पंचकूला । श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पुरुषोत्तम दास रूंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-1, पंचकूला में सेवा भाव से 190वें अन्न भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जरूरतमंदों, मजदूरों और राहगीरों को श्रद्धा एवं सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया।
ट्रस्ट के संस्थापक एवं समाजसेवी अमिताभ रूंगटा ने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन त्याग, बलिदान और मानवता की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे पवित्र अवसरों पर अधिक से अधिक अन्न भंडारों का आयोजन करें, ताकि समाज के जरूरतमंद वर्ग को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब समाज के लोग मिल-जुलकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं, तो इससे युवाओं को भी प्रेरणा मिलती है और वे समाज सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। भंडारे के आयोजन में अनुपमा रुंगटा, चैतन्य रुंगटा, सुरेश जांगरा और निधि संधु विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ मिलकर सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई और भक्तिभाव से भोजन वितरण किया।
गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया अन्न भंडारा
गुरद्वारा पातशाही दसवीं, सेक्टर 8, चंडीगढ द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

चंडीगढ़ । गुरद्वारा पातशाही दसवीं सेक्टर 8, चंडीगढ़ ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित कई आध्यात्मिक कार्यक्रमों की घोषणा की है। गुरमत समागम 17 नवंबर को आरंभ हुआ था और 25 नवंबर तक जारी रहेगा। इस श्रद्धा-स्मरण के तहत, विशेष अखंड पाठ साहिब 21 नवंबर को आरंभ हुआ। इसके उपरांत शाम तक दीवान आयोजित किया गया, जिसमें प्रसिद्ध रागी जत्थों -भाई हरमंजीत सिंह पारा, भाई गुरनूर सिंह, भाई बलबीर सिंह और भाई सिमरनजीत सिंह द्वारा भावपूर्ण कीर्तन किया गया। इसके साथ ही, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन, बलिदानों और आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाने वाला लाइट एंड साउंड शो भी आयोजनों का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रबंधन समिति ने समस्त संगत को इन आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक कार्यक्रमों में शामिल होकर गुरु साहिब की कृपा प्राप्त करने का आग्रह किया है। सरदार सुखजिंदर सिंह बैंस, अध्यक्ष, गुरद्वारा पातशाही दसवीं, सेक्टर 8, चंडीगढ ने इस पहल के बारे में बताते हुए समुदाय से जुड़े निरंतर प्रयासों और इस ऐतिहासिक अवसर के महत्व पर प्रकाश डाला।

समागम का समापन दिवस 25 नवंबर 2025 को होगा, जिसमें अखंड पाठ साहिब का भोग और विशेष दीवान आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध रागी जत्थे – भाई चरणजीत सिंह (कोटली आनंदपुर साहिब), भाई इंदर सिंह (लुधियाना), भाई हरपाल सिंह (हज़ूरी रागी श्री दरबार साहिब), और भाई कर्नैल सिंह (मोहाली) गुरबानी कीर्तन करेंगे। ये सभी कार्यक्रम सरदार भाग सिंह और सरदार सतनाम सिंह रंधावा के संरक्षण में आयोजित किए जा रहे हैं
ट्राइसिटी का किंडर पांडा प्ले स्कूल फिनलैंड की शुरुआती बचपन की शिक्षा को भारत लाया
ग्लोबल लर्निंग में अग्रणी किंडर पांडा ने ट्राइसिटी में असली फिनिश करिकुलम पेश किया

पंचकूला । किंडर पांडा प्ले स्कूल ट्राइसिटी का पहला स्कूल जिसने असली फिनलैंड शुरुआती बचपन की शिक्षा शुरू की, ने ओनी एजुकेशन फिनलैंड के सीइओ, मिस्टर ओली कामुनेन और कंट्री हेड रचना लालवानी के भारत के ऑफिशियल दौरे के दौरान उनके स्वागत के लिए गर्व से एक खास ‘मीट एन ग्रीट’ इवेंट होस्ट किया। यह इवेंट ग्लोबल एजुकेशनल सहयोग को बढ़ाने और शुरुआती बचपन की पढ़ाई में वर्ल्ड-क्लास पढ़ाने के तरीकों को जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है। किंडर पांडा प्ले स्कूल ने फ़िनिश पेडागॉजी से प्रेरित अपने होलिस्टिक, रिसर्च-बेस्ड करिकुलम के साथ इस इलाके में खुद को एक पायनियर के तौर पर स्थापित किया है, जिसे ओन्नी एजुकेशन के साथ पार्टनरशिप में लागू किया गया है, जो फ़िनलैंड सरकार के साथ रजिस्टर्ड एक ऑर्गनाइज़ेशन है। स्कूल का अप्रोच इनोवेशन को इंडियन वैल्यूज़ के साथ मिलाता है, जो बच्चों को शुरुआती लेवल पर एसटीईएम (स्टेम), एआई (AI), रोबोटिक्स और विदेशी भाषाओं (फ्रेंच और जर्मन) वाला एक फ्यूचरिस्टिक लर्निंग माहौल देता है। खास मेहमानों का स्वागत करते हुए, स्कूल ने वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सपर्ट एजुकेटर्स, फील्ड ट्रिप्स और फ़िनिश-इंस्पायर्ड डेकेयर प्रोग्राम के साथ ग्लोबली अलाइन्ड, इंक्वायरी-बेस्ड और खुशी देने वाले शुरुआती लर्निंग एक्सपीरियंस देने के अपने कमिटमेंट पर ज़ोर दिया। किंडर पांडा प्ले स्कूल के डायरेक्टर सिकंदर सिंह ने कहा कि मिस्टर ओली कामुनेन और मिस रचना लालवानी का यह दौरा ग्लोबल एजुकेशनल एक्सीलेंस की ओर हमारे सफ़र में एक मील का पत्थर है। ट्राइसिटी में असली फिनिश पेडागॉजी लाना सिर्फ़ एक अचीवमेंट नहीं है—यह एक ज़िम्मेदारी है जिसे हम गर्व से निभाते हैं। ओन्नी एजुकेशन के साथ हमारा कोलेबोरेशन कॉन्फिडेंट, क्यूरियस और फ्यूचर-रेडी यंग लर्नर्स को नर्चर करने के हमारे विज़न को मज़बूत करता है।

किंडर पांडा प्ले स्कूल की प्रिंसिपल सपना चंदेल ने कहा कि किंडर पांडाज़ में, हमारा मानना है कि शुरुआती बचपन की एजुकेशन खुशी देने वाली, मीनिंगफुल और ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के हिसाब से होनी चाहिए। हमारे जाने-माने फिनलैंड पार्टनर्स की मौजूदगी वर्ल्ड-क्लास लर्निंग एक्सपीरियंस देने के हमारे कमिटमेंट को और मज़बूत करती है जो हर बच्चे को एक्सप्लोर करने, जानने और आगे बढ़ने की ताकत देता है। अपने इंडिया टूर के दौरान, फिनिश डेलीगेशन और किंडर पांडाज़ लीडरशिप को नई दिल्ली में एम्बेसी में फिनलैंड के एम्बेसडर ने एक एक्सक्लूसिव डिनर के लिए भी होस्ट किया, जो इंटरनेशनल एजुकेशन स्टैंडर्ड्स को बढ़ाने के लिए उनके कॉमन डेडिकेशन को दिखाता है। किंडर पांडा प्ले स्कूल बचपन की शिक्षा में नए बेंचमार्क सेट कर रहा है, और एक ऐसा भविष्य बना रहा है जहाँ बच्चे खुशी, कॉन्फिडेंस और दुनिया भर की जानकारी के साथ सीखते हैं।
भव्यता और भक्तिभाव के साथ निकली सात दिवसीय श्री राम कथा की मंगलमयी कलश यात्रा

चंडीगढ़। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री राम कृपा सेवा ट्रस्ट, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री राम कथा का शुभारंभ 23 नवंबर से होने जा रहा है। यह भव्य आध्यात्मिक आयोजन सेक्टर 34 प्रदर्शनी ग्राउंड में 23 से 29 नवंबर तक प्रतिदिन सायं 6 से रात 9 बजे तक आयोजित होगा। श्रद्धालु इस अनुष्ठान के माध्यम से प्रभु श्री राम के दिव्य चरित, आदर्श जीवन एवं लीलाओं का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से साक्षात्कार कर सकेंगे। कथा का वाचन दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज की शिष्या, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा व्यास साध्वी श्रेया भारती अपनी संत मंडली सहित करेंगी।
कथा के उपलक्ष्य में चंडीगढ़ में भव्य मंगल कलश यात्रा का आयोजन हुआ। यात्रा का शुभारंभ सेक्टर 30 स्थित भारती भवन से हुआ, जिसे मेयर हरप्रीत कौर बबला, जेपी मल्होत्रा (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा चंडीगढ़), स्वामी गुरुकृपानंद , स्वामी उमेशानंद , स्वामी सतबीरानंद , जगमोहन गर्ग, रामबीर भट्टी, अनूप गुप्ता एवं प्रदीप बंसल ने हरी झंडी दिखाकर किया। बीएल शर्मा और संजय बंसल ने विधिवत पूजन एवं नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ कराया। कलश यात्रा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी गुरुकृपानंद ने कहा कि शास्त्रों में कलश को देवताओं का आसन माना गया है। यह मानव मस्तिष्क में स्थित दिव्य अमृत—आध्यात्मिक चेतना—का प्रतीक है।

आम के पत्तों का कलश में स्थापित होना उसकी सतत हरियाली और फलप्रदता का द्योतक है, ठीक वैसे ही जैसे प्रभु कथा सदैव कल्याणकारी है और मानवता को मोक्षमार्ग का फल प्रदान करती है। स्वामी ने कहा कि श्री राम कथा आदर्श जीवन का मार्गदर्शन करती है और जीवन में सौंदर्य, शांति और दिव्यता का संचार करती है। यात्रा में 1100 सौभाग्यवती महिलाएँ, पीताम्बर परिधान धारण कर कलश सिर पर लिए, पूरे नगर में प्रभु श्री राम का संदेश प्रसारित करती रहीं। यात्रा के दौरान विभिन्न संस्थाओं एवं समितियों ने भव्य स्वागत किया। पूरे शहर का वातावरण भक्तिमय बन उठा और मार्ग राममय हो गया। यह मंगलमयी कलश यात्रा सेक्टर 30–20–21 के निर्धारित मार्गों से होते हुए अंततः सेक्टर 34 स्थित प्रदर्शनी ग्राउंड में पहुँचकर संपन्न हुई।
हरियाणा के पेपरलैस रजिस्ट्री सिस्टम पर डीड राइटर्स का प्रहार, सरकार के आधे-अधूरे सिस्टम ने बढ़ाई जनता की परेशानी
डीड राइटर एसोसिएशन की मांग, पेपरलैस ही नहीं तहसील दफ्तर भी बनाए जाएं फेसलेस
सुधारों के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने की मांग तेज, डीड राइटर ही अपलोड करेगा दस्तावेज

चंडीगढ़ । डीड राइटर वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले चंडीगढ़ प्रेस क्लब में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। जिसकी अध्यक्षता हरियाणा डीड राइटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप कुमार शर्मा ने की। बैठक में पेपरलैस रजिस्ट्री व्यवस्था की खामियों, अव्यवस्थाओं और सुधार के सुझावों पर जोरदार चर्चा हुई। प्रधान प्रदीप शर्मा ने कहा कि संगठन पेपरलैस रजिस्ट्री व्यवस्था का स्वागत करता है, परंतु इसकी लॉन्चिंग जल्दबाजी में की गई। अगर सिस्टम मजबूत तैयारी के साथ लागू होता तो हरियाणा में यह मॉडल देश का सबसे उत्तम मॉडल बन सकता था। लेकिन अधूरी तैयारियों की वजह से इसमें खामियां ही ज्यादा नजर आ रही है । एसोसिएशन ने बताया कि वर्तमान में सिटीजन सेलर की आईडी से दस्तावेज अपलोड होना उसकी सहमति माना जा रहा है जबकि असल में तहसील/सब-तहसील में काम करने वाले टाइपिस्ट अपनी आईडी से दस्तावेज अपलोड कर रहे हैं।

यह स्थिति गंभीर इसलिए है क्योंकि टाइपिस्ट सिटीजन नहीं माने जा सकते। एक सिटीजन साल में 2-5 रजिस्ट्री करा सकता है, लेकिन टाइपिस्ट को प्रतिदिन पांच दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति है। माह में लगभग 100 अवैध अपलोड तक हो सकते हैं। ऐसी रजिस्ट्री कानूनी रूप से अवैध मानी जा सकती है। एसोसिएशन ने मांग रखते हुए कहा कि अगर सरकार वाकई भ्रष्टाचार खत्म करना चाहती है तो तहसील कार्यालयों को पासपोर्ट ऑफिस की तरह पेपरलैस और फेसलेस बनाया जाए। इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। अध्यक्ष ने कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर का ट्रांसफर तीन माह में होना अनिवार्य हो। कई कंप्यूटर ऑपरेटर वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं जबकि नियम स्पष्ट कहते हैं कि किसी ऑपरेटर को तीन माह से अधिक एक स्थान पर न रखा जाए। पुराने इंतकाल के लिए अलग पोर्टल बनाया जाए। कई नागरिक 10-20 साल पुरानी प्रॉपर्टी का इंतकाल नहीं करा पा रहे। इसके लिए अलग पोर्टल की आवश्यकता है। जमाबंदी में गलती सुधारने का अधिकार पंजीकृत डीड राइटर को मिले। मामूली नाम संशोधन जैसी सुविधाएं पंजीकृत डीड राइटर्स को दी जाएं। जमाबंदी 100-200 पेज तक की होती है इसलिए इसे स्कैन करवाने की बाध्यता खत्म की जाए।पेपरलैस सिस्टम में आधार-पैन की फिजिकल कॉपी क्यों?
डीड राइटर्स ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सिस्टम पेपरलैस है तो दस्तावेजों की फिजिकल कॉपी क्यों मांगी जा रही है? उन्होंने कहा कि दस्तावेजों पर नंबर भी हाथ से लिखे जा रहे हैं। जिसे सॉफ्टवेयर द्वारा जनरेट होना चाहिए। वसीका लेखन फीस बढ़ाई जाए। लाइसेंस पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण हो। बैठक में यह भी बताया गया कि वसीका लेखन फीस पहले से लंबित है, इसे तुरंत बढ़ाया जाए। वसीका लाइसेंस पांच साल के लिए नवीनीकरण किया जाए। दस्तावेज अपलोड होने के बाद कोई कमी न निकाली जाए ताकि आमजन को बार-बार रिवर्ट शुल्क का नुकसान न हो। डीड अपलोड करने का अधिकार सिर्फ डीड राइटर को दिया जाए। एसोसिएशन ने दोहराया कि राजस्व डीड एक अत्यंत संवेदनशील और कानूनी दस्तावेज है। इसे अपलोड करने का अधिकार केवल सिटीजन और पंजीकृत डीड राइटर को मिले। एसोसिएशन ने कहा कि सरकार बिना वेतन दिए रोजगार सृजित कर सकती है इसलिए नए जिले, तहसील व सब-तहसील में नए वसीका नवीस के पद बनाए जाएं। बैठक में हरियाणाभर से आए डीड राइटर्स सहित एसोसिएशन के सचिव भूपिंदर सिंह, उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह, कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र सिंगला, गोपी चंद जिंदल, जसवीर सिंह सहित बड़ी संख्या में वसीका लेखक मौजूद रहे।

श्री गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर भव्य नगर कीर्तन निकाला गया

चंडीगढ़ । नवमी पातशाही, मानव अधिकारों के रक्षक और अद्वितीय साहस के प्रतीक श्री गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा साहिब, सेक्टर 22-डी से आरंभ हुआ। आयोजन चंडीगढ़ गुरुद्वारा अस्थापन कमेटी, सेक्टर 22-डी द्वारा किया गया जिसमें विभिन्न गुरुद्वारा कमेटियों, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक सेवा संगठनों ने पूरा सहयोग दिया। नगर कीर्तन की शुरुआत सिंह साहिब भाई कुलदीप सिंह , जत्थेदार, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री अमृतसर साहिब द्वारा की गई अरदास से हुई। सचखंड पालकी साहिब जत्था द्वारा सुंदरता से सजाई गई पालकी साहिब में विराजमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब संगत के लिए दर्शन और श्रद्धा का मुख्य केंद्र रहे।

पंच प्यारे गुरमत परंपरा की शान के रूप में नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे थे। इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथियों ने भी शिरकत कर श्री गुरु तेग बहादुर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इनमें डॉ. सतनाम सिंह संधू, सांसद (राज्यसभा), पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार, बाबा गुरदेव सिंह नानकसर, प्रतिष्ठित धार्मिक हस्ती, सरदार हरमोहिंदर सिंह लकी, अध्यक्ष, चंडीगढ़ कांग्रेस, हरप्रीत कौर बाबला, मेयर, चंडीगढ़ और सरदार दलजीत सिंह चीमा, पूर्व कैबिनेट मंत्री, पंजाब शामिल थे।

नगर कीर्तन का मार्ग सेक्टर 22-डी से प्रारंभ होकर सेक्टर 17, 18, 8, 7, 19, 27, 30, 20, 21, 22, 23 और 24 की बाजारों से होता हुआ सेक्टर 36 के रास्ते शाम को सेक्टर 37-सी में संपन्न हुआ। पूरे रास्ते में गुरुद्वारा कमेटियों, मार्केट एसोसिएशनों और सामाजिक संगठनों ने संगत का गर्मजोशी से स्वागत किया और लंगर व जलपान की सेवा की। समापन पर चंडीगढ़ गुरुद्वारा अस्थापन कमेटी के अध्यक्ष सरदार अमरजीत सिंह चड्ढा और महासचिव सरदार गुरजोत सिंह सॉहनी ने संगत और सहयोगी संगठनों का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया। विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में विशेष गरिमा जोड़ी। कमेटी ने चंडीगढ़ पुलिस पाइप बैंड का भी आभार प्रकट किया ।

नेशनल सिल्क एक्सपो चंडीगढ़ में शादी सीज़न की रौनक के साथ शुरू

चंडीगढ़ । बहुप्रतीक्षित नेशनल सिल्क एक्सपो – वेडिंग सीज़न स्पेशल हिमाचल भवन, सेक्टर 28-बी, मध्य मार्ग में रंग-बिरंगे माहौल और पारंपरिक साज-सज्जा के बीच भव्य रूप से शुरू हुआ। 21 से 26 नवम्बर तक चलने वाला यह छह दिवसीय एक्सपो रोज़ाना सुबह 11 से रात 9 बजे तक खुला रहेगा और प्रवेश निःशुल्क है। देशभर के 150 से अधिक प्रमाणित मास्टर बुनकरों और नामी डिजाइनरों की भागीदारी वाले इस एक्सपो में भारतीय बुनाई परंपराओं की समृद्ध विरासत एक ही छत के नीचे देखने को मिल रही है। बनारसी, कांचीपुरम, चंदेरी, महेश्वरी, उप्पाडा, इक्कत, टसर सिल्क के साथ-साथ आधुनिक फ्यूज़न डिज़ाइनों की शानदार रेंज यहां प्रदर्शित है। शुद्ध सिल्क और कॉटन साड़ियों, डिज़ाइनर वेयर, एथनिक परिधानों, हस्तनिर्मित ज्वेलरी और वेडिंग कलेक्शनों ने शहर के खरीदारों का दिल जीत लिया। उद्घाटन समारोह में एक्सपो के ऑर्गनाइज़र और ग्रामीण हस्तकला विकास समिति के जयेश कुमार ने कहा कि यह एक्सपो केवल उत्पादों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत के बुनकरों को सशक्त बनाने का एक सामाजिक अभियान है।

उन्होंने बताया कि हमारा उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को स्थायी बाज़ार देना और उनकी कला को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना है। यहां मिलने वाले सभी सिल्क और कॉटन उत्पाद सीधे बुनकरों से आते हैं, किसी बिचौलिए के बिना। पहले दिन ही शहरवासियों ने ब्राइडल और फेस्टिव वस्त्रों की विस्तृत रेंज को खूब सराहा और कारीगरों से उनकी कला के बारे में खास बातचीत भी की। यहाँ की गई खरीदारी पर यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध है। आयोजकों ने चंडीगढ़ के लोगों से अपील की कि शादी और त्योहारों के इस मौसम में वे भारत की श्रेष्ठ बुनाई कला को नज़दीक से देखने और खरीदने का यह सुनहरा मौका न चूकें। नेशनल सिल्क एक्सपो 26 नवम्बर 2025 तक खुला रहेगा और आगंतुकों को भारतीय हैंडलूम की पारंपरिक खूबसूरती और शिल्पकारों की मेहनत को समर्थन देने का अवसर प्रदान करेगा।

चंडीगढ़ में जारी 68वाँ सीआईएससीई एजीएम एवं राष्ट्रीय सम्मेलन
भारतीय शिक्षा के भविष्य को आकार देने के लिए दो हजार से अधिक स्कूल नेता एकजुट
चंडीगढ़ । भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र से संबद्ध स्कूलों के संघ एएसआईएससी का 68वाँ वार्षिक आम बैठक एजीएम और राष्ट्रीय सम्मेलन चंडीगढ़ में चल रहा है, जो हाल के वर्षों में शैक्षणिक नेताओं के सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मेलनों में से एक माना जा रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन, जो 19 से 21 नवंबर तक एकेएम रिसॉर्ट्स, ज़ीरकपुर, पंजाब में आयोजित किया जा रहा है, देशभर के सीआईएससीई अनुरूप स्कूलों के 2000 से अधिक प्रिंसिपल और प्रमुखों को “एक साथ मिलकर मजबूत स्कूलों का निर्माण” थीम के तहत एक मंच पर ला रहा है।सम्मेलन ने देशभर के शैक्षणिक नेतृत्व को एक मंच पर लाते हुए स्कूल शिक्षा में उभरते रुझानों, कौशल-आधारित पाठ्यक्रम, समावेशी शिक्षण प्रणालियों, प्रौद्योगिकी एकीकरण और वैश्विक शिक्षा मॉडल पर सामूहिक विमर्श का अवसर प्रदान किया।उद्घाटन सत्र में राज्यसभा सांसद एवं प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. अशोक मित्तल ने मुख्य संबोधन दिया, जबकि 21 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस (सेवानिवृत्त) विक्रमजीत सेन मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने थीमैटिक चर्चाओं, विशेषज्ञ प्रस्तुतियों, परामर्श सत्रों और कार्यशालाओं में सहभागिता की, जिनका उद्देश्य सीआईएससीई स्कूलों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता, शिक्षक विकास, विद्यार्थी कल्याण और आधुनिक शिक्षण परिवेश को मजबूत करना था।भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षाओं की परिषद सीआईएससीई के वरिष्ठ नेतृत्व ने पूरे सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सिस्को सीआईएससीई के चेयरमैन डॉ. जी. इम्मानुएल ने कहा कि शिक्षा तब विकसित होती है जब नेता उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं। सहयोग और प्रगतिशील नीतियों के माध्यम से हम ऐसे स्कूल तैयार कर रहे हैं जहाँ हर बच्चे के पास सफलता की शक्ति हो।इस अवसर पर सीआईएससीई द्वारा विकसित आठ महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज़ों, हैंडबुक्स और संसाधन सामग्रियों का भी औपचारिक विमोचन किया गया।
एकता और सेवा के जज्बे से ओत-प्रोत होमियोपैथ-फिस्टा करनाल में आयोजित
चंडीगढ़। होम्योपैथिक डॉक्टर एसोसिएशन के तीसरे संस्करण के आयोजन में एक्सेल फार्मा डेराबस्सी की तरफ से पार्टिसिपेशन किया गया। एकता और सेवा के जज्बे से ओत-प्रोत होमियोपैथ-फिस्टा करनाल में आयोजित किया गया। इस आयोजन में हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के विभिन्न डॉक्टर ने हिस्सा लिया। होम्योपैथी में लोगों के बढ़ते विश्वास और रुझान को देखते हुए होम्योपैथिक डॉक्टर एसोसिएशन ने यह फैसला किया कि भव्य तरीके से होम्योपैथिक से जुड़े डॉक्टर को एक मंच पर एकत्र किया जाए ताकि उनके विषय में आने वाली समस्याओं और किसी नई तकनीक या दवाई का विश्लेषण कर उसे पर उचित वार्ता की जाए इसी संदर्भ में करनाल में आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न डॉक्टर ने अपनी अपनी राय शुमारी रखी और होम्योपैथी के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए इसमें अपना संपूर्ण सहयोग देने का वादा किया। सबको मालूम है कि एक्सेल फार्मा के एम. डी. दिवंगत डॉ अनुकांत गोयल पूरी शिद्दत और मेहनत के साथ होम्योपैथी के उत्थान के लिए प्रयासरत थे हालांकि उनका दुनिया से बहुत जल्दी चले जाना होम्योपैथी और इसके डॉक्टर के लिए एक बहुत बड़ा आघात है परंतु उनकी परंपरा को उनके दोनों पुत्र न केवल जीवित रखे हुए हैं बल्कि आगे भी बढ़ा रहे हैं। एक्सेल फार्मा डेराबस्सी की तरफ से कनव गोयल (जनरल मैनेजर सेल्स)ऒर पद्मेश गोयल जी.एम. प्रोडक्शन ने हिस्सा लिया। दोनों ने कहा कि वह होम्योपैथिक को पूरी लगन से आगे बढ़ाएंगे और इस आयोजन में शामिल होकर खुशी महसूस की।
फोर्टिस मोहाली ने विश्व सीओपीडी दिवस पर जागरूकता अभियान चलाया

