Tuesday, June 30, 2026
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बायोमेडिकल साइंसेज में नए क्षितिज विषय पर एसडी कॉलेज में आयोजित हुआ एक दिवसीय सिंपोजियम

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देश विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों ने बायोमेडिकल रिसर्च में नवीनतम प्रगति पर किया विचार विमर्श

चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज में शनिवार को इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी और पंजाब एकेडमी ऑफ साइंसेज के सहयोग से “बायोमेडिकल साइंसेज में नए क्षितिज” विषय पर एक दिवसीय सिंपोजियम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्व के विभिन्न भागों से प्रख्यात वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षक एकत्रित हुए, तथा बायोमेडिकल रिसर्च में नवीनतम प्रगति तथा मानव स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी में परिवर्तन लाने की उनकी क्षमता पर विचार-विमर्श किया गया। सिंपोजियम की शुरुआत अतिथियों व वक्ताओं को पौधा भेंट करने से हुई। जीजीडीएसडी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजय शर्मा ने औपचारिक संदेश दिया। उन्होंने शिक्षाविदों में सहयोग और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। जीजीडीएसडी कॉलेज सोसायटी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ने भविष्य में तकनीकी जानकारी के लिए इस तरह के सिंपोजियम्स की आवश्यकता पर बल दिया। पंजाब यूनिवर्सिटी और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) आरसी सोबती ने अपने संबोधन में मल्टी डिसिप्लनरी साइंटिफिक रिसर्च के उभरते परिदृश्य पर गहन अंतर्दृष्टि प्रदान की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आईआईटी रोपड़ के डॉयरेक्टर डॉ. राजीव आहूजा का मुख्य भाषण था, उन्होंने “एनर्जी एप्लीकेशंस के लिए एडवांस्ड बायो मैटीरियल्स” विषय पर बायो मैटीरियल्स में परिवर्तनकारी सफलताओं और सस्टेनेबल डेलवपमेंट प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने पर चर्चा की। सिंपोजियम में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जो अत्याधुनिक बायोमेडिकल रिसर्च और इनोवेशन पर चर्चा के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। प्रारंभिक सत्र की अध्यक्षता डॉ. हरपाल एस. भुट्टर ने की और डॉ. संजीव पुरी ने बायोमेडिकल रिसर्च, विशेष रूप से रीजेनरेटिव मेडिसिन में प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया। डॉ. डीके अग्रवाल (प्रोफेसर और निदेशक, वेस्टर्न यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, कैलिफोर्निया) ने “स्मार्ट एक्सोसोम्स और इंटेलिजेंट हाइड्रोजेल के साथ टूटे हुए दिल का कायाकल्प” शीर्षक से एक अनूठी प्रस्तुति के साथ सत्र की शुरुआत की, जिसमें हृदय रोग के इलाज के लिए स्मार्ट एक्सोसोम के उपयोग पर प्रकाश डाला गया। डॉ. संजीव ढींगरा, (मैनिटोबा विश्वविद्यालय, कनाडा) ने कार्डियक स्टेम थेरेपी के प्रचार और उम्मीदों पर अपने व्याख्यान में कार्डियक रीजेनरेशन के लिए बायोमटेरियल के उपयोग के बारे में बात की। डॉ. राकेश सी. कुकरेजा (वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी, यूएसए) ने मेडिकल रिसर्च, विशेषकर कैंसर और हृदय संबंधी रोगों में हाल की सफलताओं के बारे में चर्चा की। वहीं, डॉ. सिकंदर एस. गिल ने नवीन, लागत-कुशल और उपयोगकर्ता-अनुकूल माइक्रोचिप आधारित, रियल-टाइम पीसीआर तकनीक के बारे में बात की। दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. डीके अग्रवाल और डॉ. राकेश सी. कुकरेजा ने की, जिसमें हृदय स्वास्थ्य, गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधी रोगों और गैर-औषधीय रणनीतियों से संबंधित उन्नत विषयों पर चर्चा की गई। डॉ. हरपाल एस. भुट्टर (ओटावा यूनिवर्सिटी, कनाडा) ने हृदय संबंधी रोगों की रोकथाम में न्यूट्रिशन, गट फ्लोरा और जीवनशैली संबंधी निर्णयों की भूमिका पर एक व्यावहारिक प्रस्तुति दी। पीजीआई, चंडीगढ़ के डॉ. एस.के. सिन्हा ने आंत के स्वास्थ्य के लिए प्रोबायोटिक्स के चिकित्सीय अनुप्रयोगों पर जोर दिया और डॉ. बसंत कुमार ने हृदय संबंधी बीमारियों के बोझ और प्रबंधन के बारे में बात की। समापन सत्र का समापन प्रोफेसर (डॉ.) आरसी सोबती के समापन भाषण से हुआ, जिसमें वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने में निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। डॉ. नवनीत बत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और आयोजन सचिव डॉ. जसवीन दुआ ने वक्ताओं, प्रतिभागियों और वॉलंटियर्स के अमूल्य योगदान की सराहना की।

बीमा क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में एकजुट हुए सरकारी बीमाकर्मीकर्मचारी कल्याण, लंबित वेतन संशोधन, नियामक सुधा र, सभी वर्गों में पर्याप्त संख्या में भर्ती आदि पर सरकार से किया हस्तक्षेप का अनुरोध

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चंडीगढ़ । बीमा क्षेत्र में सरकार की महत्वकांक्षी योजना ‘इंश्योरेंस फार आल’ तभी संभव है जब वह सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियनों को सशक्त बनाने के प्रयास करे न कि उनका निजीकरण कर। यह भाव जनरल इंश्योरेंस इम्पलाइज एसोसिएशन उत्तरी क्षेत्र की वर्किंग कमेटी की मीटिंग के दौरान प्रकट किये। शनिवार को सेक्टर 17 स्थित एक निजी होटल में आयोजित इस अधिवेशन में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित उत्तरी भारत के लगभग 80 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और निजीकरण के प्रति अपना रोष व्यक्त किया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के महासचिव त्रिलोक सिंह ने बताया कि 25 नवंबर से शुरु होने वाले संसद के शीतकालीन अधिवेशन के मद्देनजर एसोसिएशन ने पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस कंपनियों के निजीकरण और बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी एफडीआई के खिलाफ एक आंदोलनात्मक प्रोग्राम तैयार किया है। उन्होंने बताया कि समय समय पर सरकार उन पर निजीकरण का एजेंडा थोपती रहती हैं जबकि इसकी जगह सार्वजनिक क्षेत्र की चारों कंपनियों – नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का विलय कर सक्रिय उपायों के साथ देश में सरकारी बीमा उद्योग को मजबूती दी जाये।
उन्होंने बताया कि उनका क्षेत्र विपरीत परिस्थितियों में भी भारत सरकार को अपने संचालन के माध्यम से लाभ देते रहे। इसके अलावा सरकार की अन्य समाजिक योजनाओं को लाभ आमजन तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बावजूद इसके इस सेक्टर के कर्मचारी इस आंदोलन के केन्द्र में हैं। सरकार उनकी पीड़ा नहीं समझ रही है जिसके चलते वे संघर्षरत हैं। मंहगाई के इस दौर में भी कर्मचारियों के वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। 26 माह से उनका वेज रिविजन नहीं हुआ जो कि बहुत दुखद है। उन्होंनें चिंता जताई की उनके उद्योग में तीस प्रतिशत फैमली पेंशन है जो कि बैंकिंग, एलआईसी और अन्य राज्य सरकारों में दी जाती है, उनके बीमा क्षेत्र के मात्र 15 फीसदी है जिसे न्यू पेंशन स्कीम के तहत बढ़ाया जाना चाहिये। इस दौरान एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा मेडीक्लेम के लिये सरकारी रेगूलेटर गठन की मांग भी कि जिससे निजी क्षेत्र के बड़े हस्पताल में मेडिकल भुगतान के गोरखधंधों पर अंकुश लगाया जा सके।

ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਲੀਗ 2025′ ਲਈ ਉੱਤਰੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਚੋਣ ਟਰਾਇਲ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿਖੇ ਕਰਵਾਏ

