Wednesday, March 11, 2026
Home Blog Page 21

उद्यमोत्सव–42 : पीजी सरकारी कॉलेज फॉर गर्ल्स सेक्टर–42 में दिखी छात्राओं की उद्यमिता भावना

0

चंडीगढ़। पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स सेक्टर–42, चंडीगढ़ के परिसर में उत्साह और नवाचार का अनोखा संगम देखने को मिला, जब कॉलेज की एंटरप्रेन्योरशिप सेल द्वारा आयोजित “उद्यमोत्सव–42” के चौथे संस्करण का आयोजन किया गया। यह एक दिवसीय स्टार्टअप और नवाचार मेला था, जिसने छात्राओं में उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में कॉलेज की छात्रओं उद्यमियों, स्थानीय महिलाओं स्वयं सहायता समूहों तथा नवोन्मेषकों द्वारा कुल 40 जीवंत स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों पर हस्तनिर्मित उत्पाद, पर्यावरण–अनुकूल वस्तुएँ, खाद्य सामग्री, फैशन एक्सेसरीज़ और अनेक नवीन उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उद्यमोत्सव–42 ने लगभग 3,000 से अधिक आगंतुकों को आकर्षित किया, जिनमें छात्राएँ, शिक्षकगण और अन्य हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर कॉलेज का परिसर नवाचार, उत्पादों और विचारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. अनीता कौशल द्वारा किया गया। उनके साथ डॉ. लखवीर (एएसपीडी रूसा ), उप–प्राचार्या डॉ. अंजू त्रिखा, ई –सेल के सदस्य तथा स्टूडेंट काउंसिल की टीम भी उपस्थित रही।

प्राचार्या ने सभी स्टॉलों का भ्रमण किया और छात्राओं की रचनात्मकता, उद्यमिता–भावना तथा नवाचार के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि युवा महिलाएँ अपने विचारों को क्रियान्वित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित करने हेतु नवाचार, प्रस्तुति एवं व्यावसायिक क्षमता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ तीन स्टॉलों को प्रमाण–पत्र प्रदान किए गए। इसने प्रतियोगिता को और भी रोचक तथा प्रेरणादायक बना दिया। इस अवसर पर ई –सेल की संयोजक सुनीता कुमारी ने कहा कि उद्यमोत्सव का उद्देश्य युवा मस्तिष्कों को अपने विचारों को व्यवहार में लाने का मंच प्रदान करना है। यह ‘करके सीखने’ की प्रक्रिया है, और आज हमारी छात्राओं ने यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर नवाचार की कोई सीमा नहीं होती। अपने बढ़ते पैमाने और प्रभाव के साथ, बाज़ार उद्यमोत्सव–42 ने कॉलेज में एक सशक्त उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम रखा। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, और छात्राएँ पहले से ही इसके अगले संस्करण की प्रतीक्षा कर रही हैं।

डॉ. एचएस बेदी को कार्डियोवैस्कुलर साइंस में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया

चंडीगढ़। पार्क हॉस्पिटल, मोहाली के कार्डियोवैस्कुलर साइंस डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह बेदी को कार्डियोवैस्कुलर साइंस में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
हाल ही में नई दिल्ली में वॉयस ऑफ हेल्थकेयर- बीट 2025 द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्डियक साइंस सेमिनार के दौरान सम्मानित किया गया।
डॉ. बेदी को वैस्कुलर व थोरैसिक सर्जरी और नए इनोवेशन में उनके सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया, जिनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में तीन बार दर्ज हो चुका है। उन्होंने बीटिंग हार्ट सर्जरी में सराहनीय कार्य किया है, जो एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला ऑपरेशन है, जिससे हार्ट सर्जरी के जोखिम और लागत में उल्लेखनीय कमी आई है और जटिल हार्ट सर्जरी आम आदमी के घर तक उपलब्ध हो गई है।

इकोसिख पंजाब में लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके गुरु गोबिंद सिंह के पक्षी ‘बाज’ को पुनर्जीवित करने में जुटा

0

गुरु तेग बहादुर की 350 वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 350 वन लगाने का लक्ष्य

चंडीगढ़ । इकोसिख, एक ग्लोबल गैर-सरकारी संगठन जो सिख समुदाय को जलवायु परिवर्तन के खतरों और प्राकृतिक पर्यावरण के बिगड़ते स्वरूप के प्रति एक जुट करके इन समस्याओं के समाधान हेतु काम करता है , ने गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े पक्षी ‘बाज’ का कुनबा दोबारा से बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ी योजना का खुलासा किया है। यह योजना मुंबई स्थित 140 साल पुराने संगठन, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के सहयोग से अमल में लाई जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का उद्देश्य पंजाब के आधिकारिक पक्षी ‘बाज’ या नॉर्दर्न गौसहॉक और एक अन्य बाज प्रजाति, शाहीन बाज के कुदरती आवास को फिर से आबाद करना है। इकोसिख ने गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत के उपलक्ष्य में 350 वन लगाने का अभियान भी शुरू किया है। ये सभी घोषणाएं चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गईं
डॉ. राजवंत सिंह, ग्लोबल प्रेसिडेंट, इकोसिख ने कहा कि “गुरु गोबिंद सिंह जी का उड़ता पक्षी, ‘बाज’ लोगों को गरिमा और साहस का जीवन जीने की याद दिलाता था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महान गुरु का यह महत्वपूर्ण प्रतीक और पंजाब का आधिकारिक राज्य पक्षी अब अपने प्राकृतिक आवास के नुकसान, अवैध व्यापार और प्रदूषण के कारण राज्य के आकाश से लुप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि चिंता की बात यह है कि पंजाब के वन्यजीव विभाग ने दो दशकों से भी अधिक समय से ‘बाज’ के किसी भी रिकॉर्डेड तौर पर देखे जाने की सूचना नहीं दी है। इसी के चलते राज्य में ‘इकोलॉजिकल बैलेंस’ स्थापित करने और गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े इस पवित्र पक्षी को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘बाज’ को पंजाब में वापस लाने की योजना शुरू की गई है। डॉ. राजवंत ने कहा कि इकोसिख में हम बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के साथ अपने समझौता करार करने और आपसी सहयोग की व्यापक योजना को लेकर काफी अधिक उत्साहित हैं, जिसके तहत हम एक महत्वाकांक्षी पवित्र जीव मिशन की शुरुआत करेंगे। यह एक वैज्ञानिक रूप से निर्देशित पहल है और विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग करके बाज के पुनर्वास और पंजाब भर में उसके खोए हुए आवास को दोबारा से आबाद करेगा। प्रेस वार्ता में इकोसिख ने यह भी घोषणा की कि वह गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 350 पवित्र वन लगाएगा, जिनमें से प्रत्येक में मियावाकी पद्धति का उपयोग करके एक देसी लघु वन लगाया जाएगा, जो बंजर भूमि में जैव विविधता को पुनर्जीवित करता है। इकोसिख इंडिया की अध्यक्ष डॉ. सुप्रीत कौर ने कहा कि हम गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि स्वरूप 350 नए पवित्र वन लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रत्येक वन जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने और प्रकृति के साथ सिख गुरुओं के साथ सीधे और शाश्वत संबंधों का सम्मान करने वाली एक जीवंत कक्षा के रूप में कार्य करेगा। पिछले 16 वर्षों में, इकोसिख चैरिटेबल सोसाइटी ने पूरे भारत में 1,350 से अधिक पवित्र वन लगाए हैं, जिनमें से प्रत्येक जैव विविधता और आध्यात्मिक चिंतन के जीवंत सैंक्चुअरी के रूप में कार्य करता है। चरण सिंह, कन्वीनर, सैक्रेड फॉरेस्ट्स एंड सैक्रेड फौना , इकोसिख ने कहा कि हमारे गुरुओं के नाम पर वन लगाना वर्षों से हमारी पवित्र परंपरा रही है। पवित्र जीव-जंतु मिशन के साथ, अब हम इस परंपरा को आसमान तक फैला रहे हैं। बाज को फिर से इस एरिया में आबाद करना केवल इकोलॉजिकल काम नहीं है, यह आध्यात्मिक सेवा है, गुरु की ‘सरबत दा भला’ की शिक्षा का नए सिरे से प्रसार है। इकोसिख भी 10 लाख पेड़ लगाने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है क्योंकि इसने पंजाब और भारत के अन्य राज्यों में पहले ही 1350 गुरु नानक पवित्र वन लगाए हैं। इस अभियान के दौरान 750,000 देसी पेड़ लगाए गए हैं और प्रत्येक वन में 550 पेड़ हैं। ये पवित्र और हरति अभियान 2019 में गुरु नानक की 550वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुरू किया गया था। इस पहल के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, लोकेश जैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, टीके स्टील और शहर को हरा-भरा बनाने के लिए समर्पित इकोसिख परियोजना ‘लंग्स ऑफ लुधियाना’ के संयोजक ने कहा कि “केवल ‘लंग्स ऑफ लुधियाना’ पहल के तहत, हमने लगभग 280 वन लगाए हैं जिनमें 1,52,000 से ज़्यादा देसी पेड़ शामिल हैं। ये वन तेजी से फल-फूल रहे हैं।

न्यू हॉलैंड ने पेश किया एचवीएसी केबिन के साथ वर्कमास्टर 105, हर मौसम में खेती के लिए उपयुक्त

0

जीरकपुर । सीएनएच के ब्रांड, न्यू हॉलैंड ने एचवीएसी केबिन के साथ वर्कमास्टर 105 लॉन्च किया है, जो कंपनी के उच्च हॉर्सपावर ट्रैक्टर की श्रृंखला का सबसे नया उत्पाद है। यह नया संस्करण न्यू हॉलैंड के 106 एचपी ट्रैक्टर रेंज में हर मौसम में आराम और उन्नत प्रदर्शन की सुविधा पेश करता है, जो इसे चलाने वाले को मिलने वाले आराम और उत्पादकता के लिहाज़ से नए मानक स्थापित करता है। गौरतलब है कि 106 एचपी, 3.4-लीटर एफपीटी (फिएट पावरट्रेन टेक्नोलॉजीज़) टीआरईएम-IV इंजन से चलने वाला वर्कमास्टर 105, कम आरपीएम (चक्कर प्रति मिनट) के साथ असाधारण प्रदर्शन और ईंधन दक्षता प्रदान करता है। एचवीएसी केबिन वाला यह नया संस्करण छह रूफ वेंट वाले हीटिंग और एयर कंडीशनिंग प्रणाली के साथ हर मौसम में आराम प्रदान करता है। यह शोर-मुक्त माहौल और थकान-मुक्त संचालन के लिए एयर-सस्पेंडेड सीट भी प्रदान करता है, जबकि न्यूमेटिक रिवर्सिबल फैन कटाई के बाद धूल भरी परिस्थितियों में भी निर्बाध चलाते रहने में मदद करता है। यह विशेष रूप से धान की कटाई के बाद गांठ बनाने के दौरान उपयोगी है।

सीएनएच के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (भारत), नरिंदर मित्तल ने कहा कि न्यू हॉलैंड वर्कमास्टर 105 अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, उच्च शक्ति और विभिन्न किस्म के उपयोग में विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। एचवीएसी केबिन वाले इस नए उत्पाद के लॉन्च के साथ, वर्कमास्टर रेंज अब हर मौसम के लिए तापमान नियंत्रण की सुविधा के साथ सालों भर आराम प्रदान करने के लिहाज़ से बेहतरीन है। ट्रैक्टर को किसानों के लिए थकान-मुक्त संचालन और कठिन खेत की परिस्थितियों में भी अधिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हर नवोन्मेष के साथ, न्यू हॉलैंड भारतीय कृषि के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करता रहता है, विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी पेश करता है, जो किसानों के लिए दक्षता, सुविधा और उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। वैश्विक बाज़ारों में भारत में निर्मित मॉडल के रूप में अपनी सफलता साबित करने के बाद, पिछले साल भारतीय बाज़ार में पेश किया गया वर्कमास्टर 105 अब एचवीएसी केबिन के साथ उपलब्ध है। यह नया संस्करण वर्कमास्टर श्रृंखला के शानदार प्रदर्शन और व्यापक स्वीकृति पर आधारित है, जिसकी भारत और दुनिया भर में 15,000 इकाइयों बिक चुकी है। यह 20 फॉरवर्ड + 20 रिवर्स पावर शटल ट्रांसमिशन और 3,500 किलोग्राम की मज़बूत लिफ्ट क्षमता से लैस है, जो भारी उपकरणों को आसानी से संभालने में मदद करता है। हर मौसम के लिए कारगर केबिन अत्यधिक तापमान से सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि मुख्य ड्राइव और पावर टेक-ऑफ (पीटीओ) के लिए पूर्ण वेट क्लच निरंतर भार के तहत स्थायित्व और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है, विशेष रूप से बेलिंग (गांठ बांधना), आलू की रोपाई और ट्रेंचिंग (गड्ढा खोदना) जैसे काम में। वर्कमास्टर 105 उन्नत अनुप्रयोगों जैसे बेलिंग, चारा कटाई और ट्रेलर के उपयोग आदि के लिए भी उपयुक्त है। संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद, वर्कमास्टर 105 अब एचवीएसी केबिन के आगमन के साथ भारत में भी बढ़ती मांग के लिए तैयार है। यह नया मॉडल पूरे भारत में न्यू हॉलैंड डीलरशिप पर ₹35 लाख (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उपलब्ध होगा, जिसके साथ 3 साल या 3,000 घंटे की वारंटी भी मिलेगी। न्यू हॉलैंड इस लॉन्च के साथ, प्रीमियम ट्रैक्टर खंड में अपनी अग्रणी स्थिति को और मज़बूत कर रहा है, और भारतीय किसानों के लिए उच्च-एचपी ट्रैक्टर बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हुए शक्ति, प्रदर्शन और हर मौसम में आराम प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।

हिंदू संगठनों द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का 350वां शहीदी दिवस मनाने की घोषणा

0

दरबार साहिब अमृतसर से दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब तक नगर कीर्तन निकाला जाएगा

चंडीगढ़ । सिखों के नौवें गुरु ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित नगर कीर्तन सजाने के संबंध में प्रेस क्लब चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जत्थेदार बाबा कुलविंदर सिंह (96 करोड़ी) चमकौर साहिब वाले ने कहा कि इस बार श्री गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस हिंदू संगठनों के साथ मिलकर मनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि हिंदू संगठन के परमिंदर भट्टी और एडवोकेट केतन शर्मा ने उनसे मुलाकात की और शहीदी दिवस के अवसर पर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब तक नगर कीर्तन निकालने पर विचार किया। जिसके बाद उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह से मुलाकात कर इस शहीदी दिवस को मनाने की तैयारियां शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए हिंदू संगठन के परमिंदर भट्टी और एडवोकेट केतन शर्मा ने बताया कि जिस प्रकार कश्मीरी पंडितों के आह्वान पर श्री गुरु तेग बहादुर धर्म की रक्षा के लिए अपनी शहादत देने दिल्ली पहुंचे थे, उसी प्रकार श्री दरबार साहिब से गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब चांदनी चौक, दिल्ली तक नगर कीर्तन निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि यह नगर कीर्तन निशान साहिब, पंज प्यारे और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छत्रछाया में निकाला जाएगा। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर इस नगर कीर्तन का गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे अपनी कुछ मांगों को प्रधानमंत्री कार्यालय, दिल्ली तक भी पहुंचाएंगे। जिनमें श्री अमृतसर साहिब से दिल्ली तक राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम गुरु तेग बहादुर के नाम पर रखना, बाहरी लोगों के बजाय बच्चों को किताबों में प्राथमिकता के आधार पर सिख गुरुओं के बारे में पढ़ाना और चांदनी चौक, दिल्ली में एक कॉरिडोर बनाना आदि शामिल हैं। इस अवसर पर जत्थेदार बाबा कुलविंदर सिंह (96 करोड़ी) चमकौर साहिब वालों ने श्रद्धालुओं से इस नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। ​​इस अवसर पर उनके साथ बाबा मान सिंह , बाबा मनिंदर सिंह , बाबा शेर सिंह , बाबा गुरदेव सिंह समराला, दिलप्रीत सिंह, प्रदीप सिंह और परगट सिंह (कौमी इंसाफ मोर्चा) आदि उपस्थित थे।

The 41st Annual National Workshop on Clinical Pharmacology (NWCP 2025) begans today at the PGIMER

chandigarh : The 41st Annual National Workshop on Clinical Pharmacology (NWCP 2025) began today at the PGIMER, Chandigarh, organized by the Clinical Pharmacology Unit, Department of Pharmacology. The prestigious week-long event brings together eminent experts, academicians, researchers, and postgraduate trainees from across India to deliberate on advances in drug development, clinical trials, and rational therapeutics. The inaugural ceremony commenced with the traditional lamp lighting, marking the formal opening of the workshop. Prof. Samir Malhotra, Head, Department of Pharmacology, delivered the welcome address, highlighting the department’s pioneering role in advancing clinical pharmacology education and translational research at PGIMER. Prof. Vipin Kaushal, Medical Superintendent, PGIMER, graced the occasion as the Chief Guest and addressed the gathering. In his inaugural remarks, he commended the department’s longstanding contribution to promoting ethical and evidence-based clinical research and emphasized the importance of strengthening interdisciplinary collaborations for better patient outcomes.

The highlight of the event was an inspiring address by Prof. P. L. Sharma, Founder of the National Workshop on Clinical Pharmacology, who spoke on “How the Discipline of Clinical Pharmacology Evolved with Time.” He recalled the formative years of the discipline and underscored its vital role in ensuring safe, effective, and individualized therapy. The session concluded with a vote of thanks by Dr. Ashish Kakkar, who acknowledged the invaluable guidance of senior faculty, the participation of delegates, and the institutional support that has sustained the NWCP legacy. Following the inauguration, the academic sessions began with Dr. Shoibal Mukherjee’s talk on “Academic Research Units,” followed by Prof. Nusrat Shafiq’s session on “Clinical Pharmacology in India – Taking Stock.” Subsequent lectures by Dr. Shoibal Mukherjee and Dr. Gunjan Kumar focused on data management systems and multicenter clinical research design, culminating in a hands-on protocol development exercise led by Prof. Nusrat Shafiq and Dr. Ashish Kakkar. The workshop will continue throughout the week with expert-led sessions and practical demonstrations on pharmacokinetics, pharmacogenomics, health technology assessment, and ethical aspects of clinical research, amongst contemporary topics,

PGIMER’s Renal Transplant Surgery Department Shines at ISOT 2025

chandigarh : The Department of Renal Transplant Surgery at PGIMER made a remarkable impact at the 35th Annual Meeting of the Indian Society of Organ Transplantation (ISOT 2025), held at the Novotel Convention Centre in Jaipur from October 10th to 12th, 2025. Leadership Recognized, Prof. Ashish Sharma, Head of the Department, was felicitated by Honourable Governor of Rajasthan Sh Haribhau Kisanrao Bagde for his outstanding contributions and leadership in the field of pancreas transplantation in the country highlighting his commitment to excellence in surgical care. Awards and Accolades ,The department’s achievements extended beyond leadership recognition, with: Dr. Sarbpreet and Dr. Belmin receiving the prestigious Mentor-Mentee Award,Dr. Praneeth Reddy and Dr. Karthi k securing 1st and 2nd Best Paper prizes for their oral presentations in the field of pancreas transplantation and vascular reconstruction. Dr. Ritika Panwar from the Department of Pharmacology winning 2nd prize at the specialized Tac Summit, showcasing strong inter-departmental research in transplant immunosuppression Establishing Dominance,These numerous high-profile awards in leadership, mentorship, research, and specialized competitions solidified the Department of Renal Transplant Surgery’s prominent and productive presence at ISOT 2025.

PGIMER Chandigarh Observes ‘CPR Awareness Week’ with Commitment to Lifesaving Skills and Training

chandigarh : PGIMER Chandigarh is partaking and conscientiously participating in Ministry of Health and Family Welfare, Government of India initiative ‘The CPR Awareness Week, being held from 13th- 17th October, 2025. Under this initiative, at the outset a pledge was taken by healthcare providers in the institute to raise awareness regarding importance of timely cardio-pulmonary resuscitation (CPR) in saving lives as well as to learn, practice correct techniques of CPR.The knowledge and expertise about CPR helps to understand individuals in a health emergency to provide assistance with courage, compassion, and responsibly until professional medical help arrives as well as to become aware of CPR and its life-saving. Also, a Basic Life Support (BLS) training workshop cum training program is being organised by institute under National Emergency Life Support (NELS) initiative by GOI to provide comprehensive training to healthcare providers and other non-clinical staff pertaining to wide range of Adult and Paediatric Basic Life Support techniques so as participants acquire the most current evidence-based competencies required for effective emergency response.

सीपी67 मॉल ने प्रीप्राइट के सहयोग से बच्चों के लिए उद्यमिता प्रदर्शनी किड्सप्रेन्योर का आयोजन किया

0

मोहाली । सीपी67 मॉल, मोहाली ने प्रीप्राइट के सहयोग से, युवा दिमागों के नवाचार, रचनात्मकता और व्यावसायिक कौशल का जश्न मनाने वाली अपनी तरह की अनूठी उद्यमिता प्रदर्शनी “किड्सप्रेन्योर” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने एक गतिशील मंच प्रदान किया जहाँ बच्चों ने नवोदित उद्यमियों की भूमिका निभाई और अपने अनूठे विचारों, उत्पादों और उद्यमशीलता की भावना का प्रदर्शन किया।किड्सप्रेन्योर का उद्देश्य बच्चों को अपनी अवधारणाओं को प्रस्तुत करने और विपणन करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करके उनमें रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है। हस्तनिर्मित शिल्प और घरेलू सजावट से लेकर पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों और DIY कृतियों तक, यह प्रदर्शनी कल्पना और नवाचार का जीवंत प्रदर्शन थी।इस पहल के बारे में बात करते हुए, होमलैंड ग्रुप के सीईओ उमंग जिंदल ने कहा, “सीपी67 में, हम अगली पीढ़ी को बड़े सपने देखने और साहसिक सोच रखने के लिए प्रेरित करने में विश्वास करते हैं। किड्सप्रेन्योर सिर्फ़ एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि एक सशक्त यात्रा है जहाँ बच्चे आत्मविश्वास, संवाद कौशल और उद्यमशीलता की दृष्टि विकसित करते हैं।उत्कृष्ट युवा उद्यमियों में द स्पार्कल स्टूडियो की इवाना त्रेहान और अनम विर्क शामिल थीं, जिन्होंने दिवाली की सजावट, रंगे हुए जार, DIY किट और हाथ से बने परी उद्यानों की अपनी रेंज से आगंतुकों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “हम इस त्योहारी सीज़न में अपने हाथों से बनाई गई चीज़ों से हर घर में चमक और खुशी लाना चाहते थे।मेराकी स्टूडियो के कबीर सिंह थेथी ने रचनात्मक लेगो गेम्स और हस्तनिर्मित सजावट का प्रदर्शन करते हुए कहा, “मुझे कल्पना से जीवंत चीज़ें बनाना बहुत पसंद है।इस बीच, नेचर निन्जाज़ की कृषा रावत ने पौधों और पर्यावरण के अनुकूल गमलों के अपने संग्रह के साथ स्थिरता को बढ़ावा दिया और कहा, “प्रकृति एक सुंदर और ज़िम्मेदार तरीके से हमारे घरों का हिस्सा बन सकती है।स्ट्रॉबेरी फील्ड्स हाई स्कूल, फर्स्टेप स्कूल्स, दास एंड ब्राउन, मानव रचना और भवन विद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों के छात्रों के साथ-साथ ट्राइसिटी के 20 से ज़्यादा स्कूलों के प्रतिभागियों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिससे यह क्षेत्र की रचनात्मकता और युवा ऊर्जा का एक जीवंत संगम बन गया।प्रीप्राइट द्वारा प्रतिभागियों को हर कदम पर मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ, किड्सप्रेन्योर ने सीखने और मनोरंजन को खूबसूरती से मिश्रित किया और युवा नवप्रवर्तकों की असीम क्षमता को उजागर किया। इस कार्यक्रम ने युवाओं को सशक्त बनाने और कम उम्र से ही रचनात्मक उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की सीपी67 मॉल की प्रतिबद्धता को और पुष्ट किया।

जीएमसीएच ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी – नॉर्थ ज़ोन  के गोल्डन जुबली वार्षिक सम्मेलन की मेज़बानी की

0

चंडीगढ़ ।   गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सेक्टर 32 (जीएमसीएच), चंडीगढ़ के मानसिक रोग विभाग ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी – नॉर्थ ज़ोन (आईपीएस-एनज़ेड 2025) के  गोल्डन जुबली वार्षिक सम्मेलन की मेज़बानी की। दो दिवसीय  गोल्डन जुबली यह समारोह न केवल अकादमिक उत्कृष्टता के पचास वर्षों को चिह्नित करता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में करुणा, सेवा और प्रतिबद्धता के पाँच दशकों का भी प्रतीक है।
इस वर्ष के सम्मेलन का विषय था: “गंभीर मानसिक रोग: मनोचिकित्सकीय दवाओं से आगे की सोच”, जो मानसिक रोगों के प्रति एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है, ताकि मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति आत्मविश्वास और स्वतंत्रता पुनः प्राप्त कर सकें तथा व्यक्तिगत और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा मिल सके। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. सविता मल्होत्रा, प्रेजिडेंट, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी उपस्थित रहीं, जबकि जीएमसीएच चंडीगढ़ के डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. जी.पी. थामी, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें सोविनियर, आईपीएस-एनज़ेड न्यूज़लेटर, और डॉ. गुरविंदर पाल सिंह (पूर्व प्रेजिडेंट, आईपीएस-एनज़ेड) द्वारा लिखित पुस्तक “नई रोशनी” शामिल हैं। इस अवसर पर मनोरोग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें आईपीएस-एनज़ेड के पूर्व प्रेसीडेंट्स एवं जीएमसीएच के मानसिक रोग विभाग के पूर्व छात्र भी शामिल थे। सम्मेलन की आयोजन सेक्रेटरी डॉ. शिवांगी मेहता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।


सम्मेलन का मुख्य आकर्षण थीम संगोष्ठी रही, जिसका नेतृत्व डॉ. अजीत सिदाना, एचओडी मानसिक रोग विभाग, जीएमसीएच चंडीगढ़ व सम्मेलन के ओर्गनइजिंग प्रेजिडेंट ने किया। उनके साथ डॉ. गुरविंदर पाल सिंह (एम्स, बठिंडा); डॉ. शुभ मोहन सिंह (पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़); और डॉ. अमृत पट्टोजोशी (एम्स भुवनेश्वर) शामिल थे। इस सत्र में स्किज़ोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे गंभीर मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए नई और समग्र सहायता विधियों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने  ‘डीएआरटी  मॉडल पर विस्तार से चर्चा की, जो पिछले एक दशक से चंडीगढ़ में बाहरी  रोगी पुनर्वास सेवाएं प्रदान कर रहा है। डॉ. सिदाना ने डिसेबिलिटी असेसमेंट, रिहैबिलिटेशन एंड ट्रायेज (डीएआरटी) सेवाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें डे केयर सेंटर, वोकेशनल ट्रेनिंग, सोशल स्किल्स ट्रेनिंग, न्यूरोकॉग्निटिव रिहैबिलिटेशन, फॅमिली इंटरवेंशन, और पीयर सपोर्ट ग्रुप जैसी सेवाएं शामिल हैं। डेढ़ दिवसीय वैज्ञानिक कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों द्वारा कई संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, आमंत्रित व्याख्यानों, पुरस्कार सत्रों और शोधपत्र प्रस्तुतियों को शामिल किया गया। डॉ. राजेश सागर ने भाषण दिया, और डॉ. एन.एन. विग व्याख्यान डॉ. रूप सिदाना द्वारा प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन में डॉ. जी.डी. कूलवाल पुरस्कार, डॉ. आर.के. सोलंकी पुरस्कार, और बीपीएसएसजे पुरस्कार जैसे विभिन्न पुरस्कार सत्रों का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त पोस्टर सेशन और फ्री पेपर प्रेजेंटेशन  ने छात्रों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन में देश भर से 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे यह सम्मेलन वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध और अत्यंत सफल रहा।