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सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील कर्मचारियों ने लंबित वेतन को लेकर संजय टंडन से हस्तक्षेप की मांग की

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टंडन ने यू.टी शिक्षा सचिव से की बात, शिक्षा सचिव ने एक सप्ताह में वेतन जारी करने का आश्वासन दिया

चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता संजय टंडन से मुलाकात की। कर्मचारियों ने अप्रैल और मई माह का वेतन न मिलने तथा बेहतर वेतन और सेवा शर्तों की मांग को प्रमुखता से उठाया। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों टंडन को बताया कि स्कूलों में महत्वपूर्ण सेवाएं देने के बावजूद उन्हें पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिसके कारण उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने टंडन से आग्रह किया कि वह इस मामले को चंडीगढ़ प्रशासन और शिक्षा विभाग के समक्ष उठाकर उनके लंबित वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करवाएं। कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के बाद टंडन ने यू.टी शिक्षा सचिव से बातचीत की और उनसे इस मामले पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया। शिक्षा सचिव ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों का लंबित वेतन एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया जाएगा। इस अवसर पर संजय टंडन ने कहा कि मिड-डे मील कर्मचारियों जैसे मेहनती कर्मियों का वेतन किसी भी परिस्थिति में लंबित नहीं रहना चाहिए। ये कर्मचारी स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनके कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने हरियाणा के समान सुविधाएं प्रदान करने की मांग भी उठाई। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में मिड-डे मील सहायकों को केवल 4,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जबकि हरियाणा में उनके समकक्ष कर्मचारियों को 7,000 रुपये प्रति माह दिया जाता है। उन्होंने प्रशासन से हरियाणा की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने की मांग की। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ में मिड-डे मील कर्मचारियों को वर्ष में केवल 10 महीने का भुगतान किया जाता है, जबकि हरियाणा में उन्हें 11 महीने का मानदेय मिलता है। उन्होंने यह लाभ चंडीगढ़ के कर्मचारियों को भी दिए जाने की मांग की। टंडन ने कहा कि मैं हरियाणा के समान मानदेय और 11 माह के भुगतान की उनकी जायज मांगों का भी मजबूती से समर्थन करूंगा। ये कर्मचारी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं और उनकी मांगों पर तत्काल एवं संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। संजय टंडन ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने तथा उन्हें उनकी सेवाओं के अनुरूप उचित और समय पर पारिश्रमिक दिलाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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