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ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ । ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਲੀਗ (WKL) 2025 ਨੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿਖੇ ਆਪਣੇ ਖੇਤਰੀ ਚੋਣ ਟਰਾਇਲਾਂ ਦੀ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕੀਤੀ। ਇਹ ਟਰਾਇਲ ਉੱਤਰੀ ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਖਿਡਾਰਨਾਂ ਦੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਲਈ ਟ੍ਰਾਇਲ ਪੁਆਇੰਟ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼, ਹਰਿਆਣਾ, ਉੱਤਰਾਖੰਡ, ਪੰਜਾਬ, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ, ਦਿੱਲੀ, ਜੰਮੂ ਅਤੇ ਰਾਜਸਥਾਨ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ। ਉੱਤਰੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ 15,000 ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਖਿਡਾਰੀ ਹਨ, ਅਤੇ ਇਹ ਟਰਾਇਲ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਖੇਡ ਵਿੱਚ ਉੱਤਮਤਾ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਮੌਕੇ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਲੀਗ ਦੇ ਮਿਸ਼ਨ ਦਾ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਿੱਸਾ ਹਨ। ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ, ਲਗਭਗ 800-1,000 ਖਿਡਾਰੀ ਰਾਜ, ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਜਾਂ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰ ਚੁੱਕੇ ਹਨ, ਅਤੇ ਚੋਣ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਦਾ ਕੇਂਦਰ ਹਨ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿੱਚ ਹੋਏ ਟਰਾਇਲਾਂ ਵਿੱਚ 600 ਤੋਂ ਵੱਧ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੇ ਰਜਿਸਟ੍ਰੇਸ਼ਨ ਕਰਵਾਈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ 450 ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੇ ਸਰਗਰਮੀ ਨਾਲ ਭਾਗ ਲਿਆ। ਇਸ ਪ੍ਰਤਿਭਾਸ਼ਾਲੀ ਗਰੁੱਪ ਵਿੱਚੋਂ 100-150 ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਅਗਲੇ ਪੜਾਅ ਲਈ ਚੁਣਿਆ ਗਿਆ ਹੈ। WKL ਦੇ ਸੀਈਓ ਡਾ. ਸੀਮਾ ਨੇ ਮਹਿਲਾ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਦੇ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਗ ਦੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ‘ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ: “ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਲੀਗ ਇੱਕ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਪਹਿਲਕਦਮੀ ਹੈ, ਜਿਸਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਔਰਤਾਂ ਦੀਆਂ ਖੇਡਾਂ ਦੇ ਲੈਂਡਸਕੇਪ ਨੂੰ ਬਦਲਣਾ ਹੈ। ਇਹ ਟਰਾਇਲ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਛੁਪੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਨ ਦੀ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਣ ਹਨ। ਅਸੀਂ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਲੀਗ ਨਹੀਂ ਬਣਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਨੌਜਵਾਨ ਔਰਤਾਂ ਲਈ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਪੈਦਾ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ।” ਡਬਲਯੂ.ਕੇ.ਐਲ. ਦੇ ਮੀਡੀਆ ਬੁਲਾਰੇ ਡਾ. ਜਤਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਨੇ ਜੋਸ਼ ਭਰੇ ਹੁੰਗਾਰੇ ‘ਤੇ ਖੁਸ਼ੀ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਤੀ: “ਮਹਿਲਾ ਕਬੱਡੀ ਲੀਗ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਖੇਡ ਪਹਿਲਕਦਮੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਇਹ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਸ਼ਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਅੰਦੋਲਨ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਉੱਤਰੀ ਜ਼ੋਨ ਤੋਂ ਅਜਿਹੇ ਅਥਾਹ ਉਤਸ਼ਾਹ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਬਹੁਤ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ। ਸਾਡਾ ਉਦੇਸ਼ ਇਨ੍ਹਾਂ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਅਤੇ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਮੰਚ ‘ਤੇ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਦਾ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਦੇਣਾ ਹੈ। ਕਬੱਡੀ ਫੈਡਰੇਸ਼ਨ ਆਫ ਇੰਡੀਆ (ਏ.ਕੇ.ਐਫ.ਆਈ.) ਦੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ (ਹਿਮਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼) ਕ੍ਰਿਸ਼ਨਲਾਲਾ ਜੀ ਨੇ ਵੀ ਇਸ ਸਮਾਗਮ ਵਿੱਚ ਸ਼ਿਰਕਤ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਡਬਲਯੂ.ਕੇ.ਐਲ. ਵਰਗੀਆਂ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕੀਤਾ, “ਉੱਤਰੀ ਜ਼ੋਨ ਵਿੱਚ ਕਬੱਡੀ ਦੀ ਇੱਕ ਅਮੀਰ ਪਰੰਪਰਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਇਹ ਦੇਖਣਾ ਦਿਲਚਸਪ ਹੈ ਕਿ ਨੌਜਵਾਨ ਔਰਤਾਂ ਇਸ ਖੇਡ ਨੂੰ ਜ਼ੋਰਦਾਰ ਢੰਗ ਨਾਲ ਖੇਡ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। WKL ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਕਬੱਡੀ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਮੀਲ ਪੱਥਰ ਹੈ, ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਦਾ ਸਮਰਥਨ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਮਾਣ ਹੈ। ਇਸ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਨੂੰ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਜੋ ਕਿ ਮਹਿਲਾ ਖੇਡਾਂ ਦੀ ਮੋਹਰੀ ਪ੍ਰਮੋਟਰ ਹੈ, ਦਾ ਵੀ ਭਰਪੂਰ ਸਮਰਥਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਇਆ। WKL 2025 ਭਾਰਤੀ ਕਬੱਡੀ ਦੇ ਇਤਿਹਾਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮੀਲ ਦਾ ਪੱਥਰ ਸਾਬਤ ਹੋਇਆ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਖੇਡ ਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਕਰਨ ਦੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਹੈ। ਲੀਗ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਖੇਡਾਂ ਵਿੱਚ ਔਰਤਾਂ ਲਈ ਮੌਕੇ ਪੈਦਾ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਉੱਚ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰ ਸਕਣ ਅਤੇ ਤਰੱਕੀ ਕਰ ਸਕਣ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ, ਟਰਾਇਲ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਖੇਤਰਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪੁਣੇ, ਜਮਸ਼ੇਦਪੁਰ, ਹੈਦਰਾਬਾਦ (ਖੇਤਰੀ ਟਰਾਇਲ) ਅਤੇ ਆਖਰੀ ਤੇ ਸੋਨੀਪਤ (ਫਾਇਨਲ ਟਰਾਇਲ) ਵਿੱਚ ਆਯੋਜਿਤ ਕੀਤੇ ਜਾਣਗੇ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਭਰ ਦੀਆਂ ਮਹਿਲਾ ਖਿਡਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਦਿਖਾਉਣ ਦੇ ਹੋਰ ਮੌਕੇ ਦਿੱਤੇ ਜਾਣਗੇ।

