चंडीगढ़ (हरजिन्दर सिंह, सोनू) । सिटी ब्यूटीफुल के सेक्टर – 43 स्थित एक निजी होटल में आयोजित सम्मान समारोह में चंडीगढ़ के नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी का सांसद बनने पर सम्मान किया गया। चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट संगठन के प्रधान कमल गुप्ता व जनरल सेक्रेटरी जितेंद्र सिंह , चेयरमैन तरलोचन बिट्टू, वाइस चेयरमैन विक्रम चोपड़ा , चीफ पैट्रन सुरिंदर सिंह सहित संगठन के सभी पदाधिकारी व मेंबर मौजूद रहे और संगठन ने शेयर वाइस रजिस्ट्री की रोक , शेयर होल्डर के विदेश जाने पर जीपीए का प्रवधान, ब्लड रिलेशन में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जीपीए पर लगाई जा रही 3 परसेंट ड्यूटी व सेस को लेकर अन्य सभी मांगों से सांसद को अवगत कराया । कमर्शियल व इंडस्ट्रियल लीजहोल्ड से जल फ्री होल्ड पर आये ताजे फरमान पर भी विरोध उठने पर मनीष तिवारी ने बताया कि मुद्दे की गहन जानकारी लेकर इस पर भी एक्शन लिया जाएगा। सांसद मनीष तिवारी ने आश्वासन देते हुए संगठन के सदस्यों को बताया कि चुनाव से पहले से ही वह उनसे वादा कर चुके हैं की शहर की सभी ज्वलंत समस्याओं का हल वह येन केन प्रकरण अवश्य निकालेंगे और यह वादा बरकरार रहेगा और संसद में 22 जुलाई से हो रहे सैशन में भी शहर की समस्याओं की आवाज गूंजेगी यह उनका वायदा है।
चंडीगढ़ (हरजिन्दर सिंह, सोनू)। जय मधुसूदन जय श्रीकृष्ण फाउंडेशन की ओर से फाउंडेशन के सहयोगी राजीव गुप्ता और रूबी गुप्ता के वैवाहिक वर्षगांठ के पावन अवसर पर देशी गऊ संरक्षण और संवर्धन केंद्र चिण्डियाला,मोहाली के कामधेनु वाटिका में मर्मज्ञ पंडित नारायण शास्त्री के मंत्रोचार के बीच पौधरोपण किया गया। कामधेनु वाटिका में आम,लीची,कटहल,चीकू,मौसमी,आडू, संतरा,आँवला,मोरिंगा और नीम के पौधे लगाये गए। इस गौशाला के संचालक पुनीत प्रसून शर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्ष पहले फाउंडेशन के सहयोग से कामधेनु वाटिका की शुरुआत की गई जिसके सभी पौधे शत प्रतिशत चल रहे है। फाउंडेशन के संस्थापक प्रभुनाथ शाही ने आग्रह किया कि हम सभी को अपने विशेष दिन पर पौधे लगाने चाहिए और बचाने चाहिए। वही इस खास दिन को विशेष बनाने के लिए रूबी और राजीव ने फाउंडेशन का धन्यवाद किया । अंत में पंडित नारायण शास्त्री ने विश्व कल्याण की भगवान के चरणों में प्रार्थना की ।
चंडीगढ़। फ़ायर एंड सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया , ग्लोबल एलायंस फॉर राइट्स एंड ड्यूटीज़ और इशरे चंडीगढ़ चैप्टर के संयुक्त प्रयास से सेक्टर 27 डी में विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 350 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में सत्य पाल जैन, पूर्व सांसद एवं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया मुख्य अतिथि के रूप में उपास्थि रहे और जैन ने त्रिवेणी रोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि चंडीगढ़ के पूर्व मेयर दवेश मोदगिल एवं विभिन्न धर्मों के प्रचारक निदेशक डॉन बॉस्को चर्च रेवरेंड फादर रेजी टॉम, सलाहकार राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग भारत सरकार अरुण मसीह एवं सदर-ए-जम्मत चंडीगढ़ सूफी मोहम्मद इम्तियाज साबरी ने पौधे लगाए।
इस अवसर पर सत्य पाल जैन ने कहा कि आज पूरा विश्व जल वायु परिवर्तन के असंतुलन की समस्या से जूझ रहा है। कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ के हालात बने हुए है, ऐसे में पर्यावरण संरक्षण हर व्यक्ति का धर्म बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया ने भारतीय संस्कृति को प्रामाणिकता से स्वीकार किया है जिसमें पेड पौधों को धर्म से जोड़ कर उनको पूजनीय इस लिये बनाया गया है ताकि हर व्यक्ति उसके महत्व को समझें, उससे स्वास्थ लाभ ले और उसका संरक्षण करे। ये भारतीय धार्मिक संस्कृति ही है जिसमें तुलसी, चन्दन, पीपल, नीम और बड़ के लाभ और महत्व का ज्ञान दिया है। आयुर्वेद विज्ञान में हज़ारों साल पहले ही भयानक संक्रमणों, बीमारियों का उपचार पेड पौधों और जड़ी बूटियों से करने के सिद्धांतो का वर्णन है। इसलिए हर व्यक्ति आज आने वाले कल को उज्जवल बनाने के लिए वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण में अपनी ज़िम्मेवारी निभाये।
जसजोत सिंह अलमस्त अध्यक्ष फायर एंड सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया चंडीगढ़ चैप्टर ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सत्यपाल जैन पूर्व सांसद, दवेश मौदगिल पूर्व मेयर, विजय शर्मा अध्यक्ष इशरे चंडीगढ़ चैप्टर, जतिंदर कपूर अध्यक्ष और प्रेम महेंद्रू महासचिव रोटरी चंडीगढ़, रोटारैक्ट क्लब ऑफ लेजिस सोशल के स्वयंसेवकों, शिखा निझावन अध्यक्ष आरडब्ल्यूए, लवलीन कौर प्रमुख सीएससीए पूर्वी चैप्टर और उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया।
चंडीगढ़ । हृदय रोग चिंताजनक दर से बढ़ रहे है। भारत में 20 और 30 वर्ष के युवाओं को हार्ट अटैक आ रहे हैं, बढ़ते मामले हृदय रोग विशेषज्ञोंं (कार्डियोलॉजिस्ट) के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। इस दिशा में निरंतर शोध जारी है। इसी कड़ी में हार्ट फाउंडेशन द्वारा लिवासा अस्पताल के सहयोग से कार्डियोलाजी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोधों की जानकारी साझा करने के लिए रविवार को चंडीगढ़ में एक शैक्षणिक कार्यक्रम सीआईआईएसटी360 का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के नामी 250 से ज्यादा कार्डियोलाजिस्ट व फिजिशियन ने अलग -अलग हृदय रोगोंं और इस बीमारी के ईलाज से जुड़ी नई नई तकनीकों पर मंथन किया। इस दौरान कुछ चुनिंदा केसों पर बात हुई। हार्ट फाउंंडेशन के संस्थापक संरक्षक और लिवासा अस्पताल के कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ एचके बाली ने कहा कि नई नई तकनीकें और दवाइयां आज लाखों हृदय रोगियों की जान बचा रही है। खासकर उन लोगों की जिनका हृदय सामान्य ढंग से काम नहीं करता है और पारंपरिक तारीकों से ईलाज नहीं किया जा सकता है। ऐसे मरीजों की एंजियोप्लासी के दौरान उनके हृदय में एक लघु पंप इम्पेला डाला जाता है, ताकि वह बेहतर परिणाम आ सके और वह तेजी से रिकवरी कर सकें। इसके साथ उन्होंंने आईवीयूएस या ओसीटी का उपयोग करके इमेज -गाइडिड एंजियोप्लास्टी के महत्व पर जोर दिया, जो बेहतर अल्पकालिक और दीर्घकालिक परिणाम प्रदान करता है। इसके साथ उच्च सर्जिकल जोखिम वाले बुजुर्ग रोगियों के लिए टीएवीआई (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) नामक परक्यूटेनियस तकनीक सुरक्षित है।
