासों से बकाया राशि की फाईल नं. 15/3 2023 LC CFM No. 62879 (16414) के माध्यम से हमारे बकाया 8 करोड़ की राशि का भुगतान कर दिया गया है। लेकिन ग्रेज्युटी एवं पेंशन का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। श्रीमान् सुधीर राजपाल IAS ACS शिक्षा विभाग ने ग्रेज्युटी एवं पेंशन का फाईल नं. 15/3 2024 LC CFM No. 5304 ग्रेज्युटी एवं पैशन फाईल बनाने के आदेश दिये। लेकिन आज तक उपरोक्त फाईल नं. सरकारी दफ्तरों ने ही चक्कर काट रही है। अभी तक हमे न्याय नही मिला है। अतः आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त फाईल का निपटान करके ग्रेज्युटी एवं पैंशन भी लागू की जाये। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात कर इसका जल्द से जल्द समाधान कर अनुकंपा के आधार पर जितना ज्यादा से ज्यादा उचित हो भुगतान किया जाए। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही कर्मियों की मांग को पूरा करते हुए ग्रेज्युटी एवं पैंशन राशि का भुगतान करा दिया जाएगा

ड्रग्स का खतरा वैश्विक मुद्दा है, पंजाब को बदनाम करना उचित नहीं: सतनाम सिंह संधू

चंडीगढ़। राज्यसभा सांसद और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2047 तक नशा मुक्त भारत के निर्माण के संकल्प में अपना योगदान दें। वे केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासन द्वारा आयोजित “वॉक फॉर ड्रग फ्री चंडीगढ़” अभियान के दौरान बोल रहे थे। इस अवसर पर पंजाब के गवर्नर एवं केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, हरियाणा के गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू सहित धार्मिक नेता, समाज सुधारक, एनजीओ कार्यकर्ता, चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राओं ने वॉकथॉन में भाग लिया। यह वॉकथॉन चंडीगढ़ शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए और चंडीगढ़ के सेक्टर 17 स्थित त्रियांगा पार्क में संपन्न हुई। अपने संबोधन में राज्य सभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का विजन दिया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री का विजन अमृत काल में भारत को नशा मुक्त भारत बनाना भी है ।
इस संबंध में पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा निभाई जा रही सक्रिय भूमिका पर बोलते हुए, सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पंजाब के गवर्नर ने पंजाब और पूरे क्षेत्र को नशे के खतरे से बचाने के लिए एक नया दृष्टिकोण दिया है जो प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है। नशा मुक्त भारत के लिए, पंजाब के गवर्नर ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को नशे से मुक्त करने की शुरुआत पंजाब की पवित्र धरती से की है जहाँ शहीदों ने देश के लिए अपना खून बहाया है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षाविद् के तौर पर मैंने नशीली दवाओं की लत और दुरुपयोग के मुद्दे को बहुत करीब से देखा है और मुझे लगता है कि इसे केवल कानून और व्यवस्था की समस्या के तौर पर देखना सही नहीं है। यह एक सामाजिक मुद्दा है। यह किसी एक राज्य या देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में नशीली दवाओं के आदी लोगों का प्रतिशत भारत की तुलना में बहुत अधिक है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि आज नशे की समस्या ने भारत के हर राज्य को प्रभावित किया है, लेकिन इस समस्या के लिए केवल पंजाब को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। इतनी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद पंजाब ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। देश के लिए खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी तैयार करने में पंजाब की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिष्ठित माका (मौलाना अबुल कलाम आजाद (माका) ट्रॉफी, जो सबसे ज्यादा खेल पदक जीतने वाली यूनिवर्सिटी को दी जाती है, पिछले 35 वर्षों से पंजाब के पास है। उन्होंने कहा कि खेल के किसी भी क्षेत्र में पंजाब के युवाओं का सर्वाधिक योगदान है। क्रिकेट जैसे सबसे लोकप्रिय खेल में हम अर्शदीप सिंह और शुभमन गिल को भारत के लिए खेलते हुए देखते हैं, फिर पंजाब को नशा युक्त राज्य कैसे कहा जा सकता है? पंजाब के युवा पूरी दुनिया के युवाओं से ज्यादा होनहार हैं। पंजाब की धरती बाकी दुनिया से ज्यादा उपजाऊ है, पंजाब का पानी दुनिया में सबसे पवित्र है और पंजाबियों की सोच बाकी दुनिया से अलग है। लेकिन अगर गुरु नानक की धरती पर थोड़ा बहुत नशा है, तो मुझे लगता है कि उसे भी खत्म कर देना चाहिए। नशा विरोधी अभियान शुरू करने से पहले स्थिति का विश्लेषण करने के लिए पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों का दौरा करने के लिए पंजाब के राज्यपाल की सराहना करते हुए सतनाम सिंह संधू ने आगे कहा कि नशे के नाम पर राजनीति की जाती रही है। यह पहली बार है कि सभी दल, समाज के वर्ग और संगठन इस नशा विरोधी अभियान के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने देश को दुनिया के शीर्ष देशों की कतार में ला खड़ा किया है। पीएम मोदी ने न केवल एक नया सपना दिया है, बल्कि उसे साकार करने का रोडमैप भी दिया है। जब वह भारत को नशा मुक्त बनाने का आह्वान करते हैं, तो वह इसके लिए सिर्फ नारे नहीं देते , बल्कि युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक तरीके से दिशा देने के लिए स्टार्टअप इंडिया और खेलो इंडिया जैसी पहल भी देते हैं।”

ड्राइव करने का लाइसेंस या असहाय सड़क उपयोगकर्ताओं को मारने का लाइसेंस: डॉ. कमल सोई

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चंडीगढ़ । भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और प्रणालीगत विफलता के व्यापक आरोपों के बाद पंजाब की ड्राइवर लाइसेंसिंग प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर जांच के घेरे में है। क्षेत्रीय और राज्य परिवहन प्राधिकरणों पर जनता का विश्वास बुरी तरह से डगमगा गया है, और चौंकाने वाले खुलासों ने राज्य भर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। पंजाब सरकार के परिवहन विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष और राहत – द सेफ कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कमल सोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए ड्राइविंग क्षमता परीक्षणों के लिए माइक्रोसॉफ्ट के एचएएमएस (हारनेसिंग ऑटोमोबाइल फ़ॉर सेफ्टी) सिस्टम को तुरंत लागू करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने वीडियो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सभी पुनः नियुक्त स्मार्टचिप कर्मचारियों को निलंबित करने और उन पर मुकदमा चलाने की मांग भी की। डॉ. सोई ने बताया कि 7 अप्रैल 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पूरे राज्य में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण कार्यालयों और 32 ड्राइविंग टेस्ट केंद्रों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान घूस लेकर लाइसेंस जारी करने की योजनाओं में शामिल सरकारी अधिकारियों, निजी एजेंटों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। कुल 24 गिरफ्तारियां हुईं और विशिष्ट शिकायतों व सूचनाओं के आधार पर 16 एफआईआर दर्ज की गईं। डॉ. सोई ने कहा कि ऊँचे पदों पर बैठे अधिकारियों में रमणदीप सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार किया गया, जबकि प्रदीप सिंह ढिल्लों (आरटीओ मोहाली) और रविंदर कुमार बंसल (आरटीओ एसबीएस नगर) फरार हो गए — जिससे आंतरिक सूचनाओं के लीक होने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हैरानी की बात यह है कि विजिलेंस ब्यूरो के पास पर्याप्त सबूत होने के बावजूद इन अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका, जिसके चलते तत्कालीन प्रमुख एसपीएस परमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और अंततः उन्हें दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित निलंबित कर दिया गया। यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं दिखाता, बल्कि यह भी दिखाता है कि आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। डॉ. सोई ने पंजाब के सभी 32 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैकों के लिए अनुबंधित स्मार्टचिप कंपनी के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस कंपनी पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की, पुराने टेस्ट की फुटेज को दोबारा इस्तेमाल किया, प्रॉक्सी (दूसरे व्यक्ति) से टेस्ट दिलवाए, एक ही वाहन को बार-बार कई फर्जी आवेदकों के लिए चलाया। उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन के नाम पर असल नियंत्रण ऑपरेटरों के हाथ में ही था, जिससे पूरा सिस्टम गड़बड़ियों से भर गया।
डॉ. सोई ने बताया कि हाल ही में स्मार्टचिप कंपनी ने भले ही अपना अनुबंध वापस ले लिया हो, लेकिन पंजाब के परिवहन विभाग ने उसके पुराने कर्मचारियों को दोबारा रख लिया और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट कराने की वही जिम्मेदारी सौंप दी। इससे यह साफ है कि भ्रष्टाचार का जो पूरा तंत्र था, वह बिना किसी सजा के पहले की तरह ही चलता रहा।
स्मार्टचिप के जाने के बाद भले ही ट्रैकों का संचालन परिवहन विभाग ने खुद संभाल लिया हो, लेकिन सिस्टम में जो गड़बड़ियाँ और कमजोरियाँ पहले से थीं, उन्हें ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की गई। ऐसा लगता है कि ये खामियाँ जानबूझकर बनाए रखी गईं ताकि लोग उनका फायदा उठाकर पैसा कमा सकें। डॉ. सोई ने कहा कि जांच से यह पता चला है कि फर्जी उम्मीदवारों के नाम पहले से पास हुए आवेदकों की कॉपी की गई वीडियो से जोड़े गए थे, वाहनों का बार-बार इस्तेमाल किया गया था, लेकिन अलग-अलग आवेदकों के नाम पर, और सरथी पोर्टल पर एक केंद्र पर पंजीकृत आवेदकों का परीक्षण दूसरे केंद्र पर किया गया, जो अक्सर किसी और द्वारा होता था। इसलिए मैं कह रहा हूँ कि इस भ्रष्ट सिस्टम के तहत जो लाखों ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं, वे ड्राइविंग का लाइसेंस नहीं, बल्कि मासूम और असहाय सड़क उपयोगकर्ताओं को मारने का लाइसेंस हैं । डॉ. सोई ने स्पष्ट किया कि 2022 में, परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर और अन्य अधिकारी देहरादून स्थित आई डीटीआर का दौरा किया, जहां माइक्रोसॉफ्ट का एचएएमएस सिस्टम ड्राइविंग क्षमता परीक्षणों के लिए इस्तेमाल हो रहा था। एचएएमएस की पूरी तरह स्वचालित, प्रॉक्सी-फ्री और छेड़छाड़-रोधी प्रकृति से प्रभावित होकर मंत्री ने पंजाब में इसे लागू करने का सुझाव दिया और मोहाली में इसका पायलट टेस्ट शुरू करने की घोषणा की। रिवहन विभाग ने इसके कार्यान्वयन की शुरुआत की, आवश्यक सभी बुनियादी ढांचे और तकनीकी उपकरणों की खरीद की, तथा ट्रैक पर नागरिक निर्माण कार्य भी पूरा किया। हालांकि, एचएएमएस सिस्टम को मोहाली में लागू करने के लिए छह महीने से अधिक का समय हो चुका है, फिर भी इसे लॉन्च नहीं किया गया है। पंजाब में मौजूदा लाइसेंसिंग प्रणाली के पूरी तरह से चरमरा जाने के बावजूद सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। यहां सवाल उठता है — क्या कुछ स्वार्थी तत्व हैं जो भ्रष्ट तंत्र को बचाने के लिए एचएएमएस को जानबूझकर रोक रहे हैं? अगर ऐसा है, तो इसमें कौन-कौन शामिल हैं? उन्होंने कहा कि एचएएमएस के लागू होने से कई फायदे होंगे, जैसे कि पूरे परीक्षण के दौरान उम्मीदवार की चेहरे की पहचान, प्रॉक्सी ड्राइवर्स को खत्म करना, ड्राइविंग प्रदर्शन का रीयल-टाइम और छेड़छाड़-रोधी वीडियो विश्लेषण, कोई मैन्युअल हस्तक्षेप नहीं, स्वचालित एआई-आधारित स्कोरिंग, जिससे मानव विवेक में कमी आएगी, और प्रत्येक परीक्षण के लिए पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी के सभी 3 मॉडेलिटी पार्क अस्पताल में उपलब्ध

