रांची, झारखंड । कंचन मित्तल मिनिस्ट्रीज़ द्वारा आयोजित शांति सम्मेलन बुधवार शाम एचईसी प्रभात तारा मैदान, धुर्वा, रांची में एक जीवंत माहौल में शुरू हुआ। पास्टर कंचन मित्तल के नेतृत्व में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में झारखंड और आसपास के राज्यों से हज़ारों लोग शामिल हुए। पहले सत्र में भावपूर्ण आराधना, उत्साहवर्धक संदेश और समुदायों के बीच शांति, उद्देश्य और एकता का आह्वान किया गया।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, पास्टर कंचन मित्तल ने कहा, “सच्ची शांति तब मिलती है जब हृदय ईश्वर और एक-दूसरे की ओर मुड़ जाते हैं। झारखंड अपनी आस्था और सद्भाव के लिए जाना जाएगा। शांति सम्मेलन 2025, जिसका विषय “शांति और उद्देश्य – ईश्वर की योजना में झारखंड” है, 14 नवंबर तक चलेगा और इसमें आस्था, परिवार और आध्यात्मिक विकास पर सत्र होंगे। प्रवेश निःशुल्क है और सभी के लिए खुला है।
युवा इनोवेटर शौर्य प्रभ शर्मा ने लॉन्च की “पंजाब इंक” पंजाब की उद्यमशील विरासत का ऐतिहासिक दस्तावेज
चंडीगढ़ । युवा लेखक और इनोवेटर शौर्य प्रभ शर्मा ने बुधवार को चंडीगढ़ में अपनी पहली पुस्तक “पंजाब इंक” को आधिकारिक तौर पर लांच किया। यह पुस्तक पंजाब को टकराव से परिभाषित भूमि नहीं, बल्कि वाणिज्य, उद्यम, विद्यार्थी उद्यमी और इनोवेशन के जरिए विकसित हुई एक सभ्यता के रूप में प्रस्तुत करती है। सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में, शौर्य ने 9वीं शताब्दी से लेकर आधुनिक समय तक के क्षेत्र के व्यापारिक इतिहास को रेखांकित किया है। वह तर्क देते हैं कि पंजाब की दृढ़ता का वास्तविक आधार युद्ध नहीं, बल्कि व्यापार रहा है। पुस्तक यह बताती है कि किस प्रकार हर मुश्किल दौर में कमर्शियल नेटवर्क जीवित रहे और यही भावना आज विश्वभर में फैले पंजाबी समुदाय की पहचान बन गई है । शौर्य बचपन से ही राष्ट्रीय और वैश्विक आर्थिक विकास जैसे विषयों को बड़ी शिद्दत से जानने का प्रयास करते रहें है। पाँचवीं कक्षा से नियमित रूप से अखबार पढ़ने और अनेक बिजनेस फ़ोरम में भाग लेने के कारण वे अपने पहले लेखन में अकादमिक जिज्ञासा और जमीनी उद्यमशीलता—दोनों का अनुभव लेकर आए हैं। उनके पास एक प्लास्टिक इन्सिनरेटर का डिज़ाइन पेटेंट भी है और वे रूट रिच के संस्थापक व निदेशक हैं। इसे उन्होंने स्कूल के दिनों में शुरू किया था और जो बाद में एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में विकसित हुआ। पुस्तक के लोकार्पण पर शौर्य ने कहा कि पंजाब के आर्थिक इतिहास को अक्सर नाटकीय घटनाओं ने ढक दिया है, जबकि अस्थिरता के दौर में भी व्यापारिक नेटवर्क आश्चर्यजनक रूप से चलते रहे। ध्यान से देखें तो आप पाएँगे कि निराशा के क्षणों में भी व्यापार फला-फूला। इतिहास लड़ाइयों को याद रखता है, लेकिन बाज़ारों को भूल जाता है। पंजाब इंक साहस, रचनात्मकता और समुदाय की मानसिकता की कहानी है। टकराव ने नहीं, व्यापार ने पंजाब का निर्माण किया। पुस्तक यह दर्शाती है कि किस प्रकार सदियों से वाणिज्य ने पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक जीवन को आकार दिया। पुस्तक का एक महत्वपूर्ण अध्याय महाराजा रणजीत सिंह के शासन को समर्पित है। यह अध्याय उन्हें केवल सैन्य रणनीतिकार नहीं, बल्कि ऐसे शासक के रूप में चित्रित करता है जो समझते थे कि दीर्घकालिक शांति आर्थिक स्थिरता पर निर्भर है। “शासन केवल सेनाओं या किलों का विषय नहीं था। “यह व्यापार का ढांचा बनाने का प्रयास भी था।” पुस्तक बताती है कि किस तरह रणजीत सिंह के प्रशासन ने व्यापारियों और कारीगरों को संरक्षण दिया और उन्हें सशक्त किया। इन प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों के बीच सुरक्षित और सुनिश्चित व्यापार संभव हुआ। मुल्तान के नील से लेकर अमृतसर की शॉलों और लुधियाना की साइकिलों तक की व्यावसायिक निरंतरता पुस्तक का केंद्रीय विषय है। शौर्य इस विरासत को आज की वैश्विक पंजाबी उद्यमशीलता से जोड़ते हैं—चंडीगढ़ की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों से लेकर दिल्ली की रिटेल चेन, कैलिफ़ोर्निया की ट्रकिंग कंपनियों और टोरंटो के टेक स्टार्टअप्स तक। पुस्तक में क्षेत्रीय अखबारों के उदय और उन्हें स्थापित करने वाले व्यावसायिक नेताओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जो पंजाब के व्यापक कारोबारी जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। शौर्य कहते हैं कि पुस्तक उन मूल्यों को चिन्हित करती है जो वर्षों से पंजाबी व्यावसायिक संस्कृति की पहचान रहे हैं जैसे कि, धैर्य, आतिथ्य और सम्मान। यह इस विश्वास पर आधारित हैं कि “कल एक और फ़सल आएगी, एक और ग्राहक आएगा, एक और अवसर मिलेगा। लेखक के अनुसार, ये मूल्य वह “अदृश्य विरासत” हैं जिन्हें पंजाबी प्रवासी महाद्वीपों के पार अपने साथ ले गए और जिसने पड़ोस की छोटी दुकानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कंपनियों तक की सफलता की कहानियाँ गढ़ीं। “पंजाब आपको व्यापार करना नहीं सिखाता,वह आपको व्यापार को जीना सिखाता है। शौर्य “पंजाब इंक” को ज्ञात और अज्ञात सभी उद्यमियों—कारीगरों, किसानों, व्यापारियों, प्रकाशकों, आधुनिक उद्योगपतियों और प्रवासी पंजाबी समुदाय—को समर्पित करते हैं, जिनके योगदान ने पंजाब को क्षेत्रीय बाज़ार से वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क में परिवर्तित कर दिया।
शहीद पातशाही की याद में नगर कीर्तन, नाट्य मंचन व विशेष कीर्तन समागम
चंडीगढ़। चंडीगढ़ गुरुद्वारा अस्थापन कमेटी सेक्टर-22 डी ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की शहीदी के 350वें वर्ष को समर्पित विशेष गुरमत समागम का आयोजन 19 से 25 नवंबर तक करने की घोषणा की है। यह जानकारी चंडीगढ़ गुरुद्वारा अस्थापन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी सरदार गुरजोत सिंह साहनी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल, सेक्टर 35, चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर चलने वाले इन धार्मिक कार्यक्रमों का उद्देश्य संगत को गुरमत सिद्धांतों, त्याग और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। समागम के प्रमुख स्थलों में श्री गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल, सेक्टर 35 बी, गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 37 सी और गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 22-डी सहित अन्य संबद्ध गुरमत संस्थान शामिल हैं। समागम की शुरुआत स्कूल से 19 नवंबर को हुई जिसमें भाई सुखदीप सिंह, भाई लखविंद्र सिंह, भाई हरजोत सिंह जख्मी और भाई रविंद्र सिंह और अन्य प्रतिष्ठित कथावाचक व रागी जत्थे सम्मिलित हुए। उन्होंने अपने शब्द गायन से सभी को निहाल किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. इकबाल सिंह लालपुरा (पूर्व आईपीएस एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष) उपस्थित थे। 20 नवंबर के कार्यक्रम में शाम 5:30 से 7:30 बजे तक ‘शहादत पातशाही नौवीं’ शीर्षक से एक नाट्य प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी। इस मंचन का लेखन बलजिंद्र सिंह दारापुरी और निर्देशन बनिंद्रजीतसिंह बन्नी ने किया है। यह नाट्य रूपांतरण गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत, मानवीय मूल्यों की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की मिसाल को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार परमजीत सिंह सरना, पूर्व अध्यक्ष दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी करेंगे। 