इस दौरान डॉ.एमके दास कार्डियोलॉजिस्ट, कोलकाता ने कहा कि हार्ट फेलियर के मामलों के रोगियों के और प्रंबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कई अस्पतालों में हृदय रोगियों से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए एआई का उपयो कर रही है । वहीं टीएस क्लेर कार्डियोलॉजिस्ट दिल्ली ने कहा कि अनियमित दिल की धड़कन (एट्रियल फाइब्रिलेशन) एक बहुत ही आम समस्या बनती जा रही है और यह स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। ऐसे रोगियों का इलाज अब संभव है, विशेषकर रोग की प्रारंभिक अवस्था में एब्लेशन प्रक्रियाओं से ईलाज किया जा सकता है। वर्तमान में उपलब्ध 3डी ईपी सिस्टम से एब्लेशन प्रक्रियाओं की सफलता में काफी वृद्धि हुई है। अरुण चोपड़ा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ने कहा कि हार्ट फेलियर वाले कई रोगियों को हृदय की कार्यप्रणाली में सुधार करने और उनमें अचानक हृदय गति रुकने से रोकने के लिए पेसमेकर की आवश्यकता होती है। चयनित रोगियों में ये उपकरण उनके लेफ्ट वेंट्रिकुलर कार्य को बेहतर बनाने में बहुत प्रभावी हो सकते है ।
चंडीगढ़ । प्लास्टिक सर्जरी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 15 जुलाई को प्लास्टिक सर्जरी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर डॉ. एबी प्रभु, कंसल्टेंट, कॉस्मेटिक, प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और डॉ. अखिल गर्ग प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली, ने प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े कुछ आम मिथकों का खंडन किया, और इस विशेषज्ञता में नवीनतम रुझानों के बारे में भी चर्चा की। डॉ. एबी प्रभु ने कहा कि पिछले एक दशक में प्लास्टिक सर्जरी की मांग लगातार बढ़ी है क्योंकि अधिक से अधिक लोग पिक्चर-परफेक्ट लुक के बारे में जागरूक हैं। कुल मिलाकर राइनोप्लास्टी, बॉडी कॉन्टूरिंग के लिए लिपोसक्शन, मेल गाइनेकोमेस्टिया लिपोसक्शन, 3 डी कॉन्टूरिंग के लिए फुल बॉडी लिपोसक्शन, फीमेल ब्रेस्ट रिडक्शन और आरगुमेंटेशन हेयर ट्रांसप्लांट जैसी कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं अक्सर किए जा रहे हैं और इसमें वृद्धि का रुझान दिख रहा है। डॉ. अखिल गर्ग ने कहा कि हां, निश्चित तौर पर मांग बढ़ रही है । लोग अधिक से अधिक जागरूक हो रहे हैं, विशेषकर अपनी शक्ल-सूरत के बारे में। सोशल मीडिया पर हर कोई अपना बेस्ट दिखना पसंद करता है। जो मामले हम देख रहे हैं वे रिकंस्ट्रक्शन और कॉस्मेटिक दोनों हैं। मरीजों को सामान्य जीवन जीने में मदद करने के लिए कैंसर और आघात के बाद रिकंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। स्तन बढाव और बॉडी स्कल्पटिंग जैसी कॉस्मेटिक सर्जरी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। डॉ. एबी प्रभु ने कहा कि आजकल पुरुष भी महिला समकक्षों की तरह अपने रूप को निखारने के लिए आगे आ रहे हैं। प्रक्रियाओं में वृद्धि का मुख्य कारण संभवतः सोशल मीडिया जागरूकता और बेहतर मार्केटिंग है। डॉ. अखिल गर्ग ने कहा कि लैंगिक अंतर काफी है। विश्व भर में और भारत में, कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की तलाश करने वाले अधिकांश मरीज महिलाएं हैं। हालाँकि, सबसे बड़ा बदलाव जो हमने देखा है वह है प्लास्टिक सर्जरी कराने वाले पुरुषों की संख्या में वृद्धि। पहले, प्लास्टिक सर्जरी करवाने वाले केवल मशहूर हस्तियां और मॉडल ही होते थे, लेकिन अब हम बहुत से युवाओं को गाइनेकोमेस्टिया (पुरुष स्तन) सुधार, नाक की सर्जरी और अन्य विकृतियों का सुधार करवाते हुए देख रहे हैं। डॉ एबी. प्रभु ने कहा कि हाइड्राफेशियल, लिक्विड या एक्वा फेसलिफ्ट, नाक के लिए थ्रेड एन्हांसमेंट, माइक्रो नीडलिंग रेडियोफ्रीक्वेंसी, पीआरपी थेरेपी जैसी न्यूनतम डाउनटाइम के साथ कई नाॅन-सर्जिकल शाॅर्ट लंचटाइम प्रक्रियाएं भी ओपीडी में अक्सर की जा रही हैं।
