चंडीगढ़ । भारत की सबसे उत्कृष्ट मशीन टूल्स और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी मैकमा एक्सपो 2025 मशीन टूल्स प्रदर्शनी का 12वां संस्करण 14 नवंबर से परेड ग्राउंड, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में शुरू हो रही है, जो 17 नवंबर तक चलेगी और इसका समय सुबह 10 से शाम 6 बजे तक होगा। मैकमा एक्सपो के बारे में जानकारी देते हुए करमजीत सिंह ने बताया कि कल होने वाले संस्करण की तैयारी पूरी हो चुकी है। उन्होंने उद्योगपतियों को इसमें शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक्सपो उत्पाद प्रदर्शन के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं को प्रदर्शित करेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से मैकमा एक्सपो मशीन टूल्स उद्योग और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी के विकास में शीर्ष योगदानकर्ताओं का लक्ष्य रखता रहा है, जो अपने प्रदर्शकों और आगंतुकों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मैकमा एक्सपो का आयोजन फॉर्च्यून एग्जीबिटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है और प्रदर्शनी के इस संस्करण में मशीन टूल्स, प्लास्टिक मशीनरी, ऑटोमेशन और इंजीनियर प्रौद्योगिकी को कवर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी उद्योगपतियों को बेहतरीन अवसर देगी, जो उन्हें अपने क्षेत्र में व्यवसाय बढ़ाने में मदद करेगी। मैकमा एक्सपो का मिशन हमारे ग्राहकों को समर्पित और अनुकूलित व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से व्यावसायिक उत्कृष्टता प्राप्त करने के उनके दृष्टिकोण को साकार करने में सहायता करना है। उन्होंने कहा कि एक्सपो 14 से 17 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा ।
बठिंडा । विश्व डायबिटीज दिवस के अवसर पर, पार्क ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, बठिंडा द्वारा एक निःशुल्क डायबिटीज हेल्थ मेला 14 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। कृष्णा हॉस्पिटल के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन एंडोक्रिनोलॉजी, डायबिटीज और ओबेसिटी की इस पहल का नेतृत्व डॉ सुशील कोटरू और उनकी टीम करेंगे। डॉ सुशील कोटरू ने कहा कि इस मेले के माध्यम से, कृष्णा हॉस्पिटल का उद्देश्य समुदाय को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और ज्ञान के साथ सशक्त बनाना है। यह पहल मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन में नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली के बारे में जागरूकता के महत्व को भी उजागर करती है। हम मधुमेह के बारे में जागरूकता फैलाएंगे, समय पर पहचान को बढ़ावा देंगे और इस बीमारी के प्रभावी प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। मेले के दौरान लोग एचबीए1सी, रक्त शर्करा, शरीर का मास इंडेक्स, फाइब्रो स्कैन (जिगर की जांच), पैर की जांच, रक्तचाप, हड्डियों की घनता का परीक्षण, लिपिड प्रोफाइल और थायराइड डायग्नोस्टिक जांचों का मुफ्त लाभ ले सकते हैं।
मोहाली । विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर, लिवासा अस्पताल, मोहाली ने एक जागरूकता अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य समुदाय को निमोनिया, इसके प्रारंभिक लक्षणों और समय पर निदान और उपचार के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। लिवासा अस्पताल, मोहाली में पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सोनल ने प्रारंभिक निदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि न्यूमोनिया खासकर सर्दियों के महीनों में श्वसन संबंधी अस्पताल में भर्ती के प्रमुख कारणों में से एक है। कई मामलों में स्थिति गंभीर हो जाती है क्योंकि मरीज चिकित्सा सहायता लेने में देरी करते हैं। लगातार खांसी, तेज बुखार या सांस लेने में कठिनाई को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और उचित चिकित्सा प्रबंधन से ठीक होने के परिणामों में काफी सुधार किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि न्यूमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है जो किसी को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दीर्घकालिक बीमारियों वाले लोगों के लिए खतरनाक है। न्यूमोनिया दुनिया भर में बच्चों की मौत का प्रमुख संक्रामक कारण बना हुआ है, जिससे समुदाय स्वास्थ्य के लिए जागरूकता और रोकथाम आवश्यक हो जाती है। यह बच्चों की सुरक्षा की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करता है — जो सबसे अधिक संवेदनशील रहते हैं, समय पर टीकाकरण, अच्छा पोषण, साफ हवा, और समय पर निदान और देखभाल की सुविधा के माध्यम से, डॉ. सोनल ने राय दी। “टीकाकरण, अच्छी स्वच्छता बनाए रखना और श्वसन संबंधी संक्रमणों का त्वरित उपचार गंभीर न्यूमोनिया को रोकने में महत्वपूर्ण कदम हैं। सही समय पर सही देखभाल के साथ, अधिकांश मामलों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है पल्मोनरी मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. कृतार्थ ने कहा। डॉ. कृतार्थ ने जानकारी देते हुए कहा कि निमोनिया अगर इलाज न किया जाए तो तेजी से बढ़ सकता है, जिससे श्वसन विफलता या सेप्सिस जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। लक्षणों को जल्दी पहचानना और योग्य विशेषज्ञों से तुरंत देखभाल प्राप्त करना जान बचा सकता है और लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान से रोक सकता है। लिवासा हॉस्पिटल्स के सीईओ अनुराग यादव ने कहा कि हमारी बहु विषयक टीम और उन्नत फेफड़ों की देखभाल सुविधाएं निदान और उपचार के उच्चतम मानक सुनिश्चित करती हैं। हम शिक्षा, जल्दी इंटरवेंशन और बेहतर देखभाल के माध्यम से जीवन बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
संगीत, नृत्य और कला का संगम, प्रतिभाओं ने बिखेरा जलवा
चंडीगढ़ । सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा 10वीं नि:शुल्क ट्राइसिटी इंटरस्कूल संगीत, नृत्य और कला प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के अनेक स्कूलों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में रिटायर्ड डीएसपी विजयपाल , वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार मुखी, पूर्व डिप्टी मेयर व काउंसलर दलीप शर्मा, सुखराज संधु, योगेश ढींगरा (काउंसलर) तथा रविन्द्र (श्रीराम ग्रुप) विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। केंद्र की इंचार्ज अनीता कपूर ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। निर्णायक मंडल में डॉ. स्मिता बहुगुणा, रचना शर्मा, सुखदेव सिंह और सार्थक सिंह शामिल रहे। प्रधानाचार्य दीपेंद्र कांत ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों और कला के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है।