21 नवंबर को सुबह 11 बजे शहीदी नगर कीर्तन गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 22-डी से प्रारंभ होकर सेक्टर 22 मार्केट – सेक्टर 17 प्लाज़ा – सेक्टर 18 – सेक्टर 19 – सेक्टर 35 से गुजरते हुए सेक्टर 37 पहुॅंचेगा। इस नगर कीर्तन में गतका टीमें, स्कूली छात्र, कीर्तन जत्थे और बड़ी संख्या में संगत शामिल होगी। 22 नवंबर को गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 22-डी में युवा केंद्रित गुरमत विचार सत्र होंगे जबकि 23 नवंबर को सहज पाठ समाप्ति, विशेष कीर्तन, धार्मिक प्रदर्शनी और गुरमत व्याख्यान आयोजित किए जाऍंगे। 24 नवंबर को सेवा, पंथिक अनुशासन और एकता पर प्रवचन होंगे और समागम का समापन 25 नवंबर को गुरुद्वारा साहिब सेक्टर 37 सी में अखंड पाठ भोग, कीर्तन, अरदास और गुरु का लंगर के साथ होगा, जिसमें वरिष्ठ धार्मिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। साहनी ने चंडीगढ़ और आसपास की संगत से आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक अवसर में श्रद्धा सहित भाग लेकर गुरु तेग बहादुर साहिब को समर्पित इन कार्यक्रमों को सफल बनाऍं।
चंडीगढ़। ऑक्लट साइंस फाउंडेशन तथा सिग्मा क्रॉस रोड ग्रुप की तरफ़ से दीपक आहूजा के सहयोग से एक शानदार ज्योतिष सम्मेलन जीरकपुर में आयोजित किया गया । गौरतलब है कि इसमें देश के भिन्न-भिन्न स्थान से 50 से भी अधिक ज्योतिषाचार्य शामिल हुए जिन्होंने ग्रह,नक्षत्र और दशाएं देखकर लोगों की समस्याओं का समाधान बिल्कुल मुफ्त किया। सम्मेलन में सम्मिलित नाम में से प्रमुख बीना शर्मा, सृष्टि ज्योतिष संस्थान की प्रमुख उषा वसुंधरा, मशहूर हस्तरेखा विशेषज्ञ नवदीप मदान, सुनीता साहनी, संजीव बक्शी, विनोद कुमार,धनेंद्र शर्मा, राजन शर्मा, विनोद कुमार, परवीन, जतिंद्र जौहरी, रूपा शर्मा, टैरो रीडर चाहत मोंगा इत्यादि। सम्मेलन के सफल आयोजन पर दीपक आहूजा ने कहा कि यह सब लोगों का सहयोग से ही संभव हो पाया है और उनका यह कहना है कि इस तरह की ज्योतिष सम्मेलन लोगों में ज्योतिष के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं। इस कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के रूप में आई पंजाबी अदाकारा और शायरा पिंकी मोगेवाली ने सभी ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया और उन्होंने इस कार्यक्रम की तारीफ़ करते हुए कहा इससे समाज की मदद और लोगों को ज्योतिष में विश्वास बढ़ता है । राजन शर्मा लुधियाना से अपना कीमती समय निकाल कर चीफ गेस्ट के रूप में उपस्थित थे ।
इस कार्यक्रम की आयोजक उषा वसुंधरा पिछले 15 वर्षों से ज्योतिष पढ़ा रही और जो समस्या से पीड़ित उनका लाल किताब ज्योतिष द्वारा समाधान देते हुए अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं , ज्योतिषाचार्या सुनीता साहनी भी अपनी सेवाएं निःशुल्क प्रदान करती है और मशहूर ज्योतिषाचार्य नवदीप मदान ने कहा कि जब लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आते हैं और समाधान लेकर जाते हैं, तो उन्हें ज्योतिष विद्या की सार्थकता पर गर्व होता है। नवदीप मदान खुद एक शिक्षित आचार्य है और ज्योतिष की कक्षाएं लेते हैं। उनके पास कई लोग ज्योतिष विद्या सीख कर लाभान्वित हो रहे है। उन्होंने कहा कि वह लोगों की सेवा से जुड़े इस तरह के कार्यक्रम में वह हिस्सा लेते रहेंगे।
