Sunday, June 28, 2026
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श्रीमद्भगवद्कथा का भव्य समापन, पुष्पक कॉम्प्लेक्स में गूंजा भक्ति रस

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चंडीगढ़।  सेक्टर-49 बी स्थित पुष्पक कॉम्प्लेक्स में आयोजित श्रीमद्भगवद्कथा रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद के पावन वातावरण में संपन्न हुई। सात दिनों तक चले इस दिव्य आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण किया और भक्ति रस में सराबोर होते रहे। कथा का अत्यंत भावपूर्ण और सरस वाचन शिवदत्त बहुगुणा  द्वारा किया गया। उनके प्रवचनों में श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेश, जीवन के नैतिक मूल्य और भक्ति के शाश्वत स्वरूप का ऐसा सरल एवं प्रभावी वर्णन रहा कि उपस्थित श्रद्धालु आत्मविभोर हो उठे।समापन दिवस पर पूर्णाहुति, भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ संपूर्ण परिसर भक्तिमय ऊर्जा से आलोकित हो उठा। अंतिम दिन श्रद्धालुओं एवं स्वयंसेवकों की विशेष उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक दिव्यता एवं गरिमा प्रदान की। पूरे सप्ताह के दौरान भक्तों की आस्था, सेवा-भाव और स्वयंसेवकों के समर्पण ने इस आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाया। आयोजन समिति—पुष्पक प्रबंधन समिति एवं पुष्पक संकीर्तन मंडली—ने इस दिव्य कथा के सफल आयोजन हेतु कथावाचक  शिवदत्त बहुगुणा जी, समस्त श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों के प्रति गहन कृतज्ञता एवं हार्दिक आभार व्यक्त किया।

गन्ने के रस की छबील लगाई 

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चण्डीगढ़। अक्षय तृतीया के उपलक्ष में बिजवाड़ा शोरूम मार्केट संगठन, सेक्टर 22 द्वारा गन्ने के रस की छबील लगाई गई। इस अवसर पर गन्ने के रस की छबील का शुभारम्भ नमोकार मंत्र का जाप कर कर किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की जानकारी देते बिजवाड़ा मार्केट के अध्यक्ष दीपक मित्तल ने बताया कि जैन धर्म में इस दिन का बहुत ही पावन और ऐतिहासिक महत्व है, जब पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव आदिनाथ ने लगभग 400 दिनों के कठिन तप/उपवास के बाद राजा श्रेयांस के हाथों हस्तिनापुर में गन्ने के रस (इक्षु रस) के साथ अपना उपवास समाप्त (पारण) किया था। इस विशेष दिन को अक्षय तृतीया  या इक्षु तृतीया  के नाम से भी जाना जाता हैं और इसे ‘पारण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर बिजवाड़ा मार्केट के चेयरमैन सुभाष गुप्ता, राहुल जैन और विवेक जैन ने बताया कि मार्केट एसोसिएशन पिछले 2 वर्ष से यह उत्सव सभी मार्केट सदस्य के सहयोग से मना रही है। इस छबील कार्यक्रम मे जैन समाज के सितंबर जैन दिगंबर जैन स्थानकवासी जैन तेरापंथ जैन के सदस्य सहित मार्किट के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए वीआईपी स्काईबैग्स बना ट्रैवेलर पार्टनर : गुरप्रीत घुग्गी ने किया ने नई रेंज को लॉन्च किया 

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अब सिनेमा दर्शक कंटेंट ढूँढ़ते हैं और फिल्म निर्माता भी इसी कारण अपना रवैया बदलने को मजबूर हो गए हैं : गुरप्रीत घुग्गी

मोहाली । सीएसके यानी चेन्नई सुपर किंग्स के साथ वीआईपी स्काईबैग्स का ट्रैवेलर पार्टनर के तौर पर करार हुआ है। इसके तहत आज सेक्टर 79 स्थित वीआईपी एक्सक्लूसिव शोरूम में मशहूर सेलेब्रेटी गुरप्रीत घुग्गी ने लगेज व ट्रैवल एक्सेसरीज़ की नई रेंज को लॉन्च किया। इस अवसर पर गुरप्रीत घुग्गी ने पंजाबी सिनेमा के बारे में बात करते हुए बताया कि अब दर्शक कंटेंट ढूँढ़ते हैं और फिल्म निर्माता भी इसी कारण अपना रवैया बदलने को मजबूर हो गए हैं। इस अवसर पर शोरूम के मालिक विवेक जॉली ने अपने विज़न और इसकी पृष्ठभूमि को साझा करते हुए बताया कि वे सेक्टर 19-सी, चंडीगढ़ स्थित बख्शी शोरूम के भी संचालक हैं, जो पिछले 40 वर्षों से ग्राहकों की सेवा कर रहा है। वर्षों के दौरान बख्शी शोरूम ने ट्राइसिटी के लोगों के बीच प्रामाणिकता, प्रीमियम गुणवत्ता और भरोसेमंद सेवा की मजबूत पहचान बनाई है।

उन्होंने बताया कि मोहाली में इस शोरूम को खोलने का उद्देश्य उसी भरोसेमंद अनुभव को ग्राहकों तक उनके घरों के करीब पहुंचाना था। चंडीगढ़ में बढ़ते ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, मोहाली, खरड़ और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त शॉपिंग का विकल्प प्रदान करना इसका मुख्य लक्ष्य था, बिना गुणवत्ता या ब्रांड पर भरोसे से समझौता किए। इस कार्यक्रम में वीआईपी इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े कपिल भाटिया ने भी अपने विचार साझा किए और भारत के लगेज उद्योग में कंपनी की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक से पहले अधिकांश भारतीय यात्री पारंपरिक भारी ट्रंकों या लकड़ी के बक्सों का उपयोग करते थे, लेकिन वीआईपी इंडस्ट्रीज ने आधुनिक, हल्के और टिकाऊ लगेज समाधान पेश कर यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया।

मुकेश की यादें  शीर्षक से एक मधुर संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन

जाने कहाँ गए वो दिन…

चण्डीगढ़ । सीनियर्स म्यूज़िक पैशन ग्रुप (एसएमपीजी), चण्डीगढ़ द्वारा पंजाब कला भवन, सेक्टर-16, चंडीगढ़ में जाने कहाँ गए वो दिन – मुकेश की यादें  शीर्षक से एक मधुर संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महान गायक मुकेश के सदाबहार एकल एवं युगल गीतों की प्रस्तुति दी गई। एसएमपीजी के निदेशक व आयोजक कर्नल बी. के. शर्मा (सेवानिवृत्त) ने बताया कि इस कार्यक्रम में ट्राइसिटी, अंबाला, कुरुक्षेत्र और पटियाला से आए प्रतिभाशाली गायकों ने भाग लिया और मुकेश के लता मंगेशकर, आशा भोसले एवं सुमन कल्याणपुर के साथ गाए गए लोकप्रिय युगल गीतों तथा उनके प्रसिद्ध एकल गीतों की शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल राजीव भाटिया (सेवानिवृत्त), एवीएसएम थे। जाने-माने क्विज़ मास्टर किशोर कुमार शर्मा तथा प्रसिद्द रंगमंच कलाकार भारत भूषण भी उपस्थित रहे। ट्राइसिटी के कई प्रतिष्ठित आयोजक भी कलाकारों का उत्साहवर्धन करने हेतु उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत  आशा को एसएमपीजी की और से पूनम डोगरा ने श्रद्धांजलि दी गई। उसके बाद एस.के. अवस्थी द्वारा प्रस्तुत “मतवाली नार ठुमक…” गाया इसके पश्चात डॉ. शशिकांत एवं रेखा ने “एक प्यार का नगमा है” प्रस्तुत किया, जबकि कर्नल बी. के. शर्मा एवं नीलम ने “बिखरा के जुल्फें चमन में न जाना” गीत प्रस्तुत किया।  किशोर कुमार शर्मा ने डॉ. आरती बेदी के साथ “तुमने कभी किसी से कभी प्यार…” प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं रानी सुमन एवं सुरिंदर कक्कड़ ने “फूल तुम्हें भेजा है” से दिल जीत लिया। विक्रमजीत ग्रोवर ने “सजनवा बैरी हो गए हमार” प्रस्तुत किया। आर.सी. दास एवं शिवानी दुआ ने “क्या खूब लगती हो” को सुंदर अंदाज़ में गाया। पंकज वर्मा एवं नीना भाटिया ने “ज़िंदगी की ना टूटे लड़ी” की मधुर प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त कुल 27 गीतों की प्रस्तुति अन्य प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा दी गई, जिनमें डॉ. संजीत एवं डॉ. लवलीन सोढ़ी, अविनाश, पुनीता, रुचिका, किशोर, प्रेम सिंगला एवं अनामिका, डॉ. सत्य भूषण, डॉ. सुप्रिया शर्मा, डॉ. दीपक कौशिक एवं डॉ. स्वरित, दीपक भटनागर, संजय शर्मा, हरजीत सचदेवा, रजनीश, पलविंदर ज़िलेदार, बलविंदर एवं आशा लूथरा, नैन्सी, वेद बागड़ी, तरसेम राज, आर.एन. गुप्ता, गगनदीप एवं मीनल चुघ, तथा नवीन दीवान शामिल रहे। सभी कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजू चौहान एवं श्रीमती नीना भाटिया ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। अपने संबोधन में कर्नल बी. के. शर्मा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एसएमपीजी भविष्य में भी ट्राइसिटी एवं गुरुग्राम के संगीत प्रेमियों के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा तथा वीर नारियों के लिए चैरिटी शो भी आयोजित किए जाएंगे।

