चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के विधि विभाग की अध्यक्ष एवं प्रोफेसर तथा विधि संकाय की अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा ने कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अपने लंबे अकादमिक अनुभव, शोध और संस्थागत नेतृत्व के माध्यम से एक विशिष्ट पहचान बनाई है। पंजाब विश्वविद्यालय में 25 से अधिक वर्षों की निरंतर शैक्षणिक सेवा के दौरान उन्होंने अध्यापन के साथ-साथ शैक्षणिक प्रशासन, शोध निर्देशन, नीतिगत परामर्श और संस्थागत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका नेतृत्व केवल विभागीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कानूनी शिक्षा को समकालीन चुनौतियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। संवैधानिक एवं प्रशासनिक कानून, आपराधिक कानून, निगमित एवं वाणिज्यिक कानून, मानवाधिकार, उपभोक्ता संरक्षण तथा शासन जैसे क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता ने उनके अकादमिक कार्य को व्यापक आयाम दिया है।
शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में उल्लेखनीय योगदान
प्रो. अरोड़ा ने शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 10 पीएच.डी. शोध प्रबंधों तथा लगभग 70 एल.एल.एम. शोध-प्रबंधों का मार्गदर्शन किया है। उनके शोध एवं लेखन में उपभोक्ता संरक्षण, संसदीय एवं कार्यपालिका संबंधी विधि-निर्माण, निगमित शासन, लैंगिक विविधता, साइबर सुरक्षा, समान नागरिक संहिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और न्यायिक निर्णय प्रक्रिया जैसे समकालीन विषय शामिल हैं।
विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कानून जैसे उभरते क्षेत्र में उनका अकादमिक कार्य यह दर्शाता है कि वे कानूनी शिक्षा को तकनीकी बदलावों के साथ जोड़ने की आवश्यकता को समझती हैं। उनकी पुस्तक “कानून में कृत्रिम बुद्धिमत्ता : नैतिकता, विनियमन और नवाचार” इसी दिशा में उनके अकादमिक दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रतियोगिता कानून तथा अनुबंध एवं विशिष्ट अनुतोष जैसे विषयों पर भी पुस्तकें लिखी हैं।
विधिक सहायता और सामाजिक न्याय पर जोर
कानून को समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में भी उनका योगदान दिखाई देता है। पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग की विधिक सहायता क्लिनिक से उनका जुड़ाव, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति में सदस्य के रूप में भूमिका तथा बंदियों, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मानवाधिकार विषयों में उनकी विशेषज्ञता उनके सामाजिक न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में व्याख्यान, मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से भी योगदान दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण, सरकारी अधिकारियों के प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानव संसाधन विकास केंद्र के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी कानूनी ज्ञान को व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ने की उनकी भूमिका को दर्शाती है।
अकादमिक नेतृत्व और संस्थागत योगदान
विधि विभाग की अध्यक्ष और विधि संकाय की अधिष्ठाता के रूप में उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे पंजाब विश्वविद्यालय के प्रकाशन ब्यूरो की मानद निदेशक भी रह चुकी हैं। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक परिषदों, अध्ययन मंडलों, चयन समितियों, शोध-प्रबंध सलाहकार समितियों तथा शैक्षणिक लेखा-परीक्षण से संबंधित जिम्मेदारियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
उनका अकादमिक प्रभाव पंजाब विश्वविद्यालय से बाहर भी दिखाई देता है। वे राष्ट्रीय स्तर के संगोष्ठियों और सम्मेलनों में सत्र अध्यक्ष, मुख्य वक्ता और विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल रही हैं। संविधान, विधिक सहायता, कारागार सुधार, श्रम कानून, अपशिष्ट संबंधी कानून, महिलाओं के अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर उनकी सक्रिय भागीदारी कानून के बदलते स्वरूप के प्रति उनकी व्यापक दृष्टि को दर्शाती है।
सम्मान और उपलब्धियां
कानूनी शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिला है। वर्ष 2025 में उन्हें कानूनी अध्ययन के क्षेत्र में जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान तथा वर्ष 2024 में महारानी अहिल्याबाई होलकर पुरस्कार – महिला नेतृत्व से सम्मानित किया गया। विधिक शिक्षा में नेतृत्व तथा सामाजिक सक्रियता और महिला नेतृत्व के क्षेत्र में भी उन्हें प्रशंसा-पत्र प्राप्त हुए हैं। प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा की यात्रा एक ऐसी शिक्षाविद् की यात्रा है, जिसमें अध्यापन, शोध, विद्यार्थी मार्गदर्शन, विधिक सहायता, सामाजिक न्याय और अकादमिक प्रशासन एक-दूसरे से जुड़े दिखाई देते हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग में उनके नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उनका अकादमिक दृष्टिकोण पारंपरिक कानून की शिक्षा से आगे बढ़कर उभरती प्रौद्योगिकियों, शासन, मानवाधिकार और समकालीन कानूनी चुनौतियों तक विस्तृत है। ऐसे समय में जब कानूनी शिक्षा तेजी से बदलती तकनीक, नए कानूनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच नए आयाम तलाश रही है, प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा का अकादमिक अनुभव और नेतृत्व विधि विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण बौद्धिक आधार प्रस्तुत करता है।

