

डीएस बिल्डटेक फर्म विवाद में सोहना थाने में एफआईआर की गई दर्ज
मोहाली/पंचकूला। मोहाली के थाना सोहना में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े करोड़ों के लेन-देन और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने डी.एस. बिल्डटेक फर्म में फर्जीवाड़ा, विश्वासघात और जाली दस्तावेज तैयार करने के आरोप में तीन पार्टनरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पंचकूला निवासी शिव अग्रवाल ने एसएसपी मोहाली को दी शिकायत में बताया कि वह डी.एस. बिल्डटेक फर्म में पार्टनर थे। फर्म मोहाली के गांव कंबाला और कंबाली में करीब 51 से 57 एकड़ जमीन के कारोबार से जुड़ी थी। शिकायत के अनुसार, मार्च 2022 में आदर्श गर्ग, प्रवीण गर्ग और वेद प्रकाश गर्ग के साथ एमओयू हुआ था। इसके तहत शिकायतकर्ता और उनके सहयोगियों को अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर फर्म से अलग होना था। जांच में डीड की तारीखों में अंतर मिला…शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पूंजी को बिना सहमति बैलेंस शीट में ‘अनसिक्योर्ड लोन’ के रूप में दिखाया गया। पुलिस जांच में शिकायतकर्ता, आरोपियों, गवाहों और रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में एमओयू, डिसॉल्यूशन डीड और पार्टनरशिप डीड की तारीखों में अंतर पाया गया। पुलिस के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 की डीड संदिग्ध मिली, क्योंकि इसके बाद अक्टूबर 2022 तक फर्म के नाम जमीनों की रजिस्ट्रियां होती रहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी मोहाली के आदेशों के बाद थाना सोहना में आदर्श गर्ग, प्रवीण गर्ग और वेद प्रकाश गर्ग के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच एएसआई नरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।जमीन का सौदा 4.27 करोड़ रुपए प्रति एकड़ तय किया गया था। शिव अग्रवाल का आरोप है कि एमओयू के तहत तय भुगतान किए बिना ही आरोपियों ने दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लिया। एमओयू साइन करते समय 5 करोड़ और पार्टनरशिप डीड के समय 5 करोड़ रुपए भुगतान किए जाने थे। आरोप है कि एमओयू, पार्टनरशिप डीड और डिसॉल्यूशन डीड पर एक साथ हस्ताक्षर करवाकर इन्हें मध्यस्थ के पास रखा गया था, लेकिन बाद में बिना जानकारी दिए दस्तावेज रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश कर फर्म में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी ट्रांसफर करवा ली गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने 1 अप्रैल 2022 की बैक-डेटेड पार्टनरशिप डीड तैयार कर शिकायतकर्ता को फर्म से बाहर दिखाया। इसके बाद नई फर्म बनाकर पुरानी कंपनी की खरीदी गई जमीनों को नई कंपनी के नाम ट्रांसफर कराने का प्रयास किया गया।