डॉ. अखिल गर्ग ने कहा कि टेक्नोलाॅजी के विकास के साथ, उन लोगों के लिए नाॅन-सर्जिकल विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है जो सर्जरी से डरते हैं या इसके लिए तैयार नही हैं। इनमें चेहरे के लिए बोटॉक्स और फिलर्स से लेकर, नाॅन-सर्जिकल स्किन कसने और फैट कम करने की तकनीकें शामिल हैं। ये अलग हैं क्योंकि इनमें एनेस्थीसिया या अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है, इन्हें डॉक्टर के आफिस में किया जा सकता है और मरीज इसके बाद घर जा सकता है। हालांकि, ये हल्के से मध्यम विकृति के लिए बेहतर हैं और इन्हें अनुभवी पेशेवर डाॅक्टर्स द्वारा किया जाना चाहिए। डॉ. एबी प्रभु ने कहा कि अनुभवी हाथों में प्लास्टिक सर्जरी का जोखिम न्यूनतम है और वृद्धि या पुनर्निर्माण करवाना व्यावहारिक रूप से सुरक्षित है। यदि कोई जोखिम है, तो उसे प्रक्रियाओं को चरणबद्ध करके काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. अखिल गर्ग ने कहा कि प्रौद्योगिकी और स्थापित प्रोटोकॉल में प्रगति के कारण, आजकल इनमें से अधिकांश प्रक्रियाएं बहुत सुरक्षित हैं। इन सर्जरी का जीवन की गुणवत्ता पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है क्योंकि ये रोगी आमतौर पर अपने रूप को लेकर बहुत कम आत्मविश्वासी या शर्मिंदा होते हैं और दूसरों से मिलने या बाहर जाने में अनिच्छुक होते हैं। ये सर्जरी उन्हें अपने जीवन को पुनः प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास और खुशी देती है। हालाँकि, किसी भी सर्जरी की तरह, प्लास्टिक सर्जरी भी जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है। कुछ सरल हो सकते हैं, जैसे वांछित परिणाम न मिलना, जबकि अन्य गंभीर हो सकते हैं, जैसे गंभीर संक्रमण और एनेस्थीसिया से संबंधित जटिलताएँ। यही कारण है कि सर्जरी से पहले जोखिमों, लाभों और अपेक्षाओं पर स्पष्ट रूप से चर्चा करने के अलावा, हमेशा एक अच्छी तरह से सुसज्जित अस्पताल या केंद्र में एक अच्छी तरह से योग्य प्लास्टिक सर्जन से ऑपरेशन करवाना आवश्यक है।
चंडीगढ़। चंडीगढ़ का खेल विभाग एक बार फिर से सवालों के घेरे में हे। स्पोर्ट्स प्लेयर्स पेरेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट आरडी अत्री के साथ अन्य अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि न तो खेल विभाग खेल के लिए काम कर रहा है और न ही खिलाड़ियों के लिए। इस मौके पर चंडीगढ़ की स्पोर्ट्स एडवाइजरी कमेटी के मेंबर एसके गुप्ता व कई पेरेंट्स मौजूद थे। आरडी अत्री ने कहा कि हमने कई जानकारी आरटीआई के माध्यम से एकत्रित की है। पहले सेक्टर-17 में फुटबॉल ग्राउंड था, जिसे अब तिरंगा पार्क बना दिया गया है। इसे करीब 11 करोड़ की लागत से बनाया गया और फुटबॉल का ग्राउंड छोटा कर दिया। पहले यहां पर राष्ट्रीय स्तर के मैच होते थे, लेकिन अब अभ्यास मैच भी नहीं हो सके। मैदान नियमानुसार नहीं है और यहां चोट का खतरा बना रहता है। इस मैदान को बदलने की पावर किसी के पास नहीं थी, लेकिन बावजूद इसका नक्शा बदल दिया गया। वहीं, दूसरा आरोप ये है कि विभाग ने हर तरह की सहूलियत खिलाड़ियों को देनी बंद कर दी है। पहले एक्सपोजर टूर दिए जाते थे और शिलारू में हाई-एल्टीट्यूड कैंप के लिए भी बच्चों को भेजा जाता था। दो सालों से ये पूरी तरह से बंद है और किसी तरह का मौका बच्चों को नहीं दिया जा रहा। न तो उन्हें ज्यादा कंपीटिशन मिलते हैं और न ही ऐसे टूर। चंडीगढ़ की एकेडमी ने हॉकी में कई ओलिंपियन और फुटबॉल में 50 से ज्यादा इंटरनेशनल खिलाड़ी दिए हैं।
