Friday, August 14, 2026
HomeHealth & Fitnessजन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित 61 वर्षीय मरीज़ को माइट्राक्लिप...

जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित 61 वर्षीय मरीज़ को माइट्राक्लिप प्रोसीजर से मिली नई ज़िंदगी

चंडीगढ़ । फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के कार्डियोलॉजी विभाग ने हाल ही में एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग के प्रमुख डॉ. आर.के. जसवाल, सीनियर डायरेक्टर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कार्डियोलॉजी और डायरेक्टर – कैथलैब्स, हैं – हाल ही में एक 61 वर्षीय मरीज़ को नई ज़िंदगी दी। मरीज़ को ‘बार्लो सिंड्रोम’ (एक जन्मजात दोष) था, जिसके कारण उनके दिल के माइट्रल वाल्व से बहुत ज़्यादा रिसाव हो रहा था। उनका इलाज माइट्राक्लिप (MitraClip) प्रोसीजर के ज़रिए बिना सर्जरी के ‘ट्रांस-कैथेटर रिपेयर’ से किया गया। इस जन्मजात दोष के कारण माइट्रल वाल्व के लीफलेट्स बहुत बड़े और खराब हो गए थे, जिससे वाल्व से तेज़ी से रिसाव हो रहा था। चूंकि मरीज़ के दिल में माइट्रल वाल्व के लीफ़लेट ठीक से बंद नहीं हो पा रहे थे, इसलिए खून वापस फेफड़ों में जा रहा था। इस वजह से मरीज़ की जीवन की गुणवत्ता खराब हो गई थी और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे कामों के बाद भी उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ होती थी। अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए, मरीज़ ने हाल ही में फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली में डॉ. जसवाल से संपर्क किया। डॉ. जसवाल ने पाया कि गंभीर रूप से खराब और बड़े वाल्व के कारण मरीज़ के दिल का आकार बड़ा हो गया था, दिल की धड़कन अनियमित हो गई थी और बैक प्रेशर (वापस पड़ने वाले दबाव) के कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो गया था। तकनीकी चुनौती यह थी कि माइट्रल वाल्व के लीफलेट्स बहुत बड़े थे (पिछले लीफलेट्स 10 मिमी से ज़्यादा थे) और वाल्व बंद होने के समय उनके बीच बहुत बड़ा गैप (16 मिमी) था। बिना सर्जरी के ट्रांस-कैथेटर माइट्रा क्लिप के ज़रिए वाल्व की ऐसी बनावट को ठीक करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे ज़्यादातर मामलों में, ओपन हार्ट सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है। इस मामले में, डॉ. जसवाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने मरीज़ के माइट्रल वाल्व को ठीक करने के लिए दो सबसे बड़े क्लिप सफलतापूर्वक लगाए और वाल्व से होने वाले रिसाव को काफी हद तक कम कर दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज़ की रिकवरी अच्छी रही और सर्जरी के तीन दिन बाद, 21 जुलाई 2026 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस मामले पर बात करते हुए डॉ. जसवाल ने कहा, “आजकल ऐसे वॉल्व की मरम्मत के लिए बिना सर्जरी वाला तरीका ज़्यादा पसंद किया जाता है क्योंकि यह सुरक्षित है और इसमें रिकवरी तेज़ी से होती है। हालाँकि, जन्म से ही बुरी तरह खराब वॉल्व की मरम्मत बिना सर्जरी के करना बहुत मुश्किल होता है।” डॉ. जसवाल ने आगे कहा कि मरीज़ ठीक हो गए हैं और उन्होंने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की गतिविधियां फिर से शुरू कर दी हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments