Wednesday, March 11, 2026
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ट्राईसिटी सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने अक्टूबर में जन्मे वरिष्ठ नागरिकों का जन्मदिन खुशी के साथ मनाया

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चंडीगढ़। ट्राईसिटी सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने सेक्टर 33 स्थित कम्युनिटी सेंटर में अक्टूबर माह में जन्मे वरिष्ठ नागरिकों का जन्मदिन बड़े उत्साह  के साथ मनाया। यह मासिक आयोजन एसोसिएशन के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के बीच सामाजिक जुड़ाव और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना है। इस मौके पर ट्राइसिटी के विभिन्न इलाकों से आए वरिष्ठ सदस्यों ने ज्ञानवर्धक सत्रों, मनोरंजक गतिविधियों और आपसी संवाद से भरे खुशनुमा दोपहर का आनंद लिया।कार्यक्रम की शुरुआत केक-कटिंग समारोह से हुई, जहां अक्टूबर में जन्मे सदस्यों को सभी ने तालियों और शुभकामनाओं के साथ बधाई दी। इसके बाद तंबोला और मनोरंजक खेलों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया, जिससे सभी के चेहरों पर मुस्कान और एकता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा वित्तीय जागरूकता सत्र, जिसे सुरिंदर वर्मा, चेयरमैन, सिटिजन अवेयरनेस ग्रुप और प्रसिद्ध वित्तीय विशेषज्ञ ने संबोधित किया।

उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित बैंकिंग, निवेश सुरक्षा, डिजिटल फ्रॉड से बचाव तथा सरकार और बैंकों की वरिष्ठ नागरिकों हेतु योजनाओं के बारे में उपयोगी जानकारी दी। उनका संवादात्मक सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ, जिसमें उन्होंने वित्तीय सुरक्षा और जागरूक निर्णय लेने के व्यावहारिक सुझाव साझा किए। इसके बाद स्वास्थ्य जागरूकता वार्ता आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने सर्दियों के मौसम में वरिष्ठ नागरिकों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पौष्टिक आहार, हल्के व्यायाम, जोड़ों के दर्द, सर्दी-खांसी और मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों पर चर्चा की। डॉक्टरों ने दैनिक दिनचर्या, पानी पीने की आदत और नियमित स्वास्थ्य जांच की अहमियत पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में सामुदायिक लंच का आयोजन किया गया, जिसने आपसी मेलजोल और मित्रता के रिश्तों को और मजबूत किया। इस अवसर पर राजिंदर कौर निम्मी सहदेव, अध्यक्ष, ट्राईसिटी सीनियर सिटिज़न्स एसोसिएशन ने सभी सदस्यों के उत्साहपूर्ण सहभाग और अतिथि वक्ताओं के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन भविष्य में भी ऐसे मासिक आयोजनों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में आनंद, जागरूकता और सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित करती रहेगी।

छट पूजा पर पुरुषोत्तम दास रूंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित किया अन्न भंडारा, व्रतधारियों ने खोला व्रत

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पंचकूला । छट पूजा के अवसर पर पुरुषोत्तम दास रूंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अन्न भंडारा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-1, पंचकूला में भक्ति और सेवा भाव से आयोजित किया गया। भंडारे की शुरुआत भगवान सूर्य देव और माता छठी माई के नाम से हुई, जिसके बाद सैकड़ों जरूरतमंदों और राहगीरों को प्रसाद स्वरूप भोजन वितरित किया गया। इस अवसर पर व्रतधारी महिलाएं भी उपस्थित हुईं और भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोला।यह ट्रस्ट का 188वां भंडारा था । ट्रस्ट के संस्थापक एवं समाजसेवी अमिताभ रूंगटा ने इस अवसर पर कहा कि छट पूजा सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। इस दिन की सुबह भक्त उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और अपने परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अन्न भंडारा सेवा इसी भावना का हिस्सा है, जिसमें हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समाज का कोई भी वर्ग भूखा न रहे। इस सेवा के माध्यम से हम सामूहिक कल्याण, परस्पर सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। विशेषकर ऐसे दिनों में जब श्रद्धालु उपवास और पूजा में संलग्न रहते हैं, तो भंडारा उनके लिए आशीर्वाद और प्रेरणा दोनों का स्रोत बनता है। भंडारे के आयोजन में अनुपमा रूंगटा, चैतन्य रूंगटा, सुरेश जांगड़ा और निधि संधु विशेष रूप से उपस्थित रहे और ट्रस्ट के सदस्यों के साथ सेवा कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

गोपाष्टमी महोत्सव पर मात पिता गोधाम महातीर्थ में 2000 देसी घी के दीपक जलाए जाएंगेपंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि होंगे

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मोहाली । मोहाली जिले में बनूड़ अंबाला रोड स्थित मात पिता गोधाम महातीर्थ में गोपाष्टमी महोत्सव 30 अक्टूबर गुरुवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एवं बॉलीवुड अभिनेता व निर्माता विजय टंडन तथा अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन (हरियाणा) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमोहन गर्ग विशिष्ट तथा विशेष अतिथि के तौर पर समाज सेवी सत्यभगवान सिंगला,अध्यक्ष सनातन धर्म बैकुंठ धाम प्रदीप गोयल ,फाउंडर पलैनट आर्युवेदा डॉक्टर विक्रम चौहान मौजूद होंगे।इस अवसर के दौरान भक्तों द्वारा 2000 से अधिक देसी घी के दीपक जलाए जाएँगे।मात पिता गोधाम महातीर्थ के मुख्य सेवादार गोचर दास ज्ञान ने कहा कि इस कार्यक्रम में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, चंडीगढ़ ,मध्य प्रदेश और दिल्ली से बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान सुबह से रात्रि तक गौ माता का पूजन किया जाएगा ।हवन दोपहर 1 से 1.30 बजे के बीच होगा व प्रसाद दोपहर 1.30 से 2.30 बजे के बीच होगा। दोपहर 3 से शाम 7.30 बजे तक भजन कीर्तन का आयोजन होगा । गोमाता की भव्य आरती शाम 7 बजे होगी और उसके बाद भंडारा शुरू होगा।इस मौके पर महातीर्थ के ट्रस्टी बिशेश्वर नाथ शर्मा अमरजीत बंसल,सुरनेश सिंगला, कश्मीरी लाल गुप्ता, मामन राम गर्ग,जयगोपाल बंसल,दीपक मित्तल तथा कमेटी मेंबर सूरत वालिया,सुरेश बंसल,सुभाष सिंगला,पंकज जायसवाल,हीरेंद्र बुद्धिराजा,कुलदीप ठाकुर सुभाष अग्रवाल,बबू ,कपिल आदि मौजूद होंगे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय गो कथा वाचक चंद्रकांत और भजन गायक हित शरण सिद्धार्थ भईया अपनी कथा और भजनों से गौ माता के भक्तों को मंत्रमुग्ध करेंगे ।इस मौके पर नंदिनी गौ माता की तपोस्थली मात पिता गौधाम महातीर्थ का पूरा क्षेत्र दिवाली की तरह जगमगा उठेगा।,मात पिता गौधाम महातीर्थ मंदिर की खास बात यह है कि इसकी पहचान विश्व स्तर पर स्थापित हो चुकी है। वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक (लंदन) में माता पिता गोधाम महातीर्थ मंदिर को दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर होने का दर्जा दिया गया है, जिसके मंदिर में किसी भी देवता की मूर्ति नहीं है, लेकिन यहां अपने माता पिता के साथ आ कर उनकी और जिनके माता पिता इस दुनिया में नहीं हैं उनको ज्योति स्वरूप में याद किया जायेगा ।अपने विचार साझा करते मात पिता गोधाम महातीर्थ के संस्थापक गौचर दास ज्ञान ने कहा के मात पिता गोधाम महातीर्थ स्थल आज एक रूहानी केंद्र के तौर पर विकसित हो रहा है। इस तीर्थ स्थल में जहां गौ माता से प्यार करने की शिक्षा मिल रही है वहीं घर-घर में माता-पिता का सम्मान किए जाने का संदेश पहुंचाया जा रहा है। इस संस्थान की तरफ से दिए जाने वाला संदेश आज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत है। इसी के साथ हम अपनी संस्कृति को बचा सकते हैं ।

मैक्स अस्पताल बठिंडा ने कैंसर सर्वाइवर को सम्मानित किया

बठिंडा । मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, बठिंडा में स्तन कैंसर जागरूकता माह के उपलक्ष्य में मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कैंसर सर्वाइवर को सम्मानित किया गया। सर्वाइवर को उनके साहस, हिम्मत और कैंसर के खिलाफ लड़ने की उनकी प्रेरक यात्रा के लिए सम्मानित किया गया है।मैक्स की इस पहल का उद्देश्य कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शीघ्र पता लगाने, समय पर उपचार और भावनात्मक समर्थन के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना था।इस कार्यक्रम ने आशा और उपचार की कहानियों का जश्न मनाने के लिए कैंसर सर्वाइवर के परिवारों, ऑन्कोलॉजिस्ट और हेल्थ केयर प्रोफेशनल को एक साथ लाया।इस अवसर पर बोलते हुए, मैक्स हॉस्पिटल, बठिंडा में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. राजेश वशिष्ठ ने कहा कि हमें उन लोगों के साथ खड़े होने पर गर्व है जिन्होंने कैंसर से लड़ाई की और उस पर काबू पाया। कैंसर को हराने की उनकी कहानियां और साहस भरी यात्रा देखभाल और सामुदायिक आउटरीच के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रेरित करती है।मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नेहा गुप्ता ने कहा कि कैंसर सर्वाइवर प्रारंभिक जांच, चिकित्सा प्रगति और अटूट इच्छाशक्ति की शक्ति का प्रमाण है। इस महीने हमारा लक्ष्य सिर्फ जागरूकता बढ़ाना नहीं है, बल्कि हर महिला को नियमित जांच और स्तन स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता देने के लिए भी प्रोत्साहित करना है।कार्यक्रम में कैंसर जागरूकता वार्ता और प्रिवेंटिव केयर और सेल्फ- इग्ज़ैमिनेशन तकनीकों पर इंटरैक्टिव सेशन का भी आयोजन किया गया ।

भारत में हर साल 1.5 से 2 मिलियन नए ब्रेन स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं: डॉ. संदीप शर्मा

चंडीगढ़ । विश्व स्ट्रोक दिवस की पूर्व संध्या पर, ब्रेन स्ट्रोक और इसके नवीनतम उपचार विकल्पों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, पार्क हॉस्पिटल मोहाली के विशेषज्ञों की एक टीम ग्रुप डायरेक्टर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डॉ. संदीप शर्मा, कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव धवन, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संगीता प्रधान और कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी डॉ. अनिल सोफत ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्ट्रोक पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।पार्क हॉस्पिटल्स उत्तर भारत का सबसे बड़ा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क है जिसमें 19 अस्पताल, 3500 बेड, 800 आईसीयू बेड, 14 कैथ लैब, 45 मॉड्यूलर ओटी और 1000 से अधिक डॉक्टर हैं।ग्रुप डायरेक्टर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक दुनिया भर में नई महामारी के रूप में उभर रहा है, जिसमें हर साल भारत भर में 1.5 से 2 मिलियन नए ब्रेन स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं। वास्तविक संख्या अधिक होना तय है, क्योंकि इनमें से कई रोगी कभी भी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक नहीं पहुंचते हैं। भारत में हर दिन लगभग 3000-4000 ब्रेन स्ट्रोक होते हैं और जिसमें 2% से 3% रोगियों को ही उपचार मिल पाता है।उन्होंने बताया कि वर्ल्डवाइड प्रति वर्ष 100,000 की जनसंख्या पर ब्रेन स्ट्रोक की दर 60-100 है, जबकि भारत में यह प्रति वर्ष 145-145 मामलों के करीब है । वैश्विक स्तर पर ब्रेन स्ट्रोक के कुल रोगियों में 60 प्रतिशत भारत में हैं।डॉ. संदीप शर्मा ने आगे बताया कि भारत में बढ़ती घटनाओं का कारण बीमारी और रोकथाम के तरीकों के बारे में जागरूकता की कमी है। ब्रेन स्ट्रोक सालाना एड्स, तपेदिक और मलेरिया के कारण होने वाली मौतों की तुलना में अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं और फिर भी यह एक साइलेंट महामारी बनी हुई है।कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संगीता प्रधान ने बताया कि अब एक नई तकनीक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के कारण, जो अब पार्क हॉस्पिटल मोहाली में उपलब्ध है, ब्रेन स्ट्रोक रोगियों का इलाज चुनिंदा मामलों में 24 घंटे तक किया जा सकता है। इस तकनीक में क्लॉट को या तो एस्पिरेटेड किया जाता है या दिमाग को खोले बिना स्टेंट की मदद से दिमाग से बाहर निकाला जाता है।उन्होंने यह भी साझा किया कि पार्क हॉस्पिटल ने 500 से अधिक सफल न्यूरो इन्टर्वेन्शन किए हैं।डॉ. अनिल सोफत ने बताया कि हाल ही में अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन ने भी अपने दिशानिर्देशों को संशोधित किया है और ब्रेन स्ट्रोक रोगियों के लिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी उपचार की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि केवल अस्पताल पहुंचना पर्याप्त नहीं है, ब्रेन स्ट्रोक के लिए तैयार अस्पताल तक पहुंचने की जरूरत है।कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव धवन ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि समय बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रेन स्ट्रोक के बाद हर मिनट, 1.90 मिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं मर जाती हैं। इसलिए, रोगियों को जल्द से जल्द निकटतम उपचार केंद्र में पहुंचाया जाना चाहिए। एक अस्पताल में व्यापक ब्रेन स्ट्रोक देखभाल के लिए, आपातकालीन चिकित्सकों, न्यूरोलॉजिस्ट, इंटरवेंशनल न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट और क्रिटिकल केयर चिकित्सकों की एक बहु-विषयक टीम जरूरी है।“ब्रेन स्ट्रोक को रोकने के लिए हेल्थ टिप्स :· रक्तचाप बनाए रखें· वजन कम करें· अधिक व्यायाम करें· शराब का सेवन कम मात्रा में करें· बेबी एस्पिरिन लें· एट्रियल फाइब्रिलेशन का इलाज करें· मधुमेह को नियंत्रित करें· धूम्रपान न करें· ब्रेन स्ट्रोक के बारे में जागरूक रहें· स्वस्थ बीएमआई और कमर-टू-हिप-रेश्यो को बनाए रखें ।

महापर्व छठ पूजा से सामाजिक समरसता,सौहार्द्र और सदाचारी जीवन का संदेश मिलता है : प्रभुनाथ शाही

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चंडीगढ़ । भारत ही नहीं विदेशों में भी बसे पूर्वांचल परिवारों में दीपावली के बाद से ही लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारी शुरू हो जाती हैं और सदाचार तथा सात्विक दिनचर्या के साथ छठ मैया के लोकसंगीत की धुन घर घर में गूंजने लगती है।पिछले 25 अक्टूबर से चल रहे इस महापर्व में आज सायंकाल डूबते सूर्य को छठव्रती अर्घ्य देगें और छठ मैया से विश्व कल्याण की कामना करेंगे। इस पावन अवसर पर पूर्वांचल परिवार शुभचिंतक पर्यावरण सेवक प्रभुनाथ शाही ने बताया कि छठ पूजा से सामाजिक समरसता,सौहार्द्र और सदाचारी जीवन का संदेश मिलता है।उन्होंने इस पूजा की प्राचीन एवं पुरातन परम्परा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में यह एक अद्वितीय एवं अद्भुत पर्व है,जिसमे किसी प्रकार के भेदभाव और कर्मकांड की जरूरत नहीं है।

एक साधारण समर्पित भक्त अपने पवित्रता और सात्विकता के साथ उपासना के बल पर अपने आराध्य का दर्शन प्रकृति के बीच अस्त और उदय होते हुए सबके कल्याण के भावना करता है और सच्चे अर्थ में वसुधैव कुटुंबकम् का मंत्र परिलक्षित होता है।इस पूजा में अद्भुत प्रकृति प्रेम और प्राकृतिक वस्तुओं के प्रयोग का समागम दिखता है तथा जल संरक्षण,सौर ऊर्जा के उपयोग से लेकर स्वच्छता के साथ पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन का पवित्र संदेश मिलता है। शाही ने बताया कि उनकी धर्मपत्नी रीमा प्रभु पिछले सत्रह वर्षों से चंडीगढ़ में छठ पूजा सेक्टर 42 सन लेक से करती हुई आ रही है लेकिन कोरोना काल से अपने निवास पर सेक्टर 47 में इष्ट मित्रों के साथ करती है क्योंकि बार बार घाट नहीं बदला जाता है। अंत में शाही ने इस पर्व पर लोगों को अश्लील भोजपुरी गानों से बचते हुए इस पर्व की पवित्रता को बनाए रखने का आग्रह किए।

‘स्ट्रोक पे रोक’ अभियान: एफ.ए.एस.टी. को पहचानें, जीवन बचाने के लिए तेजी से कार्य करें – डॉ. प्रो. विवेक गुप्ता

मोहाली । हर साल, लाखों लोग मस्तिष्क स्ट्रोक के अचानक और जीवन-परिवर्तनकारी प्रभाव का सामना करते हैं। फिर भी, जोखिमों के बावजूद, हममें से कई लोग समय पर चेतावनी संकेतों को पहचानने में असफल रहते हैं। आज, हम इसे बदलने का लक्ष्य रखते हैं। स्ट्रोक के मामले में हर मिनट मायने रखता है। मैं यहां कुछ ऐसा साझा करने के लिए हूं जो यह बदल सकता है कि हम स्ट्रोक आपात स्थितियों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं—और सचमुच, जीवन बचा सकते हैं। “स्ट्रोक पे रोक” जागरूकता अभियान का ध्यान स्ट्रोक के लक्षणों को तेजी से पहचानने और मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी की जीवन-रक्षक क्षमता को उजागर करने पर केंद्रित है। डॉ. प्रो. विवेक गुप्ता, एडिशनल डायरेक्टर, न्यूरोइंटरवेंशन और डायरेक्टर न्यूरो कैथलैब, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली, ने कहा “स्ट्रोक किसी को भी, किसी भी समय हो सकता है। मुख्य बात है तुरंत कार्य करना। जितनी जल्दी मरीज को चिकित्सकीय सहायता मिलती है, पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
Face drooping (चेहरा झुकना) – क्या व्यक्ति के मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा ढीला पड़ जाता है?
Arm weakness (भुजा में कमजोरी) – क्या एक हाथ उठाने या स्थिर रखने में असमर्थ है?
Speech difficulty (बोलने में कठिनाई) – क्या शब्द अस्पष्ट या तुतलाहट भरे हैं?
Time (समय) – तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें। यह सरल परीक्षण केवल एक त्वरित जांच नहीं है—यह समय के खिलाफ एक दौड़ है। जितनी जल्दी स्ट्रोक की पहचान होती है, उतनी ही जल्दी मरीज को उन्नत देखभाल मिल सकती है। “स्ट्रोक पे रोक” सिर्फ एक नारा नहीं है—यह एक आह्वान है। परिवारों, दोस्तों और समुदायों के लिए: संकेतों को समझें, आपात स्थिति की गंभीरता को पहचानें, और मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी जैसी तेज़ उपचार विधियों का समर्थन करें। याद रखें, स्ट्रोक के मामले में समय ही सब कुछ है। इंतज़ार न करें—संकेतों पर ध्यान दें और बिना देर किए कार्य करें।

महापर्व छठ पूजा में खरना शुद्धता,पवित्रता और समर्पण के साथ भक्ति का प्रतीक : प्रभुनाथ शाही

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चंडीगढ़ । सनातन परंपरा में लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा का विशेष महत्व है।इस चार दिवसीय महापर्व में छठव्रती सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा करते हैं।यह पूजा पूर्ण रूप से सादगी और सात्विकता के साथ प्रकृति तथा पर्यावरण के संरक्षण को समर्पित है। छठव्रती रीमा प्रभु ने बताया कि कल नहाए खाए से विश्व कल्याण की कामना के साथ चार दिवसीय सूर्य उपासना के महाव्रत की शुरुआत करने के बाद आज सायंकाल पवित्रता और शुद्धता के साथ खरना के प्रसाद में गुड़,दूध और चावल की खीर तथा गेहूँ के आटा से बनी देशी घी लगी रोटी तैयार कर छठी मैया और सूर्यदेव के आराधना और प्रसाद अर्पण के बाद प्रसाद ग्रहण कर अगले 36 घंटे के निर्जला कठोर व्रत की शुरुआत होगी तथा सभी परिवारजनों एवं शुभचिंतकों को मंगलकामना के साथ खरना का प्रसाद वितरित किया जाएगा । जय मधुसूदन जय श्रीकृष्ण फाउंडेशन के संस्थापक एवं पूर्वांचल परिवार शुभचिंतक पर्यावरण सेवक प्रभुनाथ शाही ने बताया कि खरना का अर्थ होता है शुद्धता और इस दिन शुद्धता तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हुए अगले निर्जला व्रत के निर्विघ्न पूर्ण होने की कामना की जाती है। खरना का दिन छठी मैया के आगमन,भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।खरना के दिन छठव्रती के घर छठी मैया का शुभ आगमन होता है और छठी मैया अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।खरना के बाद छठव्रती कठिन निर्जला व्रत के लिए मानसिक और आध्यात्मिक रूप से तैयार होती है।खरना के दिन के खीर प्रसाद का विशेष महत्व है और इसे रसियाव भी कहा जाता है।यह प्रसाद शुद्धता और सुखमय जीवन का प्रतीक है तथा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होता हैं।
अगले दिन गेहूँ के आटा और गुड़ से देशी घी में ठेकुआ तैयार किया जाता है और यह महाप्रसाद,केला एवं अन्य फल छठी मैया और सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है।

लक्कड़बग्गे : सच्ची घटनाओं पर आधारित सीरीज़ ने खोला सिस्टम का काला सच

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चंडीगढ़। ‘लक्कड़बग्गे’, एक ऐसी सीरीज़ है जिसने पेपर लीक स्कैम्स और भ्रष्टाचार की सच्चाई को बेखौफ़ तरीके से उजागर किया है। युवा निर्देशकों परम रियार और हृषभ शर्मा के निर्देशन में बनी यह सीरीज़ उन सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, जिनमें एक लीक हुआ पेपर हज़ारों छात्रों के भविष्य को तबाह कर देता है।

कहानी दिखाती है कि कैसे रिश्वत, लालच और सत्ता की साज़िशें शिक्षा व्यवस्था को भीतर से खोखला कर देती हैं।सीरीज़ में गुरप्रीत रटौल, रीत कौर, अवर बरार, जोध अंट्टल, अजीत सिंह और अन्य कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय से पात्रों को जीवंत बनाया है। इसे लिखा है हृषभ शर्मा ने, जबकि निर्माण सुमीत सिंह और अरमान सिद्धू ने किया है। ‘लक्कड़बग्गे’ अब छह भाषाओं पंजाबी, हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, तेलुगू और मलयालम में उपलब्ध रहेगी।ज्ञात रहे कि केबलवन ने सागा स्टूडियोज़ की साझेदारी से इस सीरीज़ के ज़रिए मनोरंजन जगत में एक नई दिशा दी है।

मैक्स में हुआ 48 वर्षीय महिला के चेहरे की अनियंत्रित ट्विचिंग डिसऑर्डर का सफल इलाज

मोहाली । ‘हेमीफेशियल स्पाज्म’ के एक जटिल और दुर्लभ मामले से पीड़ित 48 वर्षीय महिला को हाल ही में मैक्स अस्पताल, मोहाली में सफल सर्जरी के बाद इस समस्या से छुटकारा मिला।महिला तीन महीने से ज़्यादा समय से अपने चेहरे के दाहिने हिस्से में लगातार, अनियंत्रित ट्विचिंग (ऐंठन/ फड़कन) डिसऑर्डर का अनुभव कर रही थी। यह डिसऑर्डर, जो उसकी आँखों के आसपास की मांसपेशियों को प्रभावित करती थी , उसके पूरे दाहिने चेहरे तक फैल गई थी व काफी असुविधा और भावनात्मक परेशानी का कारण बन रही थी। कई अन्य जगहों पर परामर्श के बावजूद, लक्षण बने रहे, जिससे महिला को एक्सपर्ट देखभाल लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।सीनियर डायरेक्टर न्यूरोसर्जरी, ब्रिगेडियर डॉ. एच.एस. भटोई ने बताया कि मैक्स अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि उसे प्राइमरी हेमीफेशियल स्पाज्म है, जो चेहरे की फेशियल नर्व में इरिटेशन के कारण होने वाली एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है।डॉ. भटोई ने आगे बताते हुए कहा कि इस स्थिति का कारण आमतौर पर इडियोपैथिक पाया जाता है, अर्थात यह वंशानुगत नहीं है या किसी अंडरलाइंग बीमारी से जुड़ा नहीं है।“इस मामले में, हमने फेशियल नर्व के वैस्कुलर कम्प्रेशन के मूल कारण की पहचान की और प्रभावित वेसल को अलग करने के लिए एक डेलिकेट माइक्रो वैस्कुलर डिकम्प्रेशन किया। महिला अब दर्द और ट्विचिंग से पूरी तरह मुक्त है,” डॉ. भटोई ने कहा।