उन्होंने यह भी बताया कि सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र को हाल ही में दिल्ली के मुक्तधारा ऑडिटोरियम में इंडिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा “भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय” सम्मान से नवाजा गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में भारतीय शास्त्रीय, लोक और समकालीन संगीत के साथ-साथ गायन, वादन और नृत्य की शिक्षा दी जाती है। विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुसार प्रशिक्षण देने की यही शिक्षण पद्धति संस्थान की सफलता का आधार है। केंद्र के वरिष्ठ सदस्य बलदेव मदान ने बताया कि देशभर में संस्थान की 20 शाखाएं कार्यरत हैं, जो प्रयाग संगीत समिति प्रयागराज से मान्यता प्राप्त हैं। अनीता कपूर ने कहा कि “आज के प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। विशेष बच्चों की भागीदारी ने इस आयोजन को और प्रेरणादायक बना दिया।” उन्होंने बताया कि सभी विजेताओं को 1 दिसम्बर को ‘स्वरांजली ग्रैंड फिनाले’ समारोह में सम्मानित किया जाएगा, जो रानी लक्ष्मीबाई भवन, सेक्टर-38, चंडीगढ़ में दोपहर 1:30 बजे आयोजित होगा। कार्यक्रम का मंच संचालन जया आहुजा ने किया। इस अवसर पर केंद्र के सदस्य मोनिका सेठी, सुनीता देवेसर, पूनम सपरा, बिंदु नंद्रा, विमल राय, प्रमोद नंद्रा, सुदर्शन मेहता और आशीष मेहता उपस्थित रहे। अंत में अनीता कपूर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
प्रतियोगिता के परिणाम
एकल गायन :- प्रथम दिव्या पब्लिक स्कूल, द्वितीय संस्कृति-20 पंचकूला, तृतीय सतलुज पब्लिक स्कूल समूह गायन : प्रथम सतलुज पब्लिक स्कूल, द्वितीय जैनेन्द्र पब्लिक स्कूल तृतीय जीएमएसएसएस 37 तथा सांत्वना पुरस्कार मोती राम आर्य स्कूल सोलो डांस : प्रथम जीएमएसएसएस 37, द्वितीय सतलुज पब्लिक स्कूल, तृतीय ज्ञान ज्योति स्कूल ग्रुप डांस : प्रथम जैनेन्द्र पब्लिक स्कूल, द्वितीय मोती राम आर्य स्कूल सेक्टर 27, तृतीय ज्ञान ज्योति स्कूल ग्रुप डांस (फोक) : प्रथम ज्ञान ज्योति स्कूल, द्वितीय सतलुज पब्लिक स्कूल, तृतीय शिशु निकेतन स्कूल सेक्टर 43 नुक्कड़ नाटक : प्रथम जैनेन्द्र पब्लिक स्कूल, द्वितीय शिशु निकेतन स्कूल सेक्टर 43 , तृतीय ज्ञान ज्योति स्कूल
चंडीगढ़। एशिया के प्रमुख जलवायु थिंक टैंकों में से एक, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर ने चंडीगढ़ में “हाउ कैन इंडियन सीटीज अचीव सस्टेनेबल एंड इन्क्यूसिव मोबिलिटी थ्रू शेयर्ड ट्रांसपोर्ट ? विषय पर सीईईडब्ल्यू की कार्यशाला सीरीज फ्यूचर ऑफ अवर सिटीज के तहत एक राउंडटेबल परिचर्चा का आयोजन किया। सीईईडब्ल्यू के शोधकर्ताओं ने बताया कि निजी वाहनों पर अत्यधिक निर्भरता उत्सर्जन, सड़कों पर भीड़भाड़ और ईंधन की मांग लाती है, जिसे बढ़ने से रोकने के लिए एक मजबूत सार्वजनिक परिवहन और आवागमन के स्वच्छ विकल्पों को तेजी से अपनाने की जरूरत है। उन्होंने शहरों में सतत आवागमन सुनिश्चित करने के लिए बसों की संख्या में विस्तार, इंटरमीडिएट पब्लिक ट्रांसपोर्ट – ऑटो रिक्शा और विक्रम – के इलेक्ट्रिफिकेशन और लैंगिक समावेशीकरण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का बदलाव रफ्तार पकड़ रहा है, 2024-25 में 10 लाख से अधिक ईवी यूनिट्स की बिक्री हुई। यह वृद्धि राष्ट्रीय नीतियों , राज्य-स्तरीय ईवी नीतियों और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे के कारण आ रही है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर श्रेणी में विशेष रूप से सबसे तेज वृद्धि देखी गई है। पंजाब के पास अमृतसर में राही परियोजना की सफलता की एक सशक्त कहानी है। सीईईडब्ल्यू ने इस प्रोजेक्ट में अमृतसर नगर निगम का सहयोग किया है। इस पहल ने ईवी अपनाने में आने वाली इन प्रमुख बाधाओं को सफलता के साथ दूर किया है। डीजल की जगह इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (ई-ऑटो) को अपनाने के लिए 1.5 लाख रुपये की शुरुआती सब्सिडी दी गई। औपचारिक बैंक ऋणों तक पहुंच को आसान बनाया गया, जिससे ड्राइवरों को अनौपचारिक कर्ज से बचने में मदद मिली। ई-ऑटो के प्रदर्शन और आर्थिक लाभों में ड्राइवरों का विश्वास बढ़ाने के लिए सूचना अभियान और वाहन प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रमुख स्थानों पर विशेष रूप से निर्मित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया गया, जिससे ई-वाहनों को चार्ज करने में आसानी हुई।इस परियोजना ने पहले ही 1,200 पुराने डीजल वाहनों को नए इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल दिया है, जिससे ड्राइवरों की आजीविका में सुधार आया है और सालाना उत्सर्जन में काफी कमी आई है। डॉ. हिमानी जैन, फेलो, सीईईडब्ल्यू ने कहा कि सीईईडब्ल्यू के अध्ययन दिखाते हैं कि ईवी परिवर्तन से वित्तीय बचत तो बहुत ही स्पष्ट है, लेकिन इसे अपनाने में विश्वास, साथियों का प्रभाव और संचार भी मायने रखता है। वहीं, परिवहन संबंधी सरकारी नीतियों में महिलाए अक्सर बाहर छूट जाती हैं। लेकिन पंजाब की पिंक ई-ऑटो योजना ने दिखाया है कि सही नियोजन से यह कितनी जल्दी बदलाव आ सकता है। व्यवहार संबंधी जानकारियों और लैंगिक समावेश को नीति में शामिल करके, पंजाब अपने पायलट प्रोजेक्ट को आगे विस्तार बढ़ा सकता है और भारत में ईवी परिवर्तन के अगले चरण का नेतृत्व कर सकता है। इस तरह से सस्टेनेबल मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए इन प्रमुख उपायों को अपनाने का सुझाव देते हैं। पहला, निजी वाहनों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प देने की मुख्य रणनीति के तौर पर सार्वजनिक बसों की संख्या को तेजी से विस्तार देना चाहिए। दूसरा, अमृतसर की राही परियोजना की स्थापित सफलता का लाभ उठाते हुए, लक्षित सब्सिडी, औपचारिक वित्तीय सहायता, ड्राइवर-केंद्रित जागरूकता और सभी प्रमुख शहरों में रणनीतिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से मीडिएट पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इलेक्ट्रिफिकेशन को विस्तार देना चाहिए। तीसरा, राज्यों की आवागमन की नीतियों में लिंग-अनुकूल उपायों को शामिल करना चाहिए- जैसे महिला ड्राइवरों के लिए उच्च सब्सिडी, एनयूएलएम जैसे स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी, और प्रशिक्षण व लाइसेंस तक बेहतर पहुंच। अंत में, सभी ड्राइवरों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षा और सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन, बेहतर स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय और सुरक्षित पार्किंग क्षेत्रों जैसे सहायक बुनियादी ढांचे का विकास करना चाहिए।
सौपिन्स स्कूल, चंडीगढ़ ने लड़कों की अंडर-10 ख़िताब अपने नाम किया , लड़कियों की अंडर-10 वर्ग में लर्निंग पाथ्स स्कूल ने जीता टूर्नामेंट
टूर्नामेंट के आठवें दिन तीसरे स्थान के लिए भी मैच खेले गए
