चंडीगढ़। पंजाब की समृद्ध खान-पान की परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में ‘पंजाब दी रसोई – ट्रेडिशनल रेसिपीज, कलिनरी स्किल्स एंड फूड हेरिटेज ऑफ पंजाब’ पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक को यूटी प्रशासन के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (हॉस्पिटैलिटी) सरनिंदर सिंह बराड़ ने संकलित किया है। इसका विमोचन चंडीगढ़ प्रशासन में उनके पूर्व सहयोगी, प्रसिद्ध लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर और पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक अत्रे ने सोमवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित विशेष मीडिया संवाद के दौरान किया। यह पुस्तक बराड़ के खान-पान, खाना पकाने और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के प्रति लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव का परिणाम है। वर्ष 2010 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वे कनाडा चले गए, जहां उन्होंने पंजाबी खान-पान और इसकी समृद्ध परंपराओं को बढ़ावा देने का काम जारी रखा। खाना पकाने के प्रति उनका जुनून और अपने पेशेवर जीवन के दौरान पंजाब की जिन खाद्य परंपराओं को करीब से देखा, उन्हें सहेजने की इच्छा ने उन्हें इस पुस्तक को तैयार करने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर बराड़ ने कहा कि यह पुस्तक केवल व्यंजनों का संग्रह नहीं है, बल्कि पंजाबी रसोई से जुड़ी यादों, हुनर, परंपराओं और भावनाओं को सहेजने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भोजन पंजाब की पहचान, मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।‘पंजाब दी रसोई’ में पारंपरिक पंजाबी व्यंजनों के साथ उन्हें बनाने की विधि, जरूरी सामग्री और उसकी मात्रा, खाना पकाने की पारंपरिक तकनीक तथा पंजाब की खाद्य परंपराओं और रसोई से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को शामिल किया गया है। पुस्तक में पारंपरिक तरीकों, मसालों के सही इस्तेमाल, आंच पर नियंत्रण, धैर्य और भोजन को परोसने की कला पर भी ध्यान दिया गया है। बराड़ का मानना है कि रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं होती, बल्कि यह वह स्थान है जहां परिवार, समाज और परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं।पुस्तक का विमोचन करते हुए विवेक अत्रे ने हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के प्रति बराड़ के समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि पंजाबी व्यंजनों को भौगोलिक सीमाओं से आगे ले जाने और पंजाब की खान-पान की विरासत को सहेजने की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है। उनके अनुसार, यह पुस्तक बराड़ की व्यक्तिगत यात्रा के साथ-साथ पंजाब की समृद्ध पाक विरासत को संजोने के उनके निरंतर प्रयास को भी दर्शाती है।‘पंजाब दी रसोई’ का प्रकाशन व्हाइट फाल्कन पब्लिशिंग ने किया है।

