Sunday, April 26, 2026
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गौ सम्मान आह्वान अभियान ने उठाई गौ-कल्याण के लिए ठोस व्यवस्था की मांग

चंडीगढ़। गौ सम्मान आह्वान अभियान के आयोजकों ने शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर देशभर में गौ-कल्याण और संरक्षण के लिए एक सुव्यवस्थित और जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बावजूद, कोर्डिनेशन की कमी, निगरानी के अभाव और जमीनी स्तर पर कमजोर इम्प्लीमेंटेशन के कारण विशेष रूप से आवारा और अनुपयोगी गौवंश आज भी उपेक्षा और असुरक्षा की स्थिति में है। मीडिया को संबोधित करते हुए अभियान के प्रवक्ता विपिन कंसल और जगदीश चंदर बत्ता सहित अविनाश कुमार नाभा और राजेश ढींगरा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य “सेवा, सुरक्षा और सम्मान” के भाव के साथ गौवंश के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल आर्थिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, मजबूत ढांचे और जनभागीदारी से जुड़ा हुआ है, जिसे एक साथ जोड़कर ही स्थायी समाधान संभव है। उन्होंनें असहमति जताई की सरकारों द्वारो करोड़ो रुपयों को काउ सैस लिये जाने के बावजूद भी गौ कल्याण की जमीनीं स्तर पर योजनायें नदारद हैं। अभियान की प्रमुख मांगों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा बनाया जाए, जिसमें नामित अधिकारी या समितियां सीधे तौर पर गौ-कल्याण के लिए जिम्मेदार हों। ये अधिकारी गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें, योजनाओं के इम्पलीमेंटेशन की निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी गौ असहाय या बेसहारा न रहे। साथ ही, निराश्रित पशुओं की समस्या के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। अभियान में गौ-आधारभूत संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया गया। इसके तहत गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर आधुनिक और सुव्यवस्थित गौशालाओं की स्थापना और रखरखाव की मांग की गई, जहां चारे, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मचारियों की समुचित व्यवस्था हो। इसके अतिरिक्त, अनुपयोगी या खाली पड़ी सरकारी भूमि को चिन्हित कर गौशालाओं के लिए उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया, ताकि बढ़ती संख्या में निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सके। अभियान ने देशव्यापी सर्वेक्षण और गौवंश की टैगिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि एक सटीक डाटाबेस तैयार हो सके। इससे पशुओं की पहचान, स्वामित्व का निर्धारण, परित्याग पर रोक और योजनाओं के बेहतर सहायता मिलेगी। साथ ही, गौशालाओं की निगरानी, स्वास्थ्य रिकॉर्ड के रखरखाव और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक के उपयोग को भी आवश्यक बताया गया। कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण और पशु क्रूरता से संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए। अंतरराज्यीय सीमाओं और परिवहन मार्गों पर निगरानी मजबूत की जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय करते हुए सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई। अभियान ने किसानों और गौ वंश पालकों के समर्थन को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। इसके तहत आर्थिक सहायता, पशु बीमा योजनाएं, चारे पर सब्सिडी और सस्ती पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि आर्थिक मजबूरियों के कारण पशुओं को छोड़ने की प्रवृत्ति को रोका जा सके। इसके साथ ही, सामुदायिक भागीदारी और गोद लेने जैसे मॉडल को बढ़ावा देने की भी बात कही गई। आयोजकों ने जनभागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से इस दिशा में सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में मूल्य आधारित कार्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया, ताकि गौ वंश के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। अंत में, श्री कंसल ने कहा कि यह अभियान पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और सेवा-प्रधान पहल है, जो “सेवा, सुरक्षा और सम्मान” के मूल्यों पर आधारित है और किसी भी प्रकार का चंदा नहीं लेता। इस प्रेस वार्ता का उद्देश्य नीति-निर्माताओं और संबंधित पक्षों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करना है। उन्होने बताया कि इस अभियान से जुड़ने के लिये 9067777323 पर एक मिस काल कर सभी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।

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