Wednesday, April 22, 2026
HomeEducationभारतीय शिक्षा व्यवस्था की सच्चाइयों को उजागर कर रही है डॉ. रोज़...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सच्चाइयों को उजागर कर रही है डॉ. रोज़ की किताब , चंडीगढ़ प्रेस क्लब में विमोचन

चंडीगढ़ ।  तीन दशकों से शिक्षा जगत को अपनी सेवाएं दे चुके डॉ. हरजिंदर सिंह रोज़ की  पुस्तक “फ्रोम जैतेवाली टू दी हाल्स आफ एकेडमिया” का विमोचन मंगलवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। यह किताब केवल एक जीवन यात्रा का वर्णन नहीं है, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकताओं, उसकी मजबूती, विरोधाभासों और चुनौतियों को लेखक के अनुभवों के जरिए बेहद सच्चाई से सामने लाती है।यह पुस्तक एक साधारण आत्मकथा से भी आगे बढ़कर जीवन के “संघर्ष और संतोष” दोनों पहलुओं को गहराई से प्रस्तुत करती है। पंजाब के जैतेवाला गाँव के साधारण परिवेश में जन्मे डॉ. रोज़ ने अपनी यात्रा में यह दिखाया है कि कैसे परिस्थितियाँ और अवसर मिलकर इंसान की दिशा तय करते हैं। किताब में ग्रामीण जीवन की भावनात्मक और सामाजिक तस्वीर भी उभरती है, जहाँ पारंपरिक मूल्यों के धीरे-धीरे बदलने के साथ-साथ शिक्षा की ताकत को परिवर्तन के साधन के रूप में दर्शाया गया है।करीब 478 पन्नों और 29 चैप्टर में सिमटी इस किताब में भटिंडा स्थित तलवंडी साहिब गुरु काशी विश्वविद्यालय में कुलपति रह चुके डॉ. रोज़ ने शिक्षा जगत की कई कड़वी सच्चाइयों को बेबाकी से रखा है  जैसे एकेडमिक इनब्रीडिंग, रिसर्च में गिरती नैतिकता, सिस्टम की धीमी कार्यप्रणाली और बढ़ता प्रशासनिक हस्तक्षेप। अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने बताया है कि किस तरह संस्थानों के निर्णय, नेतृत्व शैली (लीडरशिप स्टाइल) और नीतियाँ उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और दिशा को प्रभावित करती हैं। बार-बार लीडरशिप में बदलाव, योग्यता से समझौता और संस्थानों में निरंतरता की कमी जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी है।किताब केवल समस्याओं की ओर इशारा नहीं करती, बल्कि शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को भी सामने लाती है। इसमें मेंटरशिप, बौद्धिक ईमानदारी (इंटेलेक्चुअल होनेस्टी) और समाज के प्रति शिक्षकों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है। छात्रों को मार्गदर्शन देने, शोध संस्कृति (रिसर्च कल्चर) को बढ़ावा देने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने के अपने अनुभवों के जरिए डॉ. रोज़ ने ईमानदारी, धैर्य और नैतिकता के महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं।साथ ही, पुस्तक में लेखक के व्यक्तिगत संघर्षों जैसे पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करना, पेशेवर चुनौतियाँ और निजी जीवन की कठिनाईयों का भी उल्लेख है, जिन्होंने उनके दृष्टिकोण को आकार दिया।डॉ. हरजिंदर सिंह रोज़ की यह किताब आत्मकथा, समीक्षा और चिंतन का एक प्रभावशाली संगम है। यह न केवल एक प्रेरक यात्रा को प्रस्तुत करती है, बल्कि पाठकों को शिक्षा के उद्देश्य और उसकी वर्तमान स्थिति पर सोचने के लिए भी प्रेरित करती है ।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments