Wednesday, May 13, 2026
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कमल सिसोदिया द्वारा दिव्यांग एवं वंचित वर्गों के साथ जन्मदिन मनाया

13वीं बटालियन सीआरपीएफ ने तेरा-तेरा फाउंडेशन के सहयोग से लगाया शिवि

चण्डीगढ़ । 13वीं बटालियन सीआरपीएफ की कमांडेंट कमल सिसोदिया ने संवेदनशीलता और सामाजिक कल्याण की अपनी वैचारिक भावना का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपना जन्मदिन दिव्यांगजनों, बुजुर्गों एवं समाज के वंचित वर्गों के बीच मनाया और उन्हें हर स्थिति में प्रसन्नचित इश्वर के प्रति कृतज्ञ बने रहकर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उन्होंने गुलाटी भवन सेक्टर 33 चंडीगढ़ में जरुरतमंदो को व्हीलचेयर, चलने-फिरने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए कृत्रिम पैर, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एआई आधारित स्मार्ट चश्मे तथा श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए हियरिंग एड के साथ भोजन सामग्री का वितरण किया। इन प्रयासों का उद्देश्य उनकी जरुरतमंदो को आवश्यकतानुसार गतिशीलता, आत्मनिर्भरता, गरिमा और जीवन स्तर में सुधार लाने का है। यह पहल तेरा तेरा फाउंडेशन के सहयोग से संपन्न हुई, जिसके सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई और इस पुनीत कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिसोदिया प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन को समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के साथ मनाने की इस परंपरा को निरंतर निभाती आ रही हैं। वे एक संवेदनशील लेखिका एवं समर्पित समाज सेविका भी हैं, जो सतत समाज सेवा के कार्यों में संलग्न रहकर अनेक लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। उनका कार्य केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वे पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, राजस्थान, यूपी एवं मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने आत्मीयता के भाव से उनके दुख-दर्द को समझते हुए उन्हें कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस अवसर पर श्रीमती सिसोदिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुभवों ने उन्हें दिव्यांगजनों की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया है। उनका मानना है कि दिव्यांगजनों की सेवा करना ईश्वर की सेवा के समान है, क्योंकि जरुरतमन्दो की सेवा ही ईश्वरीय सेवा है जिसमे ईश्वर का वास होता है। इसी भावना के साथ वे निरंतर समाज सेवा के कार्यों में संलग्न रहती हैं। ऐसे प्रयास न केवल जरूरतमंदों को सीधा लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करते हैं कि वे अपने विशेष अवसरों को संवेदनशीलता, समावेशिता और सेवा भाव के साथ मनाएं एवं सेवा के प्रति तत्पर रहे।

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