जीसीसी स्कूल और पीयूसीए ने आयोजित की चण्डीगढ़ लीडरशिप मीट,कॉमर्स की शिक्षा को नया आयाम देने की तैयारी

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चंडीगढ़ । केसी ग्लोबऐड की एक पहल जीसीसी स्कूल ने पंजाब अनएडेड कॉलेजेज़ एसोसिएशन (पीयूसीए) के सहयोग से पीएचडी चैम्बर, चण्डीगढ़ में एक प्रेस सम्मेलन का आयोजन किया, जिसका विषय था ‘फ्रॉम कैंपस टू कॉर्पोरेटः क्रिएटिंग ग्लोबल फाइनैंशियल लीडर्स’। यह सम्मेलन अकादमिक, सरकार एवं उद्योग जगत के मुख्य प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया।प्रेस सम्मेलन के बाद शाम को एक लीडरशिप मीट आयोजित की गई, जहां पंजाब सरकार के माननीय वित्त मंत्री श्री एस. हरपाल सिंह चीमा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अकादमिक एवं उद्योग जगत के बीच आपसी सहयोग के द्वारा कॉमर्स ग्रेजुएट्स के लिए करियर के विश्वस्तरीय मार्ग प्रशस्त करने पर अर्थपूर्ण चर्चा को बढ़ावा देना था। कॉमर्स के 15 से अधिक अध्यापकों को क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए माननीय मंत्री एस.हरपाल सिंह चीमा द्वारा सम्मानित किया गया, इस अवसर पर पंजाब से 100 से अधिक अकादमिक लीडरों ने भी हिस्सा लिया। जीसीसी स्कूल डॉ. कमल छाबड़ा के दिमाग की उपज है, जो इंटरनेशनल फाइनैंस शिक्षा के जाने-माने नाम तथा केसी ग्लोबऐड के संस्थापक एवं सीईओ हैं। जीसीसी स्कूल के साथ डॉ छाबड़ा ने इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए ऐसा मार्ग प्रशस्त किया है जो शिक्षा को सीधे ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटरों एवं मल्टीनेशनल संगठनों में रोज़गार के अवसरों के साथ जोड़ता है। इस अवसर पर डॉ कमल छाबड़ा, संस्थापक एवं सीईओ, जीसीसी स्कूल और केसी ग्लोबऐड ने कहा, ‘‘वर्तमान में पंजाब का जीडीपी तकरीबन 110 बिलियन डॉलर हे, जो 6-7 फीसदी सालाना दर से बढ़ रहा है और प्रति व्यक्ति आय तकरीबन रु 2.3 लाख सालाना है। भारत जैसे देश ने अपने जीसीसी सेंटरों का पैमाना काफी बढ़ाया है- देश में 1850 सेंटर हैं, जो 2.6 मिलियन लोगों को रोज़गार देते हैं तथा तकरीबन 65 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं। वहीं पंजाब में केवल 5-7 जीसीसी, 1000 से कम कर्मचारी हैं और राज्य के जीडीपी में योगदान 200 मिलियन से भी कम है। ऐसे में पंजाब में 10,000 से अधिक नौकरियां उत्पन्न कर इस अंतर को दूर करना तथा राज्य की जीडीपी को मजबूत बनाने के लिए तकरीबन 2 बिलियन डॉलर का सालाना योगदान ज़रूरी है, जो खासतौर पर फाइनैंस, अकाउन्ट्स, ऑडिट एवं टैक्स जैसे सेक्टरों के विकास से संभव है। ‘‘केसी ग्लोबऐड में हमने छात्रों को सर्टिफिकेट्स जैसे यूएस सीपीए, यूएस सीएमए, यूएस ईए और यूके एसीसीए के माध्यम से ग्लोबल फाइनैंस रोल्स के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। हालांकि जल्द ही हमें यह बात समझ आ गई कि सिर्फ प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है- प्रतिभाशाली युवाओं को कॉर्पोरेट जगत के अवसरों के साथ जोड़ना बेहद ज़रूरी है। इसी सोच के साथ जीसीसी स्कूल का गठन हुआ और हमारी सोच ‘पहले नौकरी पाएं और फिर प्रशिक्षण’ – ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर मॉडल को शिक्षा में शामिल करती है। यहां छात्रों का चुनाव कर उन्हें नौकरी पर रखा जाता है और इसके बाद उद्योग जगत की ज़रूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है- उन्हें भारत में काम करते हुए ग्लोबल रोल्स की नौकरियों के लिए तैयार किया जाता है। यह वास्तव में अपनी तरह का अनूठा मॉडल है।’’ डॉ छाबड़ा ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा।प्रोफेसर (डॉ) मनप्रीत एस. मन्ना, एक्ज़क्टिव डायरेक्टर, जीसीसी स्कूल एवं पूर्व निदेशक एआईसीटीई ने मॉडल के उद्योग-उन्मुख दृष्टिकोण पर बात करते हुए कहा, ‘‘जीसीसी स्कूल का निर्माण उद्योग जगत की वास्तविक उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए किया गया है- जो नेशनल फाइनैंस एंट्रैंस टेस्ट से लेकर असेसमेन्ट एवं इंडस्ट्री इंटरैक्शन तक-एप्टीट्यूड और रैडीनैस दोनों को सुनिश्चित करता है। विश्वस्तरीय लर्निंग जैसे यूके एसीसीए पाठ्यक्रम और ब्रिटिश काउन्सिल के साथ कम्युनिकेशन ट्रेनिंग के द्वारा परिणामों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है, जिससे छात्रों को रु 10 लाख सालाना तक की नौकरियां मिल रही हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि यही समेकित दृष्टिकोण उद्योग जगत के अनुरूप पाठ्यक्रम के ज़रिए ग्रेजुएट्स को बड़ी फर्मों और एमएनसी में काम करने के लिए तैयार करता है।अकादमिक प्रणाली का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री अंशु कटारिया, प्रेज़ीडेन्ट, पीयूसीए एवं चेयरमैन, आर्या ग्रुप ऑफ कॉलेजेज़ ने कहा, ‘‘आज के कॉलेज छात्रों में करियर के परिणामों को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं और इस तरह की साझेदारियां विश्वस्तरीय अवसरों के मार्ग खोलती हैं। पीयूसीए के लिए खुशी की बात है कि इसे जीसीसी स्कूल के साथ साझेदारी का अवसर मिला है। इस तरह के प्रयास दर्शाते हैं कि कैसे अकादमिक एवं उद्योग जगत एक साथ मिलकर छात्रों पर अनुकूल प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं।’’सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों में केसी ग्लोबऐड के संस्थापक एवं सीईओ डॉ कमल छाबड़ा, जीसीसी स्कूल के एक्ज़क्टिव डायरेक्टर और एआईसीटीई के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) मनप्रीत एस. मन्ना, पीयूसीए के अध्यक्ष और आर्य ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज़ के चेयरमैन श्री अंशु कटारिया, त्रिपुरा भवन, नई दिल्ली की रेजिडेंट कमिश्नर श्रीमती सोनल गोयल (आईएएस), और चंडीगढ़ व पंजाब के वरिष्ठ शिक्षाविद, संस्थागत प्रमुख और युवा फाइनेंस के इच्छुक उम्मीदवार भी शामिल रहे। चर्चा का समापन इस दृष्टिकोण के साथ हुआ कि भारत में कॉमर्स की शिक्षा अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। ग्लोबल फाइनैंस रोल्स में विस्तार के साथ उम्मीदारों की तैयारी पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बनाए रखते हुए पेशेवर माहौल का शुरुआती अनुभव प्रदान किया जाए।

रोहित शर्मा की क्रिककिंगडम क्रिकेट एकेडमी डेराबस्सी के दीक्षांत स्कूल में शुरू

यह कोचिंग सुविधा इस क्षेत्र के सभी इच्छुक स्टूडेंट्स और खिलाड़ियों के लिए खुली है

चंडीगढ़ । इस क्षेत्र के खेल जगत को एक बड़ा प्रोत्साहन देते हुए, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल ने अपने डेराबस्सी कैंपस में क्रिककिंगडम के सहयोग से एक विश्व स्तरीय क्रिकेट एकेडमी शुरू की है, जिसे रोहित शर्मा की मेंटरशिप मिली है। इस एकेडमी का लक्ष्य ट्राईसिटी और पंजाब के इच्छुक क्रिकेटरों को व्यवस्थित, इंटरनेशनल स्तर की कोचिंग देना है। इस एकेडमी का उद्घाटन विशाल शर्मा ने किया, जो रोहित शर्मा के भाई हैं और क्रिककिंगडम एकेडमी बॉय रोहित शर्मा के ऑपरेशंस डायरेक्टर भी हैं। बाद में, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन मितुल दीक्षित, विशाल शर्मा और क्रिककिंगडम एकेडमी बॉय रोहित शर्मा के सेल्स हेड गुरुराज वाईएस ने मीडिया के साथ एकेडमी के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। मितुल दीक्षित ने कहा कि यह पहल युवा प्रतिभाओं को निखारने के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि “दीक्षांत में, हम युवा प्रतिभाओं के लिए सार्थक रास्ते बनाने में विश्वास रखते हैं। एकेडमी के साथ-साथ, हम एक विशेष स्पोर्ट्स हॉस्टल भी बना रहे हैं और पूरे उत्तर भारत में सक्रिय रूप से प्रतिभाओं की खोज करेंगे, और होनहार खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण और स्कॉलरशिप्स देंगे। यह एकेडमी रोहित शर्मा की क्रिकेट में उत्कृष्टता से जुड़े दृष्टिकोण पर आधारित है।

क्रिककिंगडम का विश्व स्तर पर स्टैंडर्डाइजेशन ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, जो प्रोफेशनल कोचिंग को एडवांस्ड तकनीक और प्रदर्शन विश्लेषण के साथ जोड़ता है, खिलाड़ियों के संपूर्ण डेवलपमेंट को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रोहित शर्मा समय-समय एकेडमी का दौरा भी करते रहेंगे ताकि युवा प्रशिक्षुओं को सुझाव दे सकें; उनकी मेंटरशिप में विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। इस लॉन्च के अवसर पर बोलते हुए, विशाल शर्मा ने कहा कि “क्रिककिंगडम का मुख्य लक्ष्य ज़मीनी स्तर की कोचिंग में ग्लोबल बेस्ट प्रक्रियाओं को लाकर इस क्षेत्र से विश्व स्तरीय क्रिकेटर तैयार करना है। यह एकेडमी प्रतिभाओं की एक मज़बूत सीरीज़ बनाने की दिशा में एक कदम है, जो उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार होगी। उन्होंने आगे कहा कि “पंजाब और ट्राईसिटी क्षेत्र में बहुत ज्यादा ऐसी क्षमता है जिसका अभी तक पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हुआ है। सही इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग और अनुभव के साथ, हमारा लक्ष्य अनुशासित और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले क्रिकेटरों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है, जो प्रतिस्पर्धी और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स के लिए तैयार हों। इस एकेडमी का उद्घाटन विशाल शर्मा ने किया, क्योंकि रोहित शर्मा इस समय इंडियन प्रीमियर लीग सीज़न की अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। यह एकेडमी इस क्षेत्र के सभी इच्छुक स्टूडेंट्स और युवा क्रिकेटरों के लिए खुली है। बाजार के नजरिए से बात करते हुए, गुरुराज वाईएस ने कहा कि “हमें इस क्षेत्र से बहुत ही उत्साहजनक रिस्पांस मिलने की उम्मीद है। हमारा लक्ष्य विश्व-स्तरीय क्रिकेट प्रशिक्षण को आसानी से उपलब्ध, व्यवस्थित और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराना है। इस सहयोग के साथ, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल, डेराबस्सी खुद को क्रिकेट में एक्सीलेंस के एक उभरते हुए सेंटर के रूप में स्थापित करता है, जो खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रणाली के तहत प्रशिक्षण लेने और प्रतिस्पर्धी स्तर पर इस खेल को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने पार्किंसंस रोग के लिए एडेप्टिव डीबीएस की शुरुआत की

ट्राइसिटी में पहला; भारत के चुनिंदा सेंटर्स में से एक जो नेक्सट जेनरेशन की ब्रेन स्टिम्युलेशन थेरेपी दे रहा है

चंडीगढ़ । हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने पार्किंसंस रोग के लिए एक एडवांस्ड थेरेपी, एडेप्टिव डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन (एडीबीएस) की शुरुआत की घोषणा की। इस नई शुरुआत के साथ, यह अस्पताल ट्राइसिटी में पहला और भारत के उन सीमित और चुनिंदा सेंटर्स में से एक बन गया है जो इस नेक्सट-जेनरेशन इलाज उपलब्ध करा रहा है।यह उपलब्धि अस्पताल की डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन (डीबीएस) सर्जरी में पहले से स्थापित विशेषज्ञता को और मजबूत करती है, जिसके तहत पूरे उत्तर भारत के मरीज़ों के लिए कई सफल प्रोसीजर्स की जा चुकी हैं। हीलिंग हॉस्पिटल न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए एक भरोसेमंद रेफरल सेंटर के रूप में उभरा है, जो इस पूरे रीजन में ब्रेन और स्पाइन (दिमाग और रीढ़ की हड्डी) से जुड़ी जटिल समस्याओं का सफल इलाज करता है। एडेप्टिव डीबीएस पारंपरिक डीबीएस की तुलना में काफी एडवांस्ड और नई डेवलपमेंट है। जहां पारंपरिक सिस्टम्स लगातार स्टिम्युलेशन देती हैं, वहीं एडेप्टिव डीबीएस ब्रेन के संकेतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग करके स्टिम्युलेशन के स्तर को अपने आप एडजस्ट करता है—जो पार्किंसंस के इलाज के लिए एक अधिक सटीक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण प्रदान करता है।डॉ. जे.पी. सिंघवी, न्यूरोलॉजिस्ट, हीलिंग हॉस्पिटल, चंडीगढ़ ने कहा कि “पार्किंसंस के मरीज़ों को अक्सर पूरे दिन उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। एडेप्टिव डीबीएस के साथ, हमारा लक्ष्य स्थिरता में सुधार करना और इन बदलावों को कम करना है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में बेहतर सुधार हो सके।”डॉ. सिंघवी अने समझाया कि , इस प्रक्रिया में एक छोटा सा उपकरण (पेसमेकर जैसा) लगाया जाता है जो मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों को कंट्रोल्ड इलेक्ट्रिक संकेत भेजता है, जिससे असामान्य गतिविधि को नियंत्रित करने और गति से जुड़े लक्षणों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।डॉ.जसप्रीत रंधावा, न्यूरोसर्जन, हीलिंग हॉस्पिटल, चंडीगढ़ ने कहा कि “डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन ने पहले ही एडवांस्ड पार्किंसंस रोग के मैनेजमेंट को बदल दिया है। एडेप्टिव डीबीएस इस प्रक्रिया को और भी बेहतर बनाता है, क्योंकि यह थेरेपी को मरीज़ के मस्तिष्क की गतिविधि के प्रति रियल-टाइम में रिस्पांसिव बनाता है।”इस नई शुरुआत पर प्रतिक्रिया देते हुए, श्री रछपाल सिंह बुट्टर, मैनेजिंग पार्टनर, हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने कहा कि “यह नया इलाज उत्तर भारत में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों को लाने पर हमारे निरंतर ध्यान को दर्शाती है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस क्षेत्र के मरीजों को दूर यात्रा किए बिना, विश्व स्तर के एडवांस्ड उपचार विकल्प उपलब्ध हों। एडेप्टिव डीबीएस हमारे न्यूरोसाइंसेज कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन (डीबीएस) एक जाना-माना इलाज है, जिसमें सही तरीके से चुने गए लगभग 70–80% मरीजों में काफ़ी सुधार देखा गया है। एडेप्टिव डीबीएस इसी आधार पर आगे बढ़ता है, जिसका मकसद लक्षणों में समानता लाना, उतार-चढ़ाव कम करना और जीवन के स्तर और गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।मरीजों को आम तौर पर 2–4 दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ता है और वे 1–2 हफ़्तों के भीतर अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियां फिर से शुरू कर पाते हैं; इसके बाद समय के साथ आगे की प्रोग्रामिंग और ऑप्टिमाइज़ेशन का काम किया जाता है।हीलिंग हॉस्पिटल में एडेप्टिव डीबीएस, मेडट्रॉनिक द्वारा डेवलप किया गया एक एडवांस्ड, सेंसिंग-सक्षम न्यूरोस्टिम्युलेशन तकनीक के जरिए संभव हो पाया है; मेडट्रॉनिक मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में एक ग्लोबल प्रमुख कंपनी है। इस नई पहल के साथ, हीलिंग हॉस्पिटल, भारत के उन चुनिंदा सेंटर्स के समूह में शामिल हो गया है जो एडेप्टिव डीबीएस की सुविधा देते हैं। इस समूह में मेदांता-द मेडिसिटी और अपोलो हॉस्पिटल्स, चेन्नई जैसे प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं।पार्किंसंस रोग एक बढ़ता हुआ न्यूरोलॉजिकल विकार है जो चलने-फिरने, तालमेल बिठाने और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। जिन मरीजों को लंबे समय से यह बीमारी है, या जिन्हें दवाओं से जुड़ी जटिलताएं या चलने-फिरने संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें डीबीएस सर्जरी जैसी एडवांस्ड थेरेपीज से फायदा मिल सकता है।एडेप्टिव डीबीएस की शुरुआत के साथ, हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने उत्तरी भारत में पार्किंसंस के एडवांस्ड इलाज और ब्रेन स्टिम्युलेशन थेरेपी सेंटर के तौर पर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है, जिससे इस क्षेत्र के मरीजों को वैश्विक स्तर की देखभाल आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ एएबीएस से मान्यता प्राप्त है और इस क्षेत्र के सबसे बड़े निजी हेल्थकेयर संस्थानों में से एक है; यह अपनी बेहतरीन मेडिकल हेल्थकेयर सेवाओं, तेज़ी से हो रहे विकास और एडवांस्ड मेडिकल तकनीकों पर विशेष ज़ोर देने के लिए जाना जाता है। यह अस्पताल 25 से ज्यादा मेडिकल स्पेशलिटीज में सेवाएं प्रदान करता है और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उससे भी आगे के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का इलाज करता है।

वेलवेट क्लार्क्स एक्सोटिका ज़ीरकपुर में एंग्लो-इंडियन फूड फेस्टिवल की शुरुआत

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17 से 27 अप्रैल तक मिलेगा खास स्वाद

  • चंडीगढ़/ज़ीरकपुर । वेलवेट क्लार्क्स एक्सोटिका के इल्यूजन आउटलेट में 17 अप्रैल से 27 अप्रैल तक एंग्लो-इंडियन फूड फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। यह 11 दिवसीय फूड फेस्टिवल रोजाना शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक चलेगा, जिसमें मेहमानों को ब्रिटिश और भारतीय स्वादों के अनोखे संगम का अनुभव मिलेगा।
    इस खास फेस्टिवल में एंग्लो-इंडियन व्यंजनों की समृद्ध विरासत को पेश किया जाएगा, जो औपनिवेशिक काल के दौरान विकसित हुई थी। मेन्यू में मुलिगटॉनी सूप, रेलवे मटन कटलेट और रेलवे वेज कटलेट जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं, जो पुराने रेलवे सफर की यादें ताजा करते हैं। मुख्य व्यंजनों में नॉन-वेज बॉल करी विद येलो राइस, रेलवे चिकन करी, चिकन स्टू, वेज जालफ्रेजी और वेज कोलकाता बिरयानी जैसे खास पकवान परोसे जाएंगे। इसके साथ ही मेहमानों के लिए शिमला ईवनिंग स्प्रिट्ज और द एंग्लो हर्ब स्प्लैश जैसे खास मॉकटेल भी उपलब्ध रहेंगे। डेजर्ट में कैरेमल कस्टर्ड और ब्रेड पुडिंग विद वनीला सॉस जैसे क्लासिक मीठे व्यंजन इस अनुभव को खास बनाएंगे। आयोजकों के अनुसार, यह फेस्टिवल सिर्फ खाने का नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव भी होगा, जो परिवारों, कॉर्पोरेट मेहमानों और फूड लवर्स के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। शेफ योगेश ने कहा कि एंग्लो-इंडियन खाना “इतिहास को प्लेट पर परोसने” जैसा है, जहां हर डिश अपनी कहानी बयां करती है। वहीं होटल के जनरल मैनेजर मनींदरजीत सिंह सिबल ने बताया कि यह फेस्टिवल एक अनोखी खानपान विरासत को समर्पित है, जो विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है। आयोजकों ने शहरवासियों से इस खास फूड फेस्टिवल का आनंद लेने की अपील की है।

राधे राधे राधे गोविंद राधे के नाम कीर्तन से श्रीमद्भागवत कथा का छठे दिवस में आनंदपूर्वक प्रवेश हुआ

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चंडीगढ़। कथा की शुरुआत में ही गोस्वामी जी ने सभी भक्तजनों को प्रणाम किया और उन्होंने ने कहा कि असली यजमान कथा में विराजे भगत है, जिनमें सुनने और स्वीकार केरने की समर्थता है । उन्होंने बताया कि संकीर्तन दो तरह के होते है, एक जहां रस बरसाया जाता है और एक वो जहां रस फूटा है। जब कथा संकीर्तन में अपने आप पैर नृत्य के लिए थिरकने लगे वहां रस अंदर से फूटने लगता है जैसे जमीन में से पानी अपने आप रिसने लगता है। जीव अभी उतना परिपक्व नहीं हुआ है कि भगवान के प्रेम का रसा स्वादन कर सके। लेकिन ठाकुर जी करुणा करके श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से उन भक्तों को अपनी लीलाओं का रसा स्वादन करवाते है जो परमात्मा को जानने के लिए उत्सुक है। तेजसविनी फाउंडेशन के फाउंडर हर्ष शर्मा ने कहा कि सभी को इस पावन कथा का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया है। बरसाना प्रकट उत्सव श्री राधा रस भागवत कथा का 7वे दिन आज विश्राम होगा ।

गौरी शंकर सेवादल गौशाला, चंडीगढ़ से विनोद शर्मा जी ने कहा कि आज अंतिम दिन है जिसमें समय सुबह 9 बजे से 12 बजे तक रहेगा । कथा का आयोजन गौरी शंकर सेवादल गौशाला, सेक्टर 45 चंडीगढ़, तेजस्विनी फाउंडेशन पंचकूला द्वारा श्रद्धा के साथ किया जा रहा है, जिसमें ट्राइसिटी के कई सामाजिक और धार्मिक संगठन हिस्सा ले रहे हैं।

संजीव अरोड़ा ने लिवासा अस्पताल मोहाली में एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का शुभारंभ किया

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मोहाली । पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने बुधवार को लिवासा अस्पताल , मोहाली में एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया।सेंटर में अत्याधुनिक रेडिएशन टेक्नोलॉजी उपलब्ध है, जिसका उद्देश्य होलिस्टिक और मल्टी-डिसीप्लिनरी अप्रोच के साथ सटीक, प्रभावी और पेशेंट सेंट्रिक कैंसर उपचार प्रदान करना है।इस अवसर पर बोलते हुए संजीव अरोड़ा ने कहा, इस एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का शुभारंभ पंजाब में कैंसर देखभाल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक तकनीक और समय पर उपचार तक पहुंच लाइफ-सेविंग अंतर ला सकती है, और ऐसी पहल से पूरे क्षेत्र के रोगियों को लाभ होगा।सीईओ- लिवासा हॉस्पिटल्स, अनुराग यादव ने कहा कि एडवांस्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का उद्घाटन, समुदायों के करीब विश्व स्तरीय कैंसर देखभाल प्रदान करने के हमारे मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है।ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम और एक स्ट्रक्चर्ड ट्यूमर बोर्ड, सेंटर का सपोर्ट करते हैं, जहां विशेषज्ञ व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने के लिए प्रत्येक मामले की संयुक्त रूप से समीक्षा करते हैं।इस टीम में डायरेक्टर-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ जतिन सरीन, डायरेक्टर-रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ मीनाक्षी मित्तल, डायरेक्टर-सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ विजय बंसल, डायरेक्टर-सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ शुभ महिंद्रू, , सीनियर कंसल्टेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ प्रियांशु चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट-रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ परनीत सिंह, और कंसल्टेंट-क्लिनिकल हेमेटोलॉजी और बीएमटी डॉ मुकेश चावला शामिल हैं।