पटियाला । ऑस्टियोआर्थराइटिस के बढ़ते रुझान और रोबोटिक घुटने की रिसर्फेसिंग सर्जरी में हालिया प्रगति पर जागरूकता पैदा करने के लिए पार्क अस्पताल पटियाला के डॉक्टरों की एक टीम ने मीडियाकर्मियों को संबोधित किया। इस अवसर पर पार्क अस्पताल में आर्थोपेडिक व रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के डायरेक्टर डॉ भानु प्रताप सिंह सलूजा और ऑर्थोपेडिक्स कंसल्टेंट डॉ सौरभ गर्ग और डॉ मालविंदर सिंह उपस्थित थे। पार्क अस्पताल उत्तर भारत का सबसे बड़ा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नेटवर्क है जिसमें 19 अस्पताल, 3500 बेड, 800 आईसीयू बेड, 14 कैथ लैब, 45 मॉड्यूलर ओटी और 1000 से अधिक डॉक्टर हैं। पार्क हॉस्पिटल मोहाली ने अपने अत्याधुनिक रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शुभारंभ की घोषणा की, जो इस क्षेत्र में ऑर्थोपेडिक देखभाल को फिर से परिभाषित करने के लिए एक अग्रणी सुविधा है। इस रोबोटिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का नेतृत्व डॉ. भानु प्रताप सिंह सलूजा कर रहे हैं, जो 20 से अधिक वर्षों के अनुभव और 25000 से अधिक सफल संयुक्त प्रतिस्थापन सर्जरी के साथ विश्व स्तर पर प्रशंसित ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। पार्क हॉस्पिटल मोहाली इस क्षेत्र का एकमात्र अस्पताल है जो रोबो सूट से सुसज्जित है, जिसमें रोबो #डी, रोबो आई और रोबो आर्म शामिल हैं, जो अभूतपूर्व सटीकता, दक्षता और बेहतर रोगी परिणाम प्रदान करते हैं। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. भानु प्रताप ने कहा कि हमने पार्क अस्पताल मोहाली में 150 से अधिक सफल रोबोटिक घुटने प्रतिस्थापन सर्जरी पूरी की है और पार्क मोहत्सव के तहत, पार्क अस्पताल 30 मई 25 तक हमारे रोगियों को मुफ्त रोबोटिक तकनीक प्रदान करेगा। इस पहल का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवा सुलभ बनाना है। इस अवसर पर बोलते हुए पार्क अस्पताल के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. सौरभ गर्ग ने बताया कि 2023 में 6.1 मिलियन विदेशी पर्यटक मेडिकल वीजा पर भारत आए और 2024 में यह आंकड़ा 7.3 मिलियन तक पहुंचा ।

भारत में चिकित्सा पर्यटन उद्योग 2026 तक 13 बिलियन अमरीकी डॉलर को छूने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय डॉक्टरों को दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित डॉक्टरों के रूप में जाना जाता है; हमारे सर्जिकल परिणाम अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ बेहतर/तुलनीय हैं और भारत में इलाज की लागत अमेरिका या यूरोप में इलाज की लागत का लगभग पांचवां या सातवां हिस्सा है। अपने विचार साझा करते हुए डॉ. मालविंदर सिंह ने बताया कि भारत में इलाज के लिए लागत में भारी लाभ है। हिप रिप्लेसमेंट की लागत जो यूएसए में लगभग 57000 अमरीकी डॉलर है, वही समान इम्प्लांट के साथ भारत में लगभग 7000 अमरीकी डॉलर है।