चंडीगढ़। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्रीराम कृपा सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का ऐलान चंडीगढ़ प्रेस क्लब सेक्टर 27 में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया। प्रेस वार्ता की अगुवाई संस्थान के प्रतिनिधि स्वामी गुरुकृपानंद, स्वामी सतबीरानंद , डॉ. हरपाल सिंह, सरदार सतनाम सिंह (यूएसए) तथा ट्रस्ट के पदाधिकारी जगमोहन गर्ग, अनूप गुप्ता और प्रदीप गोयल/प्रदीप बंसल ने संयुक्त रूप से की। स्वामी गुरुकृपानंद ने बताया कि 23 से 29 नवंबर तक सेक्टर 34 स्थित प्रदर्शनी ग्राउंड में यह विशाल श्रीराम कथा आयोजित होगी। प्रतिदिन शाम 6 से रात 9 बजे तक चलने वाला यह कार्यक्रम निःशुल्क होगा व हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि विश्वविख्यात कथा व्यास साध्वी श्रेया भारती कथा का वाचन करेंगी। साध्वी देश-विदेश में अपने ज्ञान, वाणी और आध्यात्मिकता से लाखों लोगों को प्रेरित कर चुकी हैं। कथा के माध्यम से वह श्रीराम के संदेशों को आधुनिक समाज की चुनौतियों—जैसे नशा-निवारण, कन्या भ्रूण हत्या, नारी संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण—के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगी । इस कथा का विशेष फोकस युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। बच्चों के लिए बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होगा। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9872302947 जारी किया गया है, जिसके माध्यम से बच्चे अपनी रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। कार्यक्रम से दो दिन पूर्व 21 नवंबर को 1100 महिलाओं की भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा भारती भवन, सेक्टर 30 से शुरू होकर सेक्टर 20, 21 और प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल तक पहुँचेगी। यह यात्रा विश्व शांति और सामाजिक सौहार्द का संदेश देगी। अनूप गुप्ता ने कहा कि श्रीराम का जीवनचरित हर आयु वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह कथा मन, विचार और जीवन को पवित्र करने का माध्यम है। उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने परिजनों और मित्रों के साथ इस आध्यात्मिक महोत्सव में अवश्य पधारें।
चंडीगढ़ । मिसल शहीदा तरन दल के चेयरमैन सरदार भगत सिंह दोआबी ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब बचाओ मोर्चा और इसके अध्यक्ष तेजस्वी मिन्हास को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मोर्चा पंजाब में हो रहे अवैध धार्मिक कन्वर्ज़न के गंभीर मुद्दे को उठाकर समाज और प्रशासन को वास्तविकता से अवगत करा रहा है। दोआबी ने बताया कि तथाकथित ‘पादरी’ जादू, चमत्कार, धोखे और लालच के सहारे मासूम लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, जबकि मोर्चा के बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस पंजाब की ज़मीनी हक़ीक़तों पर आधारित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजिंदर सिंह जैसे लोग दुष्कर्म के दोषी हैं और उन्हें ‘पादरी’ कहना स्वयं इस शब्द का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि अंकुर नरूला ने बाइबल पर केक काटकर उसकी बेअदबी की थी और वह भी जल्द क़ानून के दायरे में आएगा। दोआबी ने दावा किया कि ये सभी ‘फर्जी पास्टर’ बिना किसी प्रमाण, प्रशिक्षण या नियमन के काम कर रहे हैं और धार्मिक ढाँचे को अपने व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म कभी भी ‘तत्काल चमत्कारी इलाज’ का समर्थन नहीं करता, जबकि ये डेरे बीमार और सीधे-सादे लोगों से भारी धनराशि ऐंठने के लिए ऐसे झूठे दावे कर रहे हैं।
उन्होंने पंजाब बचाओ मोर्चा द्वारा उठाई गई मुख्य मांगों को भी दोहराया जिनमें पंजाब में एंटी-कन्वर्ज़न बिल, धार्मिक जनगणना, धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए आरक्षण बंद, धर्म परिवर्तन के बाद ‘सिंह, ‘कौर’, सिख स्वरूप और प्रतीकों के उपयोग पर रोक, चमत्कारी इलाज के प्रचार पर पाबंदी, अब तक हुए ‘मेडिकल चमत्कारों’ की जांच, विदेशी एजेंसियों की भूमिका पर रॉ/सीबीआई जांच, पंजाब में ईसाइयों को अल्पसंख्यक सूची से हटाना, और ऐसे डेरों को बढ़ावा देने वाले नेताओं का सार्वजनिक बहिष्कार शामिल हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगत सिंह दोआबी ने कहा कि पंजाब बचाओ मोर्चा की मुहिम न केवल समय की मांग है बल्कि समाज को अंधविश्वास, पाखंड और धोखाधड़ी से मुक्त कराने की दिशा में निर्णायक कदम भी है।
चंडीगढ़। पार्क हॉस्पिटल मोहाली के डॉक्टरों की टीम पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. हितेश गौड़, इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. क्षितिज वशिष्ठ, डॉ. गुरसेवक सिंह, डॉ. अभिषेक कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के बारे में फैक्ट्स और मिथ शेयर कीं। पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. हितेश गौड़ ने कहा कि सीओपीडी दुनिया भर में हार्ट की समस्याओं और कैंसर के बाद तीसरा सबसे बड़ा किलर है। बहुत से लोग सांस फूलने और खांसी को बढ़ती उम्र का नॉर्मल हिस्सा समझ लेते हैं। बीमारी के शुरुआती स्टेज में, किसी को इसके लक्षण पता नहीं चल पात डॉ. गौड़ ने आगे कहा कि सीओपीडी कई सालों तक बिना सांस की तकलीफ के हो सकता है। “बीमारी के ज़्यादा गंभीर स्टेज में आपको इसके लक्षण दिखने लगते हैं। सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी का एक बढ़ता हुआ रूप है जो हल्का से लेकर गंभीर तक हो सकता है। इसकी पहचान फेफड़ों में हवा के अंदर और बाहर जाने में रुकावट से होती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है । इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. क्षितिज वशिष्ठ ने कहा कि भारत में लगभग 63 मिलियन लोग सीओपीडी से पीड़ित हैं। “सीओपीडी से एड्स, टीबी, मलेरिया और डायबिटीज से होने वाली मौतों से भी ज्यादा मौतें होती हैं। सीओपीडी ज्यादातर 40 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में होता है, जिनकी स्मोकिंग की हिस्ट्री रही है। ये वे लोग हो सकते हैं जो अभी स्मोकिंग करते हैं या पहले करते थे। भारत में सीओपीडी का फैलाव लगभग 5.5 से 7.55% है। हाल की स्टडी से पता चलता है कि पुरुषों में सीओपीडी का फैलाव रेट 22% और महिलाओं में 19% तक है ।
इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. गुरसेवक सिंह के अनुसार सीओपीडी का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन ज़्यादा नुकसान को रोकने और ज़िंदगी की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए इलाज के ऑप्शन मौजूद हैं। इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा कि भारत में सीओपीडी से होने वाली मौतों की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो हर 1 लाख आबादी पर 98 है, जो अमेरिका में हर 1 लाख आबादी पर 33 मौतों की दर से तीन गुना ज्यादा है। डॉ. गौड़ ने कहा कि शुरुआती स्क्रीनिंग से फेफड़ों के काम करने की क्षमता में बड़ी कमी होने से पहले सीओपीडी का पता लगाया जा सकता है। “सीओपीडी के ज्यादातर मामले पोल्यूटेंट को सांस में लेने से होते हैं, इसमें स्मोकिंग और सेकंड-हैंड स्मोक शामिल हैं। सीओपीडी का मुख्य रिस्क फैक्टर, यानी स्मोकिंग, 46% मामलों के लिए ज़िम्मेदार है, इसके बाद आउटडोर और इनडोर पॉल्यूशन है जो 21% सीओपीडी मामलों के लिए जिम्मेदार है और काम की वजह से गैसों और धुएं के संपर्क में आने से सीओपीडी के 16% मामले होते हैं। जेनेटिक्स भी किसी व्यक्ति में सीओपीडी होने में भूमिका निभा सकते हैं—भले ही उस व्यक्ति ने कभी स्मोकिंग न की हो या काम की जगह पर कभी फेफड़ों को तेज़ जलन पहुँचाने वाली चीज़ों के संपर्क में न आया हो। सीओपीडी के रिस्क फैक्टर: · बचपन में सांस के इन्फेक्शन की हिस्ट्री · कोयले या लकड़ी जलाने वाले स्टोव के धुएं के संपर्क में आना · सेकंड-हैंड धुएं के संपर्क में आना · अस्थमा की हिस्ट्री वाले लोग · जिन लोगों के फेफड़े ठीक से विकसित नहीं हुए हैं · जो 40 साल और उससे ज़्यादा उम्र के हैं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों का काम कम हो जाता है। सीओपीडी के लक्षण और संकेत: · सीने में जकड़न · पुरानी खांसी जिसमें साफ, सफेद, पीला या हरा बलगम आ सकता है · बार-बार सांस के इन्फेक्शन · एनर्जी की कमी · अचानक वजन कम होना · सांस लेने में तकलीफ · टखनों, पैरों या टांगों में सूजन · घरघराहट
चंडीगढ़। सच खोज अकैडमी ने 16 नवंबर 2025 को अपने सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसका केंद्रीय विषय “विकेंद्रीकरण के माध्यम से सामाजिक न्याय के लिए ईमानदार शासन” था। इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों की सम्मानित उपस्थिति रही, जो पारदर्शी और नैतिक शासन को विकेंद्रीकृत ढांचों के माध्यम से सामाजिक न्याय प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन मानते हैं। सेमिनार के विशिष्ट वक्ताओं में अल्लामा तारिक, सुनील मिश्रा (पूर्व विधायक, मध्य प्रदेश), फिरोज मितीबोरवाला, राजविंदर सिंह राही, हरचरण सिंह बैंस, नवनीत सिंह (महाराष्ट्र), डॉ. रणजीत सिंह घुमन, सीनियर एडवोकेट राजविंदर सिंह बैंस और प्रोफेसर रोंकी राम शामिल थे। सभी का साझा मत यह था कि ईमानदार शासन विकेंद्रीकरण और न्यायपूर्ण सामाजिक प्रगति की नींव है। सीनियर एडवोकेट राजविंदर सिंह बैंस ने अपने मुख्य भाषण में गुरमत के आध्यात्मिक सिद्धांतों, जिनका प्रचार श्री गुरु गोबिंद सिंह ने किया, पर प्रकाश डाला। उन्होंने सत्य, मानवाधिकार, एकता, शांति और न्याय के साथ इन सिद्धांतों के गहरे संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने गुरमत की गलत और विकृत व्याख्याओं से सावधान करते हुए इसके उन मौलिक सिद्धांतों को पुनः अपनाने की अपील की, जो न्याय और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। उनके विचारों ने यह स्पष्ट किया कि ये मूल धार्मिक मूल्य ईमानदार शासन को सामाजिक न्याय की सच्ची आधारशिला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेमिनार का समापन इस दृढ़ आह्वान के साथ हुआ कि ईमानदार शासन और विकेंद्रीकरण के सिद्धांतों के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता बनाए रखी जाए, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से समावेशी और सार्थक सामाजिक न्याय संभव है। कार्यक्रम का संचालन तरजिंदर सिंह ढिल्लों और परमिंदर सिंह (एडवोकेट) ने किया।
चंडीगढ़/ जीरकपुर । जीरकपुर स्थित वेलवेट क्लार्क्स एक्सोटिका होटल में पारंपरिक क्रिसमस केक मिक्सिंग सेरेमनी का भव्य आयोजन किया गया, जिससे क्रिसमस के मौसम की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। क्रिसमस की गर्मजोशी और खुशियों को साझा करने के उद्देश्य से होटल ने विभिन्न क्षेत्रों से आए मेहमानों का स्वागत किया। होटल के जनरल मैनेजर मनिंदर जीत सिंह सिब्बल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम को बेहद आकर्षक और उत्सवी रंग में सजाया गया था। खूबसूरती से सजाए गए क्रिसमस ट्री, जगमगाती लाइट्स और क्रिसमस कैरोल्स की