Thursday, March 12, 2026
HomeEntertainmentप्राचीन कला केंद्र के 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत...

प्राचीन कला केंद्र के 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन का शुभारंभ 12 मार्च से

चंडीगढ़ । प्राचीन कला केंद्र द्वारा सेक्टर 27 स्थित प्रेस क्लब, चंडीगढ़ में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। यह पत्रकार वार्ता केंद्र के वार्षिक महोत्सव — 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन — के शुभारंभ की घोषणा के उद्देश्य से आयोजित की गई। यह त्रिदिवसीय सम्मेलन 12 से 14 मार्च 2026 तक टैगोर थिएटर में आयोजित किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में केंद्र की रजिस्ट्रार एवं वरिष्ठ कथक गुरु शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर, अतिरिक्त रजिस्ट्रार डॉ. समीरा कौसर तथा प्रोजेक्ट प्लानिंग मैनेजर पार्थ कौसर उपस्थित रहे और सम्मेलन की रूपरेखा के साथ-साथ केंद्र की भावी योजनाओं की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित यह सम्मेलन पिछले 54 वर्षों से निरंतर शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाता आ रहा है और इस वर्ष अपने 55वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 1969 से आरंभ हुए इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देश के लगभग सभी प्रमुख कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बना चुका है। यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक है कि भास्कर राव भाखले जी अपने जीवनकाल में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा में संगीत गुरु के रूप में कार्यरत रहे थे। उनकी पावन स्मृति तथा उनके समृद्ध सांगीतिक विरासत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु, केन्द्र द्वारा इस वर्ष पहली बार विश्वविद्यालय के सहयोग से 21 से 22 मार्च, 2026 तक वडोदरा में भी इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष भी सम्मेलन में देशभर के प्रख्यात एवं प्रतिभाशाली कलाकार अपनी सशक्त प्रस्तुतियाँ देंगे।

चंडीगढ़ के कला-प्रेमियों के लिए यह एक विशेष अवसर होगा, जब वे तीन दिनों तक शास्त्रीय गायन (गायन), वादन तथा नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे। सम्मेलन के प्रथम दिन राज्यपाल पंजाब एवं एडमिनिस्ट्रेटर यू टी चंडीगढ़ गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में पधार कर दीप प्रज्वलन करेंगे और समारोह का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। सम्मेलन के पहले दिन सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका इन्द्राणी मुख़र्जी शास्त्रीय गायन प्रस्तुत करेंगी जबकि प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना विदुषी विद्या सुब्रमणियम भरतनाट्यम नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देंगी। यह सम्मेलन न केवल स्थापित कलाकारों के लिए एक प्रतिष्ठित मंच है, बल्कि उभरती प्रतिभाओं को भी अपनी कला प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। प्राचीन कला केंद्र का यह प्रयास भारतीय शास्त्रीय कला की संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सशक्त पहल है। इस सम्मलेन में सभी कला प्रेमियों के लिए प्रवेश निशुल्क है। इस सम्मलेन में संगीत और नृत्य के अद्भुत संगम का अनुभव होगा। सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित पुरबायन चटर्जी युवा तबला वादक सत्यजीत तलवलकर के साथ सितार की मधुर स्वर लहरियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। ओडिसी नृत्यांगना शर्मीला बिस्वास अपने समूह के साथ सुरम्य नृत्य प्रस्तुत करेंगी। वहीं, जाने-माने बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार अपनी बांसुरी की सुरीली धुन के साथ प्रसिद्ध तबला वादक पंडित कुमार बोस संगत करेंगे। उत्कृष्ट तबला वादक पंडित नयन घोष अपने सुपुत्र श्री ईशान घोष के साथ दर्शकों के लिए मनमोहक तबला जुगलबंदी प्रस्तुत करेंगे। ये सभी कलाकार अपनी विविध कलाओं के अनूठे रंगों से इस सम्मलेन के गुलदस्ते को सजाकर इसे एक अविस्मरणीय अनुभव बना देंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments