चंडीगढ़ ट्राईसिटी में ‘युवाओं के लिए एआई फंक्शनल लिटरेसी फॉर यूथ प्रोजेक्ट’ पर काम चल रहा है
जीरकपुर (मोहाली)। रोटारैक्टर्स और रोटेरियंस की सामूहिक प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में, रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसिडेंट-इलेक्ट ओलायिंका हकीम बाबालोला ने वैश्विक प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला, और तेज़ गति से इनक्लूसिव वैश्विक विकास की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। बाबालोला, बेंगलुरू से आए के.पी.नागेश, डायरेक्टर, रोटरी इंटरनेशनल (2025–27) और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर-इलेक्ट (डिस्ट्रिक्ट 3080-भारत) रोटेरियन डॉ. रीता कालरा के साथ, जीरकपुर के होटल पार्क प्लाज़ा में आयोजित हो रहे ‘सृजन 2026 – एक नई शुरुआत’ (सृजन 2026 – ए न्यू बिगनिंग) नामक एक ऐतिहासिक ‘प्रेसिडेंट्स-इलेक्ट और सेक्रेटरीज़-इलेक्ट लर्निंग सेमिनार (पीईएलएस/एसईएलएस)’ के अवसर पर मीडियाकर्मियों के साथ अपने विचार साझा कर रहे थे। यह बताना महत्वपूर्ण है कि रोटरी इंटरनेशनल एक ग्लोबल सेवा संगठन है, जिसके दुनिया भर में 45,000 से अधिक क्लबों में 1.2 मिलियन से अधिक बिजनेसमैन, प्रोफेशनल और कम्युनिटी लीडर्स सदस्य हैं। 1905 में स्थापित यह संगठन मानवीय सेवा, उच्च नैतिक मानकों और विश्व शांति पर केंद्रित है। बाबालोला, जो 1984 से रोटारैक्टर और 1994 से रोटेरियन हैं, ने मीडियाकर्मियों को बताया कि रोटरी की रणनीतिक प्राथमिकताओं में पोलियो को खत्म करने का वैश्विक मिशन, अगले पांच वर्षों में दुनिया भर में सदस्यता बढ़ाकर 1.25 मिलियन करना, और पर्यावरण व स्थिरता, बुनियादी शिक्षा व साक्षरता, तथा रोग निवारण व उपचार पर केंद्रित ‘ग्लोबल ग्रांट’ साझेदारियों को मज़बूत करना शामिल है। बबाबोला ने कहा कि रोटरी एक संगठन के तौर पर शांति के लिए काम करता है और उन्होंने पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनेताओं को मानवता की भलाई के लिए युद्ध खत्म करने का फ़ैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोटरी हमेशा युद्ध से प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद करता है और विस्थापित समुदायों के पुनर्वास की दिशा में काम करता है। उन्होंने आगे कहा कि रोटरी युद्ध खत्म होने के बाद वहाँ पहुँचता है और हिंसा से पीड़ित लोगों की मदद करता है। उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को डिजिटल और एआई स्किल्स से लैस करने के लिए ‘एआई फंक्शनल लिटरेसी फॉर यूथ प्रोजेक्ट’ की योजना ट्राईसिटी के युवाओं के लिए बनाई जा रही है। उन्होंने इनोवेशन-संचालित सेवा और युवाओं की मज़बूत भागीदारी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। चंडीगढ़ ट्राईसिटी के लिए घोषित अन्य क्षेत्रीय पहलों और भविष्य के लिए तैयार किए गए परियोजनाओं में महिला सशक्तिकरण की पहलें शामिल हैं, जो डिजिटल सुरक्षा, वोकेशनल स्किलिंग और एंटरप्रेन्योरशिप पर केंद्रित हैं; और ‘हैप्पी स्कूल्स इनिशिएटिव’ जिसका उद्देश्य एजुकेशनल के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना है। विशेष रूप से, रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 और 3090 द्वारा आयोजित इस दो-दिवसीय प्रमुख लीडरशिप प्रोग्राम ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से 500 से अधिक रोटरी लीडर्स को एक मंच पर एकत्रित किया है। के.पी.नागेश, आरआई डायरेक्टर, (2025–27) ने कहा कि इस सेमिनार के दौरान स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया; इनमें तपेदिक (टीबी) उन्मूलन, सर्वाइकल कैंसर जागरूकता, गैर-संक्रामक रोगों के लिए मोबाइल स्क्रीनिंग, कचरा प्रबंधन अभियान और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रोटरी नर्सरी का विकास जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर-इलेक्ट रोटेरियन डॉ. रीता कालरा (आरआई डिस्ट्रिक्ट 3080 इंडिया) और रोटेरियन डॉ. संजय कालरा, तथा पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (पीडीजी) अरुण मोंगिया के नेतृत्व में आयोजित इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य आने वाले रोटरी लीडर्स को रोटरी वर्ष 2026–27 के लिए आवश्यक स्किल्स और दूरदृष्टि से सुसज्जित करना था। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. रीता कालरा ने कहा कि इस कार्यक्रम में ‘ब्रेकआउट सत्र’, नेटवर्किंग के अवसर, आपसी मेलजोल (फेलोशिप इंटरैक्शन) और विविधता तथा एकता का उत्सव मनाने वाली सांस्कृतिक संध्याएं शामिल हैं। डॉ. कालरा ने आगे विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सृजन-2026’ नेतृत्व विकास, आपसी सहयोग और प्रभावशाली सेवा के प्रति रोटरी की प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रमाण है। रोटरी के प्रतिष्ठित नेताओं, जिनमें रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर-इलेक्ट (राइड) रोटेरियन गुरजीत सेखों, पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (पीडीजी) रोटेरियन शाजू पीटर, रीजनल रोटरी मेंबरशिप कोऑर्डिनेटर (आरआरएमसी) रोटेरियन डॉ. दुष्यंत चौधरी, रीजनल रोटरी मेंबरशिप कोऑर्डिनेटर (आरआरएमसी) रोटेरियन डॉ. प्रमोद कुमार, रीजनल वेब मास्टर रोटेरियन नरेंद्र राव और क्लब एवं डिस्ट्रिक्ट सपोर्ट (सीडीएस) रोटेरियन दमन बावेजा शामिल थे, ने इन सभी सत्रों में अपना योगदान दिया, जिससे प्रतिभागियों का अनुभव और अधिक समृद्ध हुआ।