मधुर धुनों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। होटल के इन-हाउस गेस्ट्स, गणमान्य व्यक्तियों तथा स्थानीय प्रतिष्ठित नागरिकों ने इस पारंपरिक रस्म में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। होटल द्वारा वितरित प्लास्टिक ग्लव्स, टिश्यू एप्रन और सांता कैप पहनकर सभी प्रतिभागी 12 फुट लंबी स्टील टेबल के आसपास एकत्र हुए, जिस पर विभिन्न रंग-बिरंगे सूखे मेवों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया था। टेबल पर 75 किलोग्राम ड्राई फ्रूट्स को स्नोमैन और क्रिसमस ट्री की आकृतियों में सजाया गया था। इनमें अखरोट, बादाम, काजू, पिस्ता, खजूर, पीली किशमिश, काली किशमिश, सूखे खुबानी, अंजीर, ड्राई जिंजर चिप्स, ऑरेंज पील, प्रून्स और क्रैनबेरी जैसे कई पौष्टिक और स्वादिष्ट तत्व शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत होते ही सभी मेहमानों ने उत्साहपूर्वक इन सभी सामग्रियों को मिलाना शुरू किया। सामग्री को क्रश, पैट, फ्लिप और टॉस करते हुए मेहमानों ने पूरा आनंद लिया। मिश्रण में विभिन्न प्रकार की लिकर मिलाई गई, जिसकी मनमोहक सुगंध ने पूरे माहौल को खुशियों और समृद्धि के संदेश से भर दिया। हंसी-खुशी, सामूहिक सहभागिता और उत्साह से भरे इस समारोह का नेतृत्व जनरल मैनेजर मनिंदर जीत सिंह सिब्बल ने किया, जिन्होंने हर अतिथि को विशेष और सम्मानित महसूस कराया। यह केक मिक्सिंग सेरेमनी क्रिसमस के असली संदेश—एकता, खुशी और मिलकर कुछ सुंदर बनाने—की याद दिलाती है। वेलवेट क्लार्क्स एक्सोटिका ने एक बार फिर साबित किया कि वह त्योहारों की उमंग और खुशियों का केंद्र है, जिसने आने वाले पर्वों के लिए एक शानदार शुरुआत की।
चंडीगढ़। ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ उस समय बिजली की रोशनी से जगमगा उठा जब 5,000 से ज़्यादा लोग डाउनटाउन, वर्ल्ड स्ट्रीट पर इस क्षेत्र के सबसे जीवंत जेनरेशन जेड -केंद्रित कार्यक्रमों में से एक के लिए एकत्रित हुए। इस शाम में गतिशील युवा संस्कृति, उच्च-ऑक्टेन संगीत और समकालीन मनोरंजन अनुभवों के लिए चंडीगढ़ की बढ़ती रुचि का जश्न मनाया गया। आकर्षक दृश्यों, मनमोहक प्रकाश व्यवस्था और ऊर्जावान माहौल के साथ, इस कार्यक्रम ने युवा दर्शकों को एक साथ लाया, जो पूरे आयोजन स्थल पर प्रदर्शित साहसिक और अभिव्यंजक सौंदर्यबोध से गहराई से जुड़ गए। हर ट्रैक पर प्रशंसकों ने रैप के साथ ज़ोरदार प्रतिक्रिया दी, जिससे एक ऊर्जावान, सामुदायिक ऊर्जा का निर्माण हुआ जिसने पूरे अनुभव को और भी बेहतर बना दिया।
इस उत्सव ने ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ के लिए एक नए सांस्कृतिक क्षण को चिह्नित किया, जिसने समकालीन सांस्कृतिक अनुभवों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में वर्ल्ड स्ट्रीट की भूमिका को और पुष्ट किया। ओमेक्स ग्रुप के कार्यकारी निदेशक, जतिन गोयल ने कहा कि वर्ल्ड स्ट्रीट में ‘सीधे मौत के 10 साल – एस एम एक्स का आयोजन और 5,000 से ज़्यादा युवाओं को एक साथ देखना वाकई प्रेरणादायक था। जेनरेशन Z एक अनोखी ईमानदारी, ऊर्जा और प्रामाणिक अनुभवों की चाहत लेकर आता है, और इस आयोजन ने इन सब को खूबसूरती से दर्शाया। उनकी प्रतिक्रिया हमें ऐसे स्थान बनाने के लिए प्रेरित करती है जो युवा, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से प्रगतिशील लगें। ओमेक्स में हमारा लक्ष्य ऐसे गंतव्य बनाना है जहाँ यह नई पीढ़ी जुड़ाव महसूस करे, उत्सव मनाए और वापस आने के लिए उत्साहित हो। यह आयोजन मनोरंजन का केंद्र बनाने के प्रयासों में एक और मील का पत्थर है, जो क्षेत्र के जीवनशैली मानचित्र पर नए चंडीगढ़ की स्थिति को मज़बूत करेगा।