चंडीगढ़ । अंडर-14 लड़कों के फाइनल में सेंट कबीर स्कूल, चंडीगढ़ ने स्ट्रॉबेरी फील्ड्स स्कूल, चंडीगढ़ को 45-38 से हराया। विजेता टीम के लिए मुख्य स्कोरर वरदान (27) रहे, जबकि उपविजेता टीम के लिए मुख्य स्कोरर रियांश (15) रहे।अंडर-14 लड़कियों के फाइनल में सेक्रेड हार्ट स्कूल, चंडीगढ़ ने लर्निंग पाथ्स स्कूल (LPS), मोहाली को 32-19 से हराया। विजेता टीम के लिए कैलिस्टा ने 09 अंक बनाए, जबकि उपविजेता टीम के लिए खुशनूर ने 16 अंक बनाए।लड़कों के अंडर-10 वर्ग के फाइनल में, सौपिंस स्कूल, चंडीगढ़ ने विवेक हाई स्कूल, मोहाली को 14-12 से हराकर जीत हासिल की। विजेता टीम के लिए अकुल ने 6 अंक बनाए, जबकि उपविजेता टीम के लिए अबीर ने 10 अंक बनाए। सौपिंस स्कूल, चंडीगढ़ का लीग स्कोर सबसे बेहतरीन रहा ।लड़कियों के अंडर-10 वर्ग में, लर्निंग पाथ्स स्कूल ने टूर्नामेंट अच्छे लीग स्कोर्स की वजह से जीत लिया। जबकि अंडर-10 मुक़ाबले लीग फॉर्मेट पर खेले गए बाकी के वर्ग – अंडर 12 , 14 और 17 नॉक-आउट फॉर्मेट पर खेले गए ।बुधवार को लड़कियों के अंडर-12 सेमीफाइनल मैच में, वाईपीएस, मोहाली ने सौपिंस स्कूल को 15-6 से हराया। विजेता टीम के लिए मुख्य स्कोरर लियाना (11) थीं, जबकि हारने वाली टीम के लिए रेवा (06) मुख्य स्कोरर थीं।
तीसरे स्थान के लिए खेले गए अंडर-14 लड़कियों के मैच में, विवेक हाई स्कूल, मोहाली ने जीएनपीएस, चंडीगढ़ को 23-6 से हराया। विजेता टीम के लिए गुररहमत ने 13 अंक बनाए और हारने वाली टीम के लिए प्रभजोत ने 3 अंक बनाए।अंडर-14 लड़कों के वर्ग में तीसरे स्थान के लिए हुए एक अन्य मैच में वाईपीएस, मोहाली ने केवी हाई ग्राउंड, चंडीगढ़ को 39-29 से हराया। विजेता टीम के लिए गुरमत ने 27 अंक बनाए, जबकि हारने वाली टीम के लिए अक्ष ने 14 अंक बनाए।अंडर-12 लड़कों के वर्ग में तीसरे स्थान के लिए खेले गए मैच में विवेक हाई स्कूल, चंडीगढ़ ने लर्निंग पाथ्स स्कूल, मोहाली को 8-4 से हराया। विजेता टीम के लिए फतेहबीर ने 6 अंक बनाए, जबकि उपविजेता टीम के लिए गुरकीरत ने 2 अंक बनाए।
अंडर-17 लड़कियों के वर्ग में तीसरे स्थान के लिए खेले गए मैच में सेक्रेड हार्ट स्कूल, चंडीगढ़ ने एलपीएस, मोहाली को 38-23 से हराया। विजेता टीम के लिए मुख्य स्कोरर जिया (25) और हारने वाली टीम के लिए मुख्य स्कोरर हरनीत (13) रहीं।अंडर-17 बॉयज़ (तीसरा स्थान) में वाईपीएस, मोहाली ने सौपिंस स्कूल, चंडीगढ़ को 53-40 से हराया। वाईपीएस के लिए सिमरनजोत (23) सर्वोच्च स्कोरर रहीं, जबकि हारने वाली टीम के लिए आदित्य ने 20 अंक बनाए।शेष फाइनल मैच कल खेले जाएंगे और पुरस्कार वितरण समारोह दोपहर 1:30 बजे बास्केटबॉल स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सेक्टर 42, चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।
विवेक हाई स्कूल, मोहाली की टीमें दोनों बॉयज अंडर-12 और अंडर-17 वर्गों में फाइनल्स में हुई दाखिल
चंडीगढ़। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सेक्टर 42 में आयोजित सरदार भगवंत सिंह मेमोरियल बास्केटबॉल ट्रॉफी के सातवें दिन सेमीफाइनल के मुकाबले करवाए गए । खेले गए मुकाबलों में खिलाड़ियों ने जोश, टीम भावना और उत्कृष्ट खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। दर्शकों ने रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया, जिनमें हर टीम ने जीत के लिए भरपूर संघर्ष किया।
सेमीफाइनल मैचों के रिजल्ट इस प्रकार रहे :
बॉयज अंडर-14 में सेंट कबीर स्कूल, चंडीगढ़ ने वाई.पी.एस. स्कूल, मोहाली को 43 -28 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम के आदित ने 15 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम के गुरमत ने 17 अंक अर्जित किया। गर्ल्स अंडर-14 में सेक्रेड हार्ट स्कूल, चंडीगढ़ ने जी.एन.पी.एस. स्कूल, चंडीगढ़ को 46-16 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम की कॉलिस्टा ने 11 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम की प्रभजोत ने 8 अंक अर्जित किए । गर्ल्स अंडर-17 में जी.एन.पी.एस. स्कूल, चंडीगढ़ ने सेक्रेड हार्ट स्कूल, चंडीगढ़ को 47-34 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम की सुखमन ने 14 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम की साम्य ने 18 अंक अर्जित किए । बॉयज अंडर-12 में विवेक हाई स्कूल, मोहाली ने लर्निंग पाथ्स स्कूल, मोहाली को 19-11 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम के सहजप्रीत ने 15 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम के खिलाड़ी तने ने 4 अंक अर्जित किए ।बॉयज अंडर-12 में वाई.पी.एस. स्कूल, मोहाली ने विवेक हाई स्कूल, चंडीगढ़ को 18-4 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम के समर्थ ने 13 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम के कनन ने 2 अंक अर्जित किए । बॉयज अंडर-17 में विवेक हाई स्कूल, चंडीगढ़ ने सौपिंस स्कूल, चंडीगढ़ को 32-27 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम के आदित्य ने 10 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम के समर्थ ने 13 अंक अर्जित किए । बॉयज अंडर-17 में विवेक हाई स्कूल, मोहाली ने वाई.पी.एस. स्कूल, मोहाली को 46-42 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम के आदित्य ने 10 अंक और जपजीत ने 11 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम के सिम्रजोत ने 18 अंक अर्जित किया। गर्ल्स अंडर-17 में के.वी. हाई ग्राउंड, चंडीगढ़ ने लर्निंग पाथ्स स्कूल, मोहाली को 24-14 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम की सोनिका ने 15 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम की हरनीत ने 9 अंक अर्जित किए । गर्ल्स अंडर-14 में लर्निंग पाथ्स स्कूल, मोहाली ने विवेक हाई स्कूल, मोहाली को 25-13 से हराकर जीत दर्ज की। विजेता टीम की खुशनूर ने 14 अंक जुटाए, जबकि दूसरी टीम की गुर्रमत ने 6 अंक अर्जित किए ।
चंडीगढ़ । ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट ने चंडीगढ़ में अपने नए आई हॉस्पिटल के उद्घाटन की घोषणा की। पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मुख्यअतिथि के रूप में इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में चिकित्सा समुदाय के अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पहुंच, गति और आराम को केंद्र में रखकर तैयार इस अस्पताल में उन्नत डायग्नोस्टिक्स, आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर और आँखों की सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं का पूर्ण दायरा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है—ताकि मरीजों को विभिन्न स्थानों के चक्कर लगाए बिना आसान प्रवेश, त्वरित सेवा और विश्व-स्तरीय परिणाम मिल सकें। ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट की सुरक्षित और करुणामयी देखभाल की प्रतिज्ञा को सुदृढ़ करते हुए, नई सुविधा कई प्रीसिज़न तकनीकों और रोगी-सुविधाओं को केंद्र में लाती है, जिसमें कम-हस्तक्षेपी लेज़र विज़नकरेक्शन और प्रेस्बायोपिया प्रबंधन शामिल हैं ।
लेज़र निकट और दूर—दोनों दृष्टियों का परिशुद्ध सुधार करता है। तेज़ पंजीकरण के लिए ईएमआर-सक्षम वर्कफ़्लो, स्पष्ट दिशा-निर्देशन, परिसर-अंदर ऑप्टिकल और फ़ार्मेसी, तथा एचइपीए -फ़िल्टर्ड, लेमिनर-एयरफ़्लो मॉड्यूलर ओटीज़ में सुव्यवस्थित स्टरल पाथवे—ये सब मिलकरअनुभव को सहज बनाते हैं। दैनिक सुविधा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया यह अस्पताल पर्याप्तऑन-साइट पार्किंग, बाधा-मुक्त एवं व्हीलचेयर-अनुकूल प्रवेश (चौड़े कॉरिडोर, रैंप और लिफ्टें) और सुविधाजनक सड़क संपर्क व सार्वजनिक परिवहन की निकटता प्रदान करता है।
ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट के संस्थापक डॉ. एसपीएस ग्रेवाल ने कहा कि मेडिसिटी स्थित हमारे नए अस्पताल में, हमने हर क़दम पर स्पष्टता के लिए आई-केयर कोइंजीनियर किया है—पर्याप्त पार्किंग और बाधा-मुक्त पहुँच से लेकर मॉड्यूलरओटीज़ और प्रीसिज़न रिफ़्रैक्टिव टेक्नोलॉजी तक। ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सरताज ग्रेवाल ने कहा कि यह सुविधा समय और विश्वास के इर्द-गिर्द बनी है,तेज़ रजिस्ट्रेशन, समन्वितडायग्नोस्टिक्स और वन-स्टॉप ऑप्टिकल व फ़ार्मेसी सुनिश्चित करते हैं कि मरीज कम इंतज़ार करें और डॉक्टरों के साथ अधिक समय बिताएं हमारा मिशन स्पष्ट है—विश्व-स्तरीय आई-केयर को हर परिवार तक आसान, सहज और भरोसेमंद रूप में पहुँचाना।
चंडीगढ़ । ब्रेन स्ट्रोक लंबी अवधि में दिव्यांगता और यहां तक कि मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। यह जानलेवा मेडिकल स्थिति ब्रेन सेल्स (मस्तिष्क कोशिकाओं) को अपरिवर्तनीय नुक्सान पहुंचाती है। इसके साथ ही ये “गोल्डन ऑवर” के महत्व को भी सामने लाता है, जिसका अर्थ है कि स्ट्रोक होने के बाद के पहले 60 मिनट जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।इलाज के लिए महत्वपूर्ण समय बचाने के लिए, फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली ने ‘डायरेक्ट टू कैथ लैब स्ट्रोक ट्रीटमेंट’ प्रोसेस को शुरू किया है, जिसमें रोगी को रेडियोलॉजिकल स्कैन के बजाय सीधे फ्लैट पैनल सीटी क्षमता वाली बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब में ले जाया जाता है – यह एक स्पेशलाइज्ड मेडिकल सुविधा है जो सबसे एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक से लैस है जो न्यूरोवैस्कुलर स्थितियों के डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन सटीकता प्रदान करती है। यह इंस्टेंट मेडिकल इंटरवेंशन मस्तिष्क कोशिकाओं को बचाने और लॉन्गटर्म नुक्सान को कम करने में मदद करता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए, डॉ. विवेक गुप्ता, एडीशनल डायरेक्टर, इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी और डायरेक्टर, बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब ने कहा कि “एक मिनट का स्ट्रोक या रक्त की सप्लाई में कमी लगभग 20 लाख ब्रेन सेल्स को प्रभावित करती है। हालांकि, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली में बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब जैसी उभरती हुई एडवांस्ड हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज और इसके एडवांस्ड सॉफ्टवेयर्स ने कई स्ट्रोक रोगियों को नई जिंदगी देने में मदद की है।डॉ. गुप्ता ने बताया कि कैसे ‘डायरेक्ट टू कैथ लैब स्ट्रोक ट्रीटमेंट’ ने एक 46 वर्षीय महिला की जान बचाने में मदद की, जिसे शरीर के दाहिने आधे हिस्से में लकवा के साथ फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली लाया गया था। “बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब एक स्पेशलाइज्ड मेडिकल सुविधा है जो सबसे एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक से लैस है जो न्यूरोवैस्कुलर स्थितियों के डायोग्नोसिस और उपचार के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन प्रिसीजन