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि खेल विभाग के पास 8 एकेडमी चल रही हैं और अधिकतर में बच्चे भी पूरे नहीं है। विभाग बच्चों को सिलेक्ट ही नहीं कर रहा, जिस वजह से लगातार वो जगह खाली पड़ी हैं। इन बच्चों को खेल के मैदान या स्कूल तक ले जाने के लिए सिर्फ एक ही बस है, ऐसे में कैसे एक बस सभी बच्चों को लेकर जा पाएगी। इससे चंडीगढ़ का प्रदर्शन गिर रहा है और खेलो इंडिया में चंडीगढ़ 18वें पायदान पर है, जबकि पहले चंडीगढ़ बेहतर था। उन्होंने ये भी कहा कि चंडीगढ़ की हालत ऐसी हो गई है कि एक भी मैदान फुटबॉल के लिए नहीं है। सेक्टर-42 में एकेडमी के बच्चे ही अभ्यास कर सकते हैं और सेक्टर-46 में 400 से ज्यादा बच्चे हैं। ऐसे में कैसे कोई अभिभावक अपने बच्चों को फुटबॉल के साथ जोड़ेगा। सेक्टर-7 का मैदान फुटबॉल के लिए दिया ही नहीं जाता और सेक्टर-46 के मैदान को पेरेंट्स की मदद से खेलने लायक बनाया जा रहा है। ये काम चंडीगढ़ के खेल विभाग का है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे, तो ही कुछ हो सकता है। पिछले कुछ समय में चंडीगढ़ ने खेलो इंडिया के लाखों रुपए लौटा दिए और उसका यूज ही नहीं किया। ये पैसा बच्चों के लिए आया था जिसे विभाग ने लौटा दिया। न तो चंडीगढ़ में डीएसओ के पद पर कोई है और बड़े अधिकारी व्यस्त इतने है कि काम नहीं हो पा रहा। ऐसे में नुकसान बच्चों का हो रहा है। इस मौके पर हॉकी चंडीगढ़ के सेक्रेटरी अनिल वोहरा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को हॉकी इंडिया ने नेशनल की मेजबानी दी है, जिसके मैच सितंबर में होने हैं। कई बार विभाग से जरूरी काम कराने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक इस दिशा में काम नहीं हुआ। किसी ने अभी तक चर्चा भी नहीं की है कि ये काम कब और कैसे कराना है। यहां के खिलाड़ी अच्छा करते हैं तो सभी को क्रेडिट मिलता है, तो उनके लिए काम सभी क्यों नहीं कर रहे।
चंडीगढ़ (हरजिन्दर सिंह, सोनू) । एमबीडी ग्रुप, जो भारत और विदेशों में संचालित शिक्षा, एडटेक, कौशल विकास, क्षमता निर्माण, निर्यात, आतिथ्य, खाद्य और पेय, मॉल, रियल्टी, डिजाइन और निर्माण, निवास और वाणिज्यिक स्थानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता, विश्वसनीयता और विशेषज्ञता का प्रतीक है, ने ‘लीगेसी लाइव्स ऑन’ थीम के अंतर्गत सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए अपना 79वां संस्थापक दिवस चंडीगढ़ में मनाया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर एमबीडी के दूरदर्शी संस्थापक, अशोक कुमार मल्होत्रा की उत्कृष्ट विरासत को याद किया गया। इतना ही नहीं यह अवसर उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों, अटूट समर्पण और लोगों को सशक्त बनाने की क्रांतिकारी अवधारणाओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। इसके साथ ही इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्षेत्रों के कर्मचारियों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया और उनके अटूट समर्पण को एमबीडी की सफलता का आधार माना गया।
एमबीडी समूह के 79वें स्थापना दिवस समारोह में विभिन्न सामाजिक जिम्मेदारी पहलों को अपनाया गया। कंपनी ने रेडिसन ब्लू एमबीडी होटल, नोएडा, रेडिसन ब्लू होटल एमबीडी, लुधियाना,और जलंधर व लुधियाना में स्थित एमबीडी नियोपोलिस मॉल, तथा प्रिंटिंग कारखानों में वृक्षारोपण के साथ पर्यावरणीय स्थिरता की वकालत की। कंपनी ने सीमापुरी में स्थित ‘जीजीविषा द ह्यूमेनिटी’ के बच्चों को शिक्षा संबंधी आवश्यक सामग्री वितरित की और स्थापित एमबीडी पुस्तकालय को विस्तारित करने का भी कार्य किया। लुधियाना में, कंपनी लगातार ‘निष्काम सेवा ट्रस्ट’ के साथ कार्य कर रही है और राशन वितरण के साथ-साथ निवासियों के लिए चाय के इंतजाम को देख रही है। कंपनी ने ‘डू गुड फाउंडेशन’ के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मेजबानी करके उनके लिए एक दिन के आतिथ्य, खेल और मनोरंजन की व्यवस्था करके समावेशिता को बरकरार रखने की सराहनीय कोशिश भी की। इसके अतिरिक्त, ‘आसोका’ के समर्थन से हम भारत के स्कूलों में उत्कृष्ट शैक्षिक उपकरणों और संसाधनों को ला रहे हैं। एमबीडी ग्रुप की अध्यक्ष सतीश बाला मल्होत्रा ने 79वें संस्थापक दिवस का उत्सव मनाते हुए कहा कि एमबीडी ग्रुप में रहते हुए, हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हमने अपने संस्थापक की विरासत के प्रति समर्पण दिखाते हुए शिक्षा को सभी तक पहुँचाने का उत्कृष्ट कार्य किया है। शिक्षा सशक्तिकरण और प्रगति का आधार है। हमारी सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से, हम समुदायों में खुशी और सहानुभूति फैलाने का प्रयास करते हैं, जो वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। एमबीडी ग्रुप की प्रबंध निदेशिका मोनिका मल्होत्रा ने कहा कि हम एमबीडी ग्रुप के 79वें स्थापना दिवस को हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं, जो हमारे उत्कृष्टता और नवाचार में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अवसर हमें हमारी उपलब्धियों पर विचार करने का अवसर देता है, जिसमें आसोका की निरंतर सफलता और हमारे विविध पोर्टफोलियो में विशेष प्रदर्शन शामिल हैं। हम आगे बढ़ते हुए, शिक्षा को बढ़ावा देने, प्रतिभा को पोषित करने और हर समुदाय में सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए, एमबीडी ग्रुप एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति का शुभारंभ करेगा, जिसमें कंपनी के संस्थापक मल्होत्रा जी के जीवन और मूल्यों पर प्रकाश डाला जाएगा। ये मूल्य एमबीडी समूह की अपने हितधारकों और समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता के आधार के रूप में काम करते रहेंगे। समूह ‘एमबीडी – माई बेस्ट डीड्स’ के माध्यम से अपनी सीएसआर गतिविधियों का नेतृत्व करता है, जो संसाधनों को उन लोगों के लिए सुलभ बनाने के मूल सिद्धांत पर आधारित है, जिन्हें उनकी आवश्यकता है। इसके अलावा, एमबीडी ग्रुप अशोक कुमार मल्होत्रा चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से अपने धार्मिक प्रयासों को बढ़ाता है। यह ट्रस्ट शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सशक्तिकरण प्रदान करने, विभिन्न स्कूलों में एमबीडी पुस्तकालय स्थापित करने, पुस्तकों और स्टेशनरी दान करने और अन्य कई परियोजनाओं का समर्थन करता है। एमबीडी ग्रुप की संयुक्त प्रबंध निदेशिका सोनिका मल्होत्रा कंधारी – ने कहा कि हम अपने 79वें स्थापना दिवस को बड़े गर्व के साथ मनाते हैं, जो हमारे संस्थापक पिता अशोक कुमार मल्होत्रा द्वारा स्थापित नवाचार और मूल्यों की स्थायी विरासत को दर्शाता है।। एमबीडी ग्रुप में, हम एक ऐसी कॉर्पोरेट संस्कृति का पोषण करते हैं, जो ऐसे सिद्धांतों को अपनाती है, जो हमें सभी प्रयासों में नवाचार और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करती है। जैसा कि हम आगे देखते हैं, हम उद्यमशीलता के उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे हम जिन समुदायों की सेवा करते हैं उनमें निरंतर विकास और सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित हो सके। “79वें स्थापना दिवस पर, एमबीडी ग्रुप ने अशोक कुमार मल्होत्रा की शाश्वत विरासत और प्रेरणास्पद आत्मा को याद किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
