चंडीगढ़ । इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) मोहाली 27 सितंबर को अपना 20वां स्थापना दिवस मनाएगा। दो दशक के सफर में संस्थान ने विज्ञान शिक्षा, अत्याधुनिक शोध, इनोवेशन और साइंस आउटरीच के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक अनिल के. त्रिपाठी ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक जिज्ञासा, आलोचनात्मक सोच और रिसर्च की क्षमता विकसित करना है। संस्थान में छात्रों को आधुनिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन और शोध के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आईआईएसईआर मोहाली में फिलहाल करीब 1,800 विद्यार्थी बीएस-एमएस प्रोग्राम में और लगभग 500 विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं। संस्थान ने विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में रिसर्च के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की हैं और देश-विदेश के प्रमुख संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग स्थापित किया है। पिछले दो दशकों में आईआईएसईआर मोहाली ने 45 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं, जिनमें सात अंतरराष्ट्रीय पेटेंट शामिल हैं। संस्थान के शिक्षकों और छात्रों को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। कई फैकल्टी सदस्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल्स के एडिटोरियल बोर्ड का हिस्सा भी हैं।

स्टार्टअप और इनोवेशन पर फोकस
आईआईएसईआर मोहाली के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर i-RISE (आई-राईज) के जरिए रिसर्च को स्टार्टअप और व्यावसायिक उपयोग से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में i-RISE (आई-राईज) ने 40 से अधिक स्टार्टअप को सहयोग दिया है, जबकि करीब 20 स्टार्टअप फिलहाल इनक्यूबेशन में हैं। इनमें बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीटेक, हेल्थकेयर, वेस्ट मैनेजमेंट और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए भी i-RISE काम कर रहा है और फिलहाल 20 महिला नेतृत्व वाले टेक्नोलॉजी स्टार्टअप को इनक्यूबेशन और फंडिंग सपोर्ट दिया जा रहा है। इन स्टार्टअप्स ने 12 पेटेंट दाखिल किए हैं, जिनमें से नौ पेटेंट मंजूर हो चुके हैं। i-RISE (आई-राईज) को हाल ही में टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइजेशन, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और डीप-टेक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 3.425 करोड़ रुपये की नई फंडिंग मिली है।
समाज से जुड़े रिसर्च पर जोर
आईआईएसईआर मोहाली के वैज्ञानिक बायोलॉजिकल साइंसेज, केमिस्ट्री, फिजिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट साइंस जैसे क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं। डॉ. आंचल पंचाल ने डॉ. ऋतुबन रायचौधरी के समूह के साथ तथा चंडीगढ़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज की डॉ. रुचिरा सेन के सहयोग से यह अध्ययन किया कि कीड़ों ने लाखों साल पहले अपने भोजन तैयार करने वाले सिस्टम को बीमारियों और दूसरे जीवों से बचाने के तरीके कैसे विकसित किए। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Science में प्रकाशित हुआ। डॉ. उज्जल गौतम और उनकी टीम ने बेकार प्लास्टिक को कार्बन कणों में बदलने का तरीका विकसित किया है। ये कण हवा से ऑक्सीजन हासिल कर सूर्य की रोशनी की मदद से केमिकल रिएक्शन को आगे बढ़ा सकते हैं। यह शोध Journal of the American Chemical Society और Carbon में प्रकाशित हुआ है। प्रो. संजीव कुमार ने जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित DESY और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर ‘स्कर्मियॉन्स’ पर शोध किया है। ये बेहद छोटे चुंबकीय ढांचे हैं, जिनका भविष्य में डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की तकनीक में इस्तेमाल संभव है। यह शोध Advanced Materials में प्रकाशित हुआ। क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में डॉ. संदीप के. गोयल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य भविष्य के क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क के लिए मल्टी-नोड क्वांटम रिपीटर नेटवर्क विकसित करना है। वहीं, डॉ. राजू अट्टादा के नेतृत्व में संस्थान का वेदर एंड क्लाइमेट मॉडलिंग रिसर्च ग्रुप पंजाब के लिए हाई-रिजॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित कर रहा है। यह सिस्टम करीब तीन किलोमीटर के स्तर पर तीन दिन तक का मौसम पूर्वानुमान देने में सक्षम होगा।
रिसर्च और इनोवेशन के लिए नई पहल
संस्थान एशियन डेवलपमेंट बैंक और शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कैंपस में हेल्थकेयर और मेडटेक पर केंद्रित रिसर्च एंड इनोवेशन पार्क स्थापित करने को लेकर उन्नत स्तर पर बातचीत कर रहा है। इसका उद्देश्य रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग को गति देना है। 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईआईएसईआर मोहाली छात्रों के लिए एक नई ट्रांसलेशनल रिसर्च सपोर्ट स्कीम शुरू करेगा। इसके तहत छात्रों को अपने इनोवेटिव आइडिया को रिसर्च से आगे ले जाकर व्यावहारिक समाधान में बदलने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। संस्थान में इनोवेशन लैब भी शुरू की जाएगी। डॉ. सत्यजीत जेना के समन्वय में यह लैब छात्रों को प्रयोग करने, नए प्रोटोटाइप तैयार करने, अलग-अलग विषयों के छात्रों के साथ काम करने और अपने आइडिया को आगे बढ़ाने का अवसर देगी। आईआईएसईआर मोहाली साइंस आउटरीच पर भी लगातार काम कर रहा है। संस्थान में साइंस फेस्टिवल, पब्लिक लेक्चर, स्कूल-कॉलेज विजिट, वैज्ञानिकों के साथ संवाद और साइंस डेमोंस्ट्रेशन के अलावा विज्ञान प्रतिभा और विज्ञान ज्योति जैसे शिक्षक प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 20वें स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत 26 सितंबर को स्कूल छात्रों के लिए ओपन हाउस से होगी। इसमें छात्र कैंपस का दौरा कर फैकल्टी, रिसर्चर्स और अन्य छात्रों से बातचीत कर सकेंगे। इसी दिन विभिन्न प्रमुख संस्थानों के प्रमुखों की भागीदारी वाला एक सिम्पोजियम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें आपसी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। 27 सितंबर को मुख्य स्थापना दिवस समारोह में इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे मुख्य अतिथि होंगे और स्थापना दिवस व्याख्यान देंगे।