हाइब्रिड धान पर प्रतिबंध से पंजाब के किसानों की आय पर पड़ेगा असर:अजय राणा

एफएसआईआई ने दी पंजाब सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

मालवा क्षेत्र में किसानों के लिए वरदान है हाइब्रिड धान

चंडीगढ़। पंजाब कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन में हाइब्रिड धान के बीजों की बिक्री और बुआई पर लगाए गए प्रतिबंध से राज्य के धान किसानों की आय को प्रति एकड़ आठ से दस हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। फैडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सीआईआई उत्तर क्षेत्र कृषि समिति के चेयरमैन अजय राणा ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि अन्य राज्यों के किसान वर्षों से हाइब्रिड धान से बेहतर उपज और अधिक आय की बात कर रहे हैं, जो वैज्ञानिक परीक्षणों और किसानों के खेतों में हुए आंकड़ों पर आधारित है। एफएसआईआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई इसी महीने निर्धारित है। राणा ने कहा कि हाइब्रिड धान प्रति एकड़ पांच से छह क्विंटल तक अधिक उपज देता है और इसमें कम जल में ज़्यादा काम किया जा सकता है। इन बीजों पर रोक लगाकर राज्य सरकार छोटे किसानों की लगभग एक महीने की आय छीन रही है। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड धान की किस्में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सरकार द्वारा अधिसूचित हैं। यह अधिक उपज देती हैं, जल संरक्षण में सहायक हैं और पराली जलाने की घटनाएं भी घटाती हैं। इन पर प्रतिबंध लगाकर किसानों को उनकी आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती अपनाने के अवसर से वंचित किया जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रतिबंध 7 अप्रैल 2025 से प्रभावी हुआ है, जिसके तहत आगामी धान रोपण सीजन के लिए हाइब्रिड धान की किस्मों की खेती पर रोक लगाई गई है। सरकार ने इसके पीछे भूजल दोहन और मिलिंग रिकवरी की कम गुणवत्ता को कारण बताया है। लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि हाइब्रिड धान जल की बचत करता है और इसकी मिलिंग रिकवरी पंजाब राज्य द्वारा अनुमोदित किस्मों के समान या बेहतर है। राणा ने कहा कि पंजाब का कृषि क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तकनीकों, जैसे कि हाइब्रिड धान, को अपनाना किसानों की आय बढ़ाने, संसाधनों की बचत और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। किसानों से उनके बीज चयन और विकल्प का मूल अधिकार न छीना जाए। उन्होंने आगे कहा कि मालवा क्षेत्र की मिट्टी में लवणता की समस्या है, जहां हाइब्रिड बीज अधिक अनुकूल साबित हुए हैं और राज्य विश्वविद्यालय की किस्मों की तुलना में कहीं अधिक उपज देते हैं। पंजाब के जी.टी. रोड बेल्ट में किसान धान के साथ आलू या मटर और उसके बाद मक्का जैसी फसलें लेते हैं। हाइब्रिड धान की किस्में कम अवधि की होने के कारण इस तरह के फसल चक्र के लिए अधिक उपयुक्त हैं, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है। इस प्रतिबंध का समय भी चिंता का विषय है, क्योंकि खरीफ 2025 की बुआई का समय नजदीक है। किसान और बीज व्यापारी असमंजस की स्थिति में हैं, जिससे आर्थिक नुकसान की संभावना है।

नीटर चंडीगढ़, आईएसएसी और ज़ीस्केलर ने की ‘कॉपकनेक्ट साइबर वेलनेस क्लिनिक’ की शुरुआत

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चंडीगढ़ । नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च चंडीगढ़ ने 30 अप्रैल को ‘कॉपकनेक्ट साइबर वेलनेस क्लिनिक’ की शुरुआत की । यह क्लिनिक आईएसएसी के साथ मिलकर और ज़ीस्केलर की सीएसआर पहल के तहत शुरू किया जा रहा है। इसका मकसद साइबर सुरक्षा को लेकर ट्रेनिंग, जागरूकता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षा जगत, पुलिस विभाग और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल बन सके। इससे पहले 4 मार्च 2025 को पंजाब यूनिवर्सिटी में इसी तरह का क्लिनिक शुरू किया गया था, जिसे काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। अब नीटर चंडीगढ़ की ये नई पहल विद्यार्थियों, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर समझ और जागरूकता को और आगे ले जाने की कोशिश है। आईएसएसी के टेक्निकल सपोर्ट और ज़ीस्केलर के सहयोग से यह क्लिनिक लोगों को डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी और स्किल्स देगा। चंडीगढ़ के सेक्टर 26 में स्थित इस क्लिनिक में ये सुविधाएं मिलेंगी।

साइबर सुरक्षा पर जागरूकता सेशन – जैसे फिशिंग, पहचान की चोरी और ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें, साइबर लैब्स में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग – ‘साइबररेंज लैब्स’ में असली खतरों से निपटने की तैयारी, पुलिस के साथ मिलकर काम – साइबर क्राइम की जांच में मदद और नई तकनीकों की जानकारी, साइबर सिक्योरिटी के कोर्स और सर्टिफिकेशन – आईएसएसी के 26 सर्टिफाइड प्रोग्राम्स का एक्सेस आदि । ये पूरी पहल नीटर चंडीगढ़, आईएसएसी और ज़स्केलर की मिलकर एक सुरक्षित और जागरूक डिजिटल माहौल बनाने की कोशिश है। इसका मकसद ये है कि छात्र, शिक्षक और कानून व्यवस्था से जुड़े लोग साइबर दुनिया में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें और खुद को सुरक्षित रख सकें।

चंडीगढ़ में खुला पहला हाॅट योगा स्टूडियो, बाॅलीवुड कलाकार व निदेशक दीपक तिजोरी ने किया उद्घाटन

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चंडीगढ़ । मुम्बई में अपनी शानदार सफलता और यूएसए में व्यापक लोकप्रियता के बाद गुरुवार को सेक्टर 17 में चंडीगढ़ का पहला हाॅट योगा स्टूडियो खुला। चंडीगढ़ में वेलनेस डेस्टिनेशन को नया आयाम देते हुये मंदीप हाॅट योगा स्टूडियो ने हठ, अष्टांग, विन्यास और रिदमेटिक योग पर आधारित 25 आसन प्रोग्राम को विशेष रुप से तैयार किया है। स्टूडियो का शुभारंभ 90 के दशक के बॉलीवुड अभिनेता व वर्तमान में निदेशक दीपक तिजोरी ने योगा एक्सपर्ट मंदीप कौर संधू और जानी मानी अदाकार गुरप्रीत चड्ढा की मौजूदगी में किया।
नवनिर्मित स्टूडियो एक हजार वर्ग फीट में फैला है जिसमें प्रत्येक सेशन में 25 प्रतिभागी पर्याप्त स्थान के साथ आराम से आसन कर सकते हैं। मंदीप हाॅट योगा को विशेष रूप से ‘मेल्टिंग चैंबर्स‘ के साथ डिजाइन किया गया है जो कि 41 डिग्री तापमान के साथ 40 फीसदी उमस का आभास प्रदान करवाता है। यह कृत्रिम वातावरण शरीर को बेहतरीन वर्कआउट देने के लिये ही तैयार किया गया है। बिक्रम योग कॉलेज आफ इंडिया के तहत प्रशिक्षित ट्रैंड इंस्ट्रक्टर द्वारा विकसित इस सीक्वेंस को शरीर की मांसपेशियों, लिगामेंट्स, नसों और अंगों के हर हिस्से को सक्रिय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये सेशन शांत और बेहतर रोशनी वाले वातावरण में लचीलेपन, डिटोक्सिफिकेशन और सुरक्षित स्ट्रैचिंग को बढ़ावा देते हैं। प्रत्येक 75 मिनट की क्लास की अगुवाई यूएसए और आस्ट्रेलिया के सर्टिफाईड इंटरनेशनल ट्रैनर्स द्वारा किया जा रहा है जो कि ग्लोबल स्टैंडर्ड पर आधारित एक प्रीमियम लर्निंग एक्सपीरियंस प्रदान करवायेंगें। उद्घाटन सत्र के अवसर पर बोलते हुये मंदीप हाॅट योगा स्टूडियो के मैनजिंग पार्टनर विक्रम सिंह राणा ने कहा कि चंडीगढ़ एक वैलनेस क्रांति के लिये तैयार है और यह स्टूडियों ऐसे फिटनैस प्रेमियों के लिये हमारी पेशकश है जो हैल्थ, अनुशासन और चेंज को महत्व देते हैं। यह स्टूडियो मात्र एक जगह से अधिक है जो कि हीट से हीलिंग प्रदान करता है, जहां ट्रेडेशन (परम्परा), इनोवेशन से मिलती है और जहां वर्क आउट करने वाले की पसीने की हर बूंद शारीरिक शक्ति और मानसिक शांति का आभास प्रदान करवाता है।