चंडीगढ़ । क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, जिसे आमतौर पर सीओपीडी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़ों से वायु प्रवाह को बाधित करती है। हालांकि इस बीमारी का इलाज आसानी से संभव है, लेकिन इस स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जागरूकता का स्तर मौजूदा समय में काफी कम है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, हर साल 19 नवंबर को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। विश्व सीओपीडी दिवस-2025 का विषय ‘सांस फूलने पर सीओपीडी के बारे में सोचें’ है, जो जल्द रोग पहचान और उपचार के महत्व पर ज़ोर देता है। डॉ. ज़फ़र अहमद इकबाल, डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर और स्लीप स्टडीज़, फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली, ने एक एडवाइजरी में सीओपीडी के कारणों, लक्षणों और उपचार के विकल्पों के बारे में बताया है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) तब विकसित होता है जब हानिकारक कणों या गैसों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों की वायुमार्ग में जलन और क्षति होती है। इससे सूजन, वायुमार्ग का सिकुड़ना और सांस लेने में कठिनाई होती है। डॉ. ज़फर ने बताया कि “सीओपीडी अक्सर अन्य पुरानी या लंबे समय से बनी हुई बीमारियों के साथ आता है जो व्यक्ति के स्वास्थ्य को और खराब कर सकती हैं। यह अचानक भी बढ़ सकता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है। इस बीमारी की पहचान लगातार श्वसन संबंधी लक्षणों जैसे बलगम वाली खांसी, सांस फूलना आदि से होती है। अन्य लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, घरघराहट, मतली, ऊर्जा की कमी, अप्रत्याशित तौर पर वजन घटना और टखनों, पैरों या टांगों में सूजन शामिल हैं। डॉ. ज़फर ने बताया कि इस बीमारी का डायग्नोस क्लिनिकल टेस्ट और स्पाइरोमेट्री टेस्ट द्वारा पुष्टि के माध्यम से किया जाता है, “सीओपीडी के लक्षणों के लिए तत्काल मेडिकल इंटरवेंशन की आवश्यकता होती है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सीओपीडी का मुख्य जोखिम कारक धूम्रपान है। अन्य कारकों में बायोमास ईंधन के संपर्क में आना, वायु प्रदूषण, जेनेटिक यानि आनुवंशिक असामान्यताएं, फेफड़ों का खराब विकास और तेजी से बढ़ती उम्र शामिल हैं। उपचार के विकल्पों में एक्टिव और पैसिव दोनों तरह के धूम्रपान से परहेज़, वायु प्रदूषण के संपर्क से बचाव, ज़रूरत से ज़्यादा दवाइयां लेना आदि शामिल हैं। डॉ. ज़फ़र ने आगे कहा कि “प्रणालीगत दुष्प्रभावों से बचने के लिए दवा मुख्य रूप से ब्रोंकोडायलेटर इनहेलर के ज़रिए दी जाती है। हालांकि वर्तमान में सीओपीडी का कोई इलाज नहीं है, फिर भी इस बीमारी को रोका जा सकता है। डॉ.जफ़र ने कहा कि “उचित उपचार के बिना, यह बीमारी बढ़ सकती है और आगे चलकर श्वसन और हृदय गति रुकने का कारण बन सकती है, जिसके लिए लंबे समय तक ऑक्सीजन और बाईपैप सपोर्ट की ज़रूरत होती है – एक ऐसी मशीन जो सीओपीडी से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में मदद करती है।