पंचकूला । कोई जरूरी नही की अन्न भंडारा आयोजित करने के लिए शुभ दिन या मुहूर्त निकला जाए, ये मानवता का कार्य है इसलिए भंडारा लगाने के लिए सभी दिन बराबर होते है। यह बात औद्योगिक क्षेत्र 1 में श्री श्याम करूणा फाउंडेशन द्वारा आयोजित 122वें अन्न भंडारे में फाउंडेशन के संस्थापक व समाजसेवी अमिताभ रुंगटा ने कही। रुंगटा ने कहा कि मानवता के काम के लिए किया गया अन्न दान महादान में गिना जाता है। किसी राहगीर या जरूरतमंद को भोजन परोसना ही धार्मिकता को चिन्हित करता है। लोगों को इस बारे में जागरूक होना चाहिए और अन्यों को जागरूक करना चाहिए। भंडारे के आयोजन के दौरान अनुपमा रूंगटा, चैतन्य रुंगटा, प्रगति, सुखपाल सिंह, सुरेश जांगरा भी उपस्थित थे।
करनाल (अरविन्द शर्मा)। भारत में औसतन साठ साल की आयु तक पहुंचते-पहुंचते पांच से दस प्रतिशत लोगों में हृदय का वाल्व सिकुडऩे की समस्या सामने आ रही है। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि उम्र के कारण होने वाली समस्या है। इसके उपचार के लिए अब चीर-फाड़ करके वाल्व बदलने की बजाए ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) और माइट्रल वाल्व क्लिपिंग जैसी नई वाल्व रिप्लेसमेंट प्रक्रिया बेहद कारगर सिद्ध हो रही है। यह जानकारी मेदांता अस्पताल गुरुग्राम में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ.रजनीश कपूर ने शनिवार को करनाल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दी। कपूर ने बताया कि हृदयघात के बाद हृदय वाल्व रोग हृदय रोग से होने वाली मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सीवीडी दुनिया भर में मृत्यु का प्रमुख कारण है, जो सालाना 17.9 मिलियन लोगों की जान लेता है। बढ़ती उम्र के परिणामस्वरूप वाल्वुलर हृदय रोग (वीएचडी) का प्रचलन दुनिया भर में बढ़ रहा है।
साठ की उम्र में पांच से दस प्रतिशत लोगों का सिकुड़ रहा है वाल्व
रुमेटिक हृदय रोग वाल्वुलर हृदय रोग का सबसे आम रूप है, जो लगभग 41 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है,इसके बाद कैल्सीफिक एओर्टिक स्टेनोसिस और डिजनरेटिव माइट्रल वाल्व रोग, क्रमश: 9 और 24 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि हम हर महीने 15 से 20 ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट कर रहे हैं,जो भारत में सबसे अधिक है। इनमें तीन से चार रोगी हरियाणा तो चार से पांच रोगी पंजाब से आ रहे हैं।
नॉन-सर्जिकल इंटरवेंशंस से मृत्यु दर में 21 प्रतिशत की कमी आई
उन्होंने कहा कि आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां उपचार में नॉन-सर्जिकल इंटरवेंशंस शुरू होने और बेहतर रोग जांच के बाद हृदय वाल्व रोग से आयु-समायोजित मृत्यु दर 21 प्रतिशत (8.4 से 6.6) कम हो गई। एओर्टिक स्टेनोसिस अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाता है तो तत्काल कार्डियक डेथ से मृत्यु हो सकती है। एओर्टिक स्टेनोसिस के लगभग 30 प्रतिशत रोगी सर्जरी के लिए अयोग्य हैं और मृत्यु की संभावनाएं बनी रहती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में वाल्व सिकुडऩे की समस्या 70 की उम्र में 10 से 15 प्रतिशत तथा 75 की उम्र में 20 से 25 प्रतिशत लोगों में देखी जा रही है। एक बार टीएवीआर तकनीक से वाल्व बदलने के बाद रोगी दस से 12 साल सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है
चंडीगढ़ । द हिड्न टैलेंट वेलफेयर एंड ट्रस्ट और सुर भारती संगीत एकेडमी की ओर से यादें सितारों की संगीतमयी शाम का ट्रस्ट की फाउंडर वीना सोफ्त के नेतृत्व में सेक्टर 18 स्थित टैगोर थियेटर में आयोजित किया गया। जिसमें ट्राईसिटी सहित पंजाब, हरियाणा से आए अव्यवसायिक गायकों ने हिस्सा लिया और एक से बढ़कर सदाबहार गानों को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। गायकों ने लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मो. रफी, आशा भसोले जैसे प्रतिष्ठत गायकों द्वारा गाये गए गानों को अपनी आवाज में प्रस्तुत करने का एक बेहतर प्रयास किया। कार्यक्रम में कुल 25 गाने व एक क्वाली शामिल थी। इस संगीतमय कार्यक्रम में ट्रस्ट की फाउंडर वीना सोफ्त, ट्रस्ट के सदस्य मोहित गुप्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों में कुलभूषण गोयल, रंजीता मेहता, जया गोयल, सोनिया सूद, मुकेश आनंद, उमेश सूद, रंजीत सिंह, परमजीत कौर उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरूआत गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर की गई जिसके उपरांत गायकों द्वारा सदाबहार फिल्मी गाने गाए गए । कार्यक्रम का आगाज करते हुए ट्रस्ट की फाउंडर वीना सोफ्त ने अपने गायन में सदाबहार गाना मैं तेरे इश्क में मर ना जाओ कहीं’ गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम को आगे बढाते हुए गायक मोहित गुप्ता ने दर्शकों के समक्ष क्वाली मुर्शिद खेले होली प्रस्तुत की, जिसे सभी ने खूब सराहा। अंबाला से आए जगत ने रुख से जरा नकाब उठा दो मेरे हुजूर, आरसी दास ने तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है,राजेश कंवर ने मंजिले अपनी जगह है,रास्ते अपनी जगह, अरिशा ने ये रातें या मौसम, राजीव राज और कल्पना ने खुलम खुला प्यार करेंगे हम दोनों,गीता ठाकुर ने बुहे बारिया ते नाले कंदा टप के,कर्नल बीके शर्मा ने जाने कहां गए वो दिन,डॉ दीपक कौशिक ने जुबान पे दर्द भारी दूरी चली, कुलदीप कुमार ने दीवाना लेके आया है दिल का तराना, संगीता नागपाल और अनुराधा ने तुमको पिया दिल दिया कितने नाज़ से,नैनसी और पल्वी ने छाप तिलक सब,इंदू और इशु ने ऐ कश किसी दीवाने को, रमेश उल्फत ने तंजील,सुभाष दाहुजा ने पल-पल दिल के पास तुम रहती हो,मोंटी राजा ने दर्दे दिल दर्दे जिगर, रणजीत गिल ने दीवाना हुआ बादल, बीडी सिंगला ने हुस्न से चाँद भी शरमाया है, रंजीतपुरी ने जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम, परमजीत सैनी ने तुझे क्या बता दिल रुबा,विमल ने कौन है जो सपनों में आया, संगीता शर्मा ने मेरा साया साथ होगा,जैसे मधुर व सदाबहार गानों को गाकर श्रोताओं को दिल जीत लिया और उन्हें झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा रंजीत सिंह और मुकेश आनंद ने भी गायक की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संगीत का प्रबंधन अरुण कांत द्वारा किया गया था। इस अवसर पर ट्रस्ट की फाउंडर वीना सोफ्त ने कार्यक्रम में आए सभी गणमान्य और श्रोतागणों का आभार जताया, और कहा कि कार्यक्रम का उदेश्य अव्यवसायिक गायकों को मंच प्रदान करना था, ताकि वे अपने अंदर के टैलेंट को उभार सके। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सदाबहार गानों को गाना प्रतिष्ठत गायकों को भाव पूर्ण श्रद्धांजलि देना भी था। वीना सोफ्त ने कहा कि ट्रस्ट व सुर भारती संगीत एकेडमी द्वारा करवाया गया यह आयोजन पहला है और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को आयोजन करवाता रहेगा।