महिला कबड्डी लीग 2025′ के उत्तर क्षेत्रीय चयन ट्रायल्स चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में आयोजित

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चंडीगढ़ । महिला कबड्डी लीग 2025 ने अपने क्षेत्रीय (रीजनल) चयन ट्रायल्स की शुरुआत चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सफलतापूर्वक की। यह ट्रायल्स उत्तर भारत की महिला कबड्डी खिलाड़ियों को हिस्सा लेने के लिए ट्रायल पॉइंट बनाया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू और राजस्थान शामिल हैं।
उत्तर भारत में लगभग 15,000 महिला कबड्डी खिलाड़ी हैं, और यह ट्रायल्स लीग के मिशन का अहम हिस्सा हैं, जो महिलाओं को इस खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इनमें से करीब 800-1,000 खिलाड़ी राज्य, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं, और ये चयन प्रक्रिया का मुख्य केंद्र हैं। चंडीगढ़ में आयोजित ट्रायल्स में 600 से अधिक खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 450 खिलाड़ी सक्रिय रूप से शामिल हुए। इस प्रतिभाशाली समूह से 100-150 खिलाड़ियों को अगले चरण के लिए चुना गया है। महिला कबड्डी लीग की सीईओ डॉ. सीमा ने महिला खिलाड़ियों को सशक्त बनाने की दिशा में लीग की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि महिला कबड्डी लीग एक क्रांतिकारी पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में महिला खेलों के परिदृश्य को बदलना है। ये ट्रायल्स हमारे देश में छिपी हुई प्रतिभाओं को उजागर करने का एक उदाहरण हैं। हम सिर्फ एक लीग नहीं बना रहे, बल्कि हम युवा महिलाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।
महिला कबड्डी लीग के मीडिया प्रवक्ता डॉ. जीतेंद्र कुमार ने उत्साही प्रतिक्रिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महिला कबड्डी लीग सिर्फ एक खेल पहल नहीं है, बल्कि यह भारत में महिला खिलाड़ियों को सशक्त बनाने का आंदोलन है। हमें उत्तर क्षेत्र से इतनी जबरदस्त उत्साह और प्रतिभा देखकर खुशी हो रही है। हमारा उद्देश्य इन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मजबूत मंच देना है। भारतीय कबड्डी महासंघ के कृष्णलाला महासचिव (हिमाचल प्रदेश) भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और महिला कबड्डी लीग जैसी पहलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर क्षेत्र में कबड्डी की एक समृद्ध परंपरा है, और यह देखना दिलचस्प है कि युवा महिलाएं इस खेल को मजबूती से अपना रही हैं। महिला कबड्डी लीग महिला कबड्डी को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो रही है, और हम इस प्रयास का समर्थन करने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

फरीदाबाद के उद्योगपति सजन जैन बने पीएचडीसीसीआई हरियाणा के चेयर

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चंडीगढ़। हरियाणा व केंद्र सरकार तथा उद्योगपतियों के बीच सेतु के रूप में काम करने वाले पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने फरीदाबाद के उद्योगपति सजन कुमार जैन को हरियाणा राज्य चेप्टर का चेयर नियुक्ति किया है। पीएचडीसीसीआई द्वारा हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के लिए नई लीडरशिप का ऐलान किया गया है। इंडो ऑटोटेक लिमिटेड के अध्यक्ष सजन कुमार जैन फरीदाबाद में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के एक प्रमुख उद्योगपति और एक प्रसिद्ध समाजसेवी हैं। अपनी नियुक्ति पर सजन कुमार जैन ने हरियाणा को अवसरों की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे ताकि उद्योग इन नीतियों का अधिकतम लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास की दिशा में काम करने के लिए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर रहेंगे। उद्योगपतियों व सरकार के साथ मिलकर, हम व्यवसायों के लिए और अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं और अपने क्षेत्र की समृद्धि में योगदान दे सकते हैं।

पंजाब पर पहली बार डॉक्यूमेंट्री सीरीज लॉन्च की गई

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डॉक्यू-सीरीज में नशीली दवाओं का दुरुपयोग, जल संकट, शिक्षा की चुनौतियां, पंजाबी शादियों में नाचने वाली लड़कियों का जीवन आदि

चंडीगढ़ । पंजाब के कई मुद्दों को छूने वाली डॉक्यूमेंट्री की एक सीरीज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में जारी की गई। फ्री-टू-एयर सीरीज़ कौम टीवी पर उपलब्ध होगी, जो एक ओटीटी प्लेटफॉर्म है, और यह विशेष रूप से डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के लिए समर्पित है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए इन डॉक्यूमेंट्री के निर्माता और कौम टीवी के सीईओ डॉ.राजीव कुमार ने कहा कि यह बहुत गर्व और गहरे उद्देश्य की भावना के साथ है कि हम कौम टीवी के लॉन्च की घोषणा कर रहे हैं, हैं जो पहला ऐसा ओटीटी प्लेटफॉर्म है जो विशेष रूप से पंजाब के बारे में डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित करने के लिए समर्पित है। यह प्लेटफॉर्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, यह हमारी भूमि और लोगों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों को ध्यान में लाने के लिए आंदोलन भी है। उन्होंने कहा कि कौम टीवी उन विषयों पर प्रकाश डालने की इच्छा प्रकट करता है, जो अक्सर गुमनाम रह जाते हैं जैसे वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा की चुनौतियाँ, नशीली दवाओं का दुरुपयोग और पंजाब में पानी का गंभीर संकट। इन मुद्दों को संबोधित करके, हमारा उद्देश्य जागरूकता पैदा करना, कार्रवाई के लिए प्रेरित करना और दुनिया भर के पंजाबियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने आगे कहा कि यह ऐप निःशुल्क है, इसलिए यह सभी के लिए सुलभ है, क्योंकि हमारा मानना ​​है कि जागरूकता एक अधिकार है, न कि विशेषाधिकार। जो लोग पहले से ही चौपाल प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा हैं, उनके लिए हमारी डॉक्यूमेंट्रीज़ भी उनकी सदस्यता के हिस्से के रूप में उपलब्ध होंगी।
डॉक्यूमेंट्री के डायरेक्टर पारुलप्रीत सिंह ने कहा कि आज, हम गर्व के साथ अपनी पहली पांच डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ कर रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक को पंजाब के लोगों के संघर्ष और लचीलेपन को उजागर करने के लिए परिश्रम और संवेदनशीलता के साथ तैयार किया गया है। आगे बढ़ते हुए, हर तीन हफ़्ते में नई डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ की जाएगी, जिससे प्रभावशाली सामग्री की सतत धारा सुनिश्चित होगी।

रोबोटिक सर्जरी कैंसर मरीजों के लिए वरदान : प्रोफेसर डॉ. पवनिंद्र लाल

मोहाली । चिकित्सा जगत में आई नई तकनीकी क्रांति एवं स्वाथ्य सुविधाओं से भारत अब विदेशों के मुकाबले गंभीर से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को बचाने में सक्षम है, वहीं रोबोटिक सर्जरी गंभीर व जटिल बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए वरदान की तरह साबित हो रही है, यह बात भारत के जाने माने रोबोटिक सर्जन प्रोफेसर (डॉक्टर) पवनिंद्र लाल ने स्थानीय पार्क ग्रेसियन अस्पताल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही, जो कि मिनिमल एक्सेस, एडवांस सर्जिकल साइंस और रोबोटिक सर्जरी से लैस आईएमएआरएस इंस्टिट्यूट के चेयरमैन के रूप में जुड़े हैं। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एक्सपर्ट डॉक्टर पवनिंद्र लाल ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी में चीरे छोटे होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप रोगियों को कम रक्त की हानि होती है और दर्द भी कम होता है। सर्जरी के दौरान न्यूनतम कट, रक्त की हानि, संक्रमण की कम संभावना, कम रक्त आधान, कम निशान और कम आंतरिक चोटों के कारण रोगियों की तेजी से रिकवरी सुनिश्चित होती है। डा पवनिंद्र लाल ने बताया कि हाथों की बजाए रोबोटिक सर्जरी मरीज के लिए कम तकलीफ व ज्यादा लाभदायक साबित हुई है। उन्होंने बताया कि मरीज के आप्रेशन के दौरान शरीर के जिन हिस्सों तक हाथ पहुंचाना मुश्किल था, अब 360 डिग्री तक घूमने वाले रोबोट की मदद से वहां पहुंच की जा सकती है। उन्होंने बताया कि कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए रोबोटिक सर्जरी कैंसर के मरीजों के एक वरदान की तरह है। उन्होंने बताया कि रोबोट की मदद से रोगी के शरीर में डाले गए एक विशेष कैमरे के माध्यम से ऑपरेटिव एरिया का 3डी व्यू देखकर उसको पूरी तरह से तंदरूस्त किया जा सकता है। प्रोफेसर लाल ने बताया कि रोबोटिक्स सर्जरी जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर, गंभीर स्त्री रोग, किडनी व प्रोस्टेट कैंसर, कान-नाक और गले (ईएनटी) के जटिल विकारों, पेट के कैंसर के इलाज के लिए वरदान कि तरह है।

फोर्टिस मोहाली ने माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी के माध्यम से पूरी तरह से कटी हुई उंगली का सफलतापूर्वक रीइम्प्लांटेशन किया

चंडीगढ़ । फोर्टिस अस्पताल, मोहाली ने पूरी तरह से कटी हुई उंगली को फिर से जोड़ने के लिए एक जटिल माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो दुर्घटनाओं के कारण ऐसी स्थिति का सामान करते है। यह उपलब्धि दर्दनाक शरीर से कटे हुए अंग के मामलों में समय पर उपचार के महत्व और कटे हुए शरीर के अंगों को सामान्य कार्य करने में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की भूमिका को उजागर करती है। प्लास्टिक और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. अखिल गर्ग और हाथ सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. विशाल गौतम के नेतृत्व में फोर्टिस मोहाली की टीम ने रीइम्प्लांटेशन सर्जरी की। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. अखिल गर्ग और डॉ. विशाल गौतम ने माइक्रोवैस्कुलर रीइम्प्लांटेशन सर्जरी की जीवन-परिवर्तनकारी क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक केस स्टडी प्रस्तुत की। रीइम्प्लांटेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रोगी के शरीर के पूरी तरह से कटे हुए हिस्से को फिर से जोड़ा जाता है और उसके रक्त प्रवाह को बहाल किया जाता है। एक तीस वर्षीय मैरिज व्यक्ति जिसकी घर पर अपनी बाइक की चेन साफ ​​करते समय बीच वाली उंगली पूरी तरह कट गई थी। तत्काल चिकित्सा सहायता मांगने के बावजूद, ऐसी प्रक्रिया के लिए सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी के कारण शुरू में पास के एक अस्पताल ने उन्हें लौटा दिया। वह चोट लगने के करीब साढ़े तीन घंटे बाद फोर्टिस अस्पताल मोहाली पहुंचा, जहाँ उसकी कटी हुई उंगली बर्फ की थैली में थी। मामले की जानकारी देते हुए, डॉ. अखिल गर्ग, सलाहकार, प्लास्टिक और माइक्रोवास्कुलर सर्जरी ने कहा कि “माइक्रोस्कोपिक माग्निफिकेशन के तहत, सर्जनों ने सावधानीपूर्वक कटी हुई उंगली की हड्डी, नसों, टेंडन और त्वचा को फिर से जोड़ दिया। माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी के माध्यम से रक्त प्रवाह को बहाल किया गया, जिसमें छोटी रक्त वाहिकाओं की मरम्मत शामिल थी। सर्जरी पांच घंटे तक चली, और मरीज को आसानी से, दर्द रहित स्वास्थ्य लाभ हुआ, चार दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उनका लगातार फॉलोअप किया जा रहा है और उनकी उंगली धीरे-धीरे काम करना शुरू कर रही है। डॉ. गर्ग ने बताया कि आमतौर पर उंगलियां, हाथ, कलाई और अग्रभाग अम्प्यूटेशन से प्रभावित होते हैं, जो लगातार मेकैनिकल फोर्सेज के संपर्क में रहते हैं। ज़्यादातर मामलों में, रीइम्प्लांटेशन सबसे अच्छा उपचार विकल्प है, लेकिन समय महत्वपूर्ण है। मरीजों को तुरंत किसी विशेषज्ञ के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि किसी भी देरी से सफल पुनर्रोपण की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मेकैनिकल चोटों के कारण अंग कटना आम बात है, जो सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक घटनाओं और यहां तक ​​कि घरेलू दुर्घटनाओं जैसी विभिन्न स्थितियों में होता है। ये चोटें सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें मामूली कट से लेकर अंगों का पूरा नुकसान शामिल है। यदि उपचार न किया जाए, तो कटा हुआ अंग हमेशा के लिए खत्म हो जाता है, जिससे व्यक्ति आजीवन दिव्यांग हो जाता है। डॉ. गर्ग ने कटे हुए अंगों के उचित संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए सलाह दी कि, “कटे हुए अंग को पहले नम कपड़े (कॉटन का कपड़ा) में लपेटा जाना चाहिए, वाटरप्रूफ पैकेजिंग में रखा जाना चाहिए, और फिर बर्फ या बर्फ के पैक में रखा जाना चाहिए। उन्होंने इन मामलों में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रीइम्प्लांटेशन की सफलता विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें कटा हुआ हिस्सा, चोट की प्रकृति, चोट और सर्जरी के बीच का समय और कटे हुए हिस्से को कैसे संरक्षित किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए एक अनुभवी माइक्रोवैस्कुलर सर्जन और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है, जो केवल कुछ ही अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

फुटबॉल कप में 50 लड़कियों की टीमों सहित 300 टीमें भाग ले रही हैं

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चंडीगढ़। खेल और टेक्नोलॉजी का लाभ उठाकर पंजाब के युवाओं के संपूर्ण विकास के अपने मिशन पर लगातार आगे बढ़ते हुए, राउंडग्लास फाउंडेशन ग्रामीण पंजाब के बच्चों के लिए सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट – राउंडग्लास फाउंडेशन फुटबॉल कप, 2024 (आरएफएफसी) आयोजित कर रहा है। वर्तमान में, 4,000 बच्चे विभिन्न स्थानों पर खेले जा रहे मैचों में अंडर 12 और अंडर 16 कैटेगरीज में मुकाबला कर रहे हैं। टूर्नामेंट में 50 लड़कियों की टीमों सहित कुल 300 टीमें भाग ले रही हैं, जिसका फाइनल मैच 23 नवंबर को मोहाली के सेक्टर 78 स्थित गमाडा कॉम्प्लेक्स में होगा। कविता और विनोद खन्ना फाउंडेशन कि भगदारी से फुटबॉल कप अयोजित किया। राउंडग्लास फाउंडेशन द्वारा चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्रीमती कविता खन्ना ने बच्चों के शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक विकास में फुटबॉल जैसे जोश भरे खेलों के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि “कविता और विनोद खन्ना फाउंडेशन को राउंडग्लास फाउंडेशन फुटबॉल कप 2024 के साथ सहभागिता करने पर गर्व है। जमीनी स्तर पर बच्चों के बीच खेलों को बढ़ावा देना उनके ओवरऑल ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण है। खेलों में शुरुआती जुड़ाव कम्युनिटी और सभी को साथ लेकर चलने की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जो कि शुरुआती वर्षों के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह प्रतिभा को शुरुआती स्तर पर पहचानने और उसका पोषण करने में भी मदद करता है। जमीनी स्तर के खेलों में निवेश करना हमारी आने वाली पीढ़ियों की बेहतरी और क्षमता में निवेश है। आरएफएफसी, राउंडग्लास फाउंडेशन के पंजाब की स्पोर्ट्स कल्चर को फिर से जगाने और राज्य की महान खेल विरासत की याद दिलाने के बड़े मिशन का हिस्सा है। पिछले चार वर्षों में, राउंडग्लास फाउंडेशन ने पंजाब के 400 से अधिक गांवों में 400 स्पोर्ट्स सेंटर स्थापित किए हैं, जो लड़कियों सहित 5 से 16 वर्ष की आयु के 12,000 से अधिक बच्चों को फुटबॉल जैसे टीम खेल सीखने और खेलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ये खेल केंद्र बच्चों की लीडरशिप, टीमवर्क और अनुशासन की क्षमता को विकसित करने और उन्हें पॉजिटिव जीवन विकल्प चुनने में सक्षम बनाने के लिए सुरक्षित स्थान हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए राउंडग्लास फाउंडेशन के लीडर श्री विशाल चौला ने पंजाब के युवाओं के विकास में खेलों के महत्व को दर्शाया। उन्होंने कहा कि “हमारे 400 स्पोर्ट्स सेंटर राज्य के गांवों में बच्चों को खेल के माध्यम से खेलने और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करके उनके जीवन को बदल रहे हैं। हमारा मानना है कि खेल सिर्फ खेल नहीं हैं – वे युवा प्रतिभाओं में लीडरशिप, टीमवर्क, अनुशासन और मजबूती पैदा करने के लिए पॉवरफुल टूल हैं। आरएफसीसी इस विजन का एक प्रमाण है। यह टूर्नामेंट न केवल बच्चों को अपने जुनून और प्रतिभा को दिखाने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म देता है, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपने गांव के भाईचारे की ताकत का जश्न मनाने में भी मदद करता है। श्री चौला ने 50 लड़कियों की टीमों की भागीदारी में तय खेलों के लिए फाउंडेशन के लड़के और लड़कियों को समान मौके देने के दृष्टिकोण के बारे में बताया। उन्होंने कहा किा “हमारे स्पोर्ट्स सेंटर्स में मेहनत कर रहे 12,000 से अधिक बच्चों में से 25% से अधिक लड़कियां हैं। लड़कियों को अलग अलग खेलों से रूबरू करवा कर नए मौके प्रदान करने से उन्हें लैंगिक भेदभाव को तोड़ने में मदद मिलती है, उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है, और उन्हें जीवन में बड़ा सोचने की प्रेरणा मिलती है।

राउंडग्लास फाउंडेशन: परिचय

राउंडग्लास फाउंडेशन 2018 से पंजाब में काम कर रहा है, स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर सामाजिक बदलाव के लिए एक ग्लोबल मॉडल बना रहा है। यह तीन थीम आधारित सेक्टर्स – पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी, युवा विकास और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक निवेश करके बच्चों, युवाओं, महिलाओं और पर्यावरण के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रामीण समुदायों और प्रशासन के साथ मिलकर काफी निकटता से सहयोग में काम करते हुए, राउंडग्लास फाउंडेशन ने द बिलियन ट्री प्रोजेक्ट, लर्न लैब्स और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे अपने विभिन्न जमीनी स्तर पर सफल कार्यक्रमों के माध्यम से पंजाब के 2,300 से अधिक गांवों में 2.3 मिलियन लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सफलता हासिल की है।

सीओपीडी दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा घातक रोग : डॉ सोनल

चंडीगढ़ । क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) पर जागरूकता पैदा करने के लिए लिवासा अस्पताल मोहाली के डॉक्टरों की एक टीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के बारे में विभिन्न तथ्यों और मिथकों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सोनल , पल्मोनोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुरेश कुमार गोयल, , इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. रंजीत कुमार गोन और डॉ जगपाल पंधेर उपस्थित थे। सीओपीडी और इसके उपचारों पर प्रकाश डालते हुए, पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट लिवासा हॉस्पिटल मोहाली, डॉ. सोनल ने कहा कि दुनिया भर में हार्ट प्रॉब्लम्स और कैंसर के बाद सीओपीडी तीसरा सबसे बड़ा घातक रोग है। बहुत से लोग सांस फूलने और खांसी को उम्र बढ़ने का सामान्य प्रभाव समझने की गलती करते हैं। बीमारी के शुरुआती चरणों में, आप लक्षणों को नोटिस नहीं कर सकते हैं। सीओपीडी सांस की तकलीफ के बिना वर्षों तक विकसित हो सकता है। आप रोग के अधिक विकसित चरणों में लक्षण देखना शुरू करते हैं। क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की बीमारी का एक प्रगतिशील रूप है जो हल्के से लेकर गंभीर तक होता है। यह सांस लेने में मुश्किल बनाता है। सीओपीडी लगभग 63 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है, जो दुनिया की सीओपीडी आबादी का लगभग 32% है। डॉ. सुरेश कुमार गोयल ने कहा कि “सीओपीडी से एड्स, टीबी, मलेरिया और मधुमेह की तुलना में अधिक मौतें होती हैं। सीओपीडी अक्सर 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में होता है जिनक धूम्रपान का इतिहास होता है। हर कोई नहीं, लेकिन सीओपीडी वाले अधिकांश व्यक्ति (उनमें से लगभग 90%) धूम्रपान करते हैं। सीओपीडी कार्यस्थल में रसायनों, धूल, धुएं या जैविक खाना पकाने के ईंधन के साथ लंबे समय से संपर्क में आने वाले लोगों में भी हो सकता है । यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति ने कभी धूम्रपान नहीं किया है या विस्तारित अवधि के लिए प्रदूषकों के संपर्क में नहीं आया है, तब भी वे सीओपीडी विकसित कर सकते हैं। ‘भारतीय में सीओपीडी का प्रसार लगभग 5.5 % से 7.55% है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि सीओपीडी की व्यापकता दर पुरुषों में 22% और महिलाओं में 19% है।