प्रदान करती है। इसमें दो एक्स-रे सिस्टम हैं, जो दो अलग-अलग कोणों से एक साथ इमेजिंग की क्षमता देते हैं, जिससे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के डिटेल्ड 3डी विज़ुअलाइज़ेशन मिलते हैं। इसके अलावा, अब इस सिस्टम से कोन-बीम सीटी तकनीक का उपयोग करके सीटी स्कैन और सीटी एंजियोग्राफी करना संभव है। रोगी का इलाज मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के माध्यम से किया गया, जो एक मिनिमल-इनवेसिव प्रोसीजर है जिसमें क्लॉट यानि थक्का हटाने के लिए ब्रेन आर्टिरी यानि मस्तिष्क की धमनी में कैथेटर डालना शामिल है। इससे रक्त प्रवाह बहाल हो सका और रोगी की सर्जरी के बाद की स्थिति में सुधार हुआ और प्रक्रिया के चार दिन बाद उसे छुट्टी दे दी गई। एक अन्य मामले में, एक 55 वर्षीय व्यक्ति को बाएं हाथ के पक्षाघात (पैरालाइसिस) के साथ फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली लाया गया। उन्हें बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब ले जाया गया, जहां कैरोटिड आर्टिरी, एक ब्लड वेसल, जो मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करती है, की इमरजेंसी स्टेंटिंग की गई। मरीज़ की हालत में सुधार हुआ और पांचवें दिन उसे छुट्टी दे दी गई।इस एडवांस्ड सॉफ़्टवेयर ने कैसे तीव्र स्ट्रोक के मरीज़ों को इमरजेंसी डिपार्टमेंट से सीधे बाइप्लेन न्यूरो कैथलैब भेजकर उनका इलाज संभव बनाया, पर ज़ोर देते हुए डॉ. गुप्ता ने कहा कि “नई तकनीक एन्यूरिज़्म और स्ट्रोक जैसी न्यूरो संबंधी स्थितियों के लिए मिनिमल इनवेसिव प्रोसीजर्स को संभव बनाती है। इससे महत्वपूर्ण 40-90 मिनट की बचत होती है और तेजी से मेडिकल मदद संभव होती है।”
पंचकूला । कंप्यूटर शिक्षा वर्तमान समय की मांग बन चुकी है। अधिक से अधिक बच्चों को कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करके अपना भविष्य उज्जवल बनाना चाहिए। उक्त विचार हरियाणा नर्सिंग वैलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष एवं नर्सिंग ऑफिसर विनीता बांगड़ ने आज यहां मौली जागरां में फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया तथा प्रयोग फाउंडेशन द्वारा प्रोजेक्ट डिजिटल हयूमन के अंतर्गत चलाए जा रहे निशुल्क कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर में कोर्स पूरा होने पर बच्चों को सर्टीफिकेट वितरण के बाद बोल रही थी। उन्होंने बच्चों को नशा मुक्त समाज का निर्माण करने की शपथ दिलाई। विद्यार्थियों को कंप्यूटर तथा मोबाइल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया। एफपीएआई पंचकूला की चेयरपर्सन अनिता बतरा ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सेंटर का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र के बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। यहां एक दर्जन से अधिक युवतियों को सिलाई-कढाई का प्रशिक्षण दिया गया है।
जिसका लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रयोग फाउंडेशन के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि डिजिटल हयूमन के माध्यम से इससे पहले भी सौ से अधिक बच्चों को अलग-अलग स्थानों पर तीन से छह माह का कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। निकट भविष्य में पंचकूला जिले के गांवों में और कंप्यूटर सेंटर खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ ले सकें। इस अवसर पर प्रयोग फाउंडेशन के उपाध्यक्ष नवनीत शर्मा, एफपीएआई केंद्र प्रभारी पूनम शर्मा, आलोक समेत कई गणमान्य मौजूद थे ।