Wednesday, July 22, 2026
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पंजाब में गर्भावस्था के दौरान लगातार भीषण गर्मी से नवजातों पर बढ़ा खतरा: अध्ययन

चंडीगढ़ । एक नए अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान लंबी और तेज गर्मी से बच्चे के जन्म पर बुरा असर पड़ सकता है। यह खतरा उन महिलाओं को सबसे ज्यादा है जो पहले से कमजोर हैं। पंजाब के लिए यह बहुत मायने रखता है, क्योंकि यहाँ बड़ी ग्रामीण आबादी ऐसे इलाकों में रहती है, जहाँ गर्मी और नमी वाला मौसम होता है — जिसे इस अध्ययन ने कम वजन वाले बच्चों के जन्म से जोड़ा है। शोध में सामने आया कि नमी वाले उपोष्ण कटिबंधीय इलाकों में गर्मी के कारण बच्चे का वजन कम होने का खतरा अधिक था — और पंजाब का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में आता है। “इफेक्ट ऑफ एक्सट्रीम हीट स्ट्रेस ऑन एडवर्स प्रेगनेंसी आउटकम्स इन इंडिया” शीर्षक वाले इस अध्ययन में 2015 से 2020 के बीच दर्ज 2,09,266 जन्मों का विश्लेषण किया गया। हर जन्म को मां की गर्भावस्था के दौरान स्थानीय गर्मी की स्थिति से जोड़ा गया। औसत या अधिकतम तापमान पर निर्भर रहने के बजाय शोधकर्ताओं ने यह गिना कि एक महिला को लगातार कितने ‘झुलसाने वाले’ दिन झेलने पड़े। ‘झुलसाने वाला दिन’ उसे माना गया जिस दिन इंडिया हीट इंडेक्स उस इलाके की दीर्घकालिक जलवायु के 90वें प्रतिशत से ज्यादा था। यह रिसर्च एक पत्रिका “एनवायरमेंटल रिसर्च कम्युनिकेशन” में प्रकाशित हुआ है। कम जन्म वजन के लिए, जिसे 2,500 ग्राम से कम वजन वाले जीवित शिशु के रूप में परिभाषित किया गया है, गर्भावस्था के दौरान प्रत्येक अतिरिक्त लगातार भीषण गर्मी वाले दिन ने अन्य कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी इसके जोखिम को लगभग 1% बढ़ा दिया। जोखिम का समय भी मायने रखता था। गर्भावस्था की पहली तिमाही (प्रारंभिक चरण) में गर्मी का संबंध समय से पहले जन्म के उच्च जोखिम से पाया गया, और दूसरी तिमाही में गर्मी का संबंध कम जन्म वजन से पाया गया। यह अध्ययन क्वींसलैंड विश्वविद्यालय–आईआईटी दिल्ली अनुसंधान अकादमी (यूक्यूआईडीएआर) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था, जिसमें आईआईटी दिल्ली, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, तथा यूएनएसडब्ल्यू सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर और कोरिया विश्वविद्यालय के सहयोगी शामिल थे। “विनीथा विंसेंट (UQIDAR) ने कहा, ‘गर्मी गर्भावस्था में कोई मामूली बात नहीं है। हर अतिरिक्त भीषण गर्मी का दिन शिशु के लिए खतरा बढ़ाता है, और यह खतरा सबसे ज्यादा उन महिलाओं को होता है जो पहले से असुरक्षित हैं। जब लू के दौरान बढ़ रहे हैं, तो गर्भवती महिलाओं को बचाना भारत की जलवायु योजना का हिस्सा होना चाहिए। अध्ययन में एक स्पष्ट सामाजिक विभाजन भी पाया गया। जिन माताओं ने कोई शिक्षा प्राप्त नहीं की थी या केवल प्राथमिक शिक्षा थी, उनमें बेहतर शिक्षित माताओं की तुलना में गर्मी के अधिक संपर्क के साथ कम जन्म वजन वाले शिशु या मृत जन्म की संभावना अधिक थी।

साग्निक डे, सह-लेखक एवं प्रोफेसर, आईआईटी दिल्ली-:
सबसे ज्यादा गर्मी झेलने वाली माताएँ वही हैं, जिनके पास निपटने के साधन कम हैं — गरीब, कम पढ़ी-लिखी, कुपोषित। अगर हम इस सामाजिक असमानता को नज़र अंदाज़ करेंगे, तो हमारी कोशिशें उन्हीं महिलाओं तक नहीं पहुँच पाएँगी, जिन्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत है। यह नोट (सिंपलीफाई साइन्स) कार्यक्रम के तहत एक परियोजना का हिस्सा है, जिसे असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स प्रा. लि. द्वारा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन और जलवायु विज्ञान के बारे में एक मजबूत कथा (नैरेटिव) तैयार करना है। यह कार्यक्रम लोगों को जलवायु और पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं कल्याण पर इसके प्रभावों के बारे में बातचीत करने के लिए प्रेरित करना चाहता है, जिसमें समाधानों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।”

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