चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (सीडीओई) ने वीरवार को “क्षेत्रीय वास्तविकताएं एवं राष्ट्रीय आकांक्षाएं: विकास लक्ष्य, चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसका विशेष ध्यान उत्तर-पश्चिमी भारत पर था। इस दौरान प्रो. आर.एस. घुमन ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय विभाजनों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति को बढ़ावा देने और विषम समाज पर क्षेत्रवाद के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में संतुलित क्षेत्रीय विकास के महत्व पर जोर दिया ।वहीं यूनिवर्सिटी की अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की निदेशक प्रो. योजना रावत ने राष्ट्रीय विकास में एकता एवं अखंडता की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि भावना गुप्ता, आईएएस ने राष्ट्रवाद एवं क्षेत्रवाद के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो. कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में एक पूर्ण सत्र आयोजित किया गया। डॉ. मनमोहन सिंह और प्रो. हरि नायडू ने पंजाब की राजनीतिक संरचना, विचारधारा की भूमिका और विविधतापूर्ण समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने में पहचान पर अपने विचार साझा किए।

दो ऑनलाइन और तीन ऑफलाइन 80 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए:
सेमिनार में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए- दो ऑनलाइन और तीन ऑफलाइन-जहां लगभग 80 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। चर्चाओं में विकास लक्ष्यों, एनईपी 2020, महिलाओं के हाशिए पर होने और अनुच्छेद 370 सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। समारोह के समापन सत्र के दौरान, प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने मातृभाषाओं के महत्व और गोत्रों की अंतर्संबंध पर विचार-विमर्श किया। प्रो. संजय कौशिक और प्रो. डी.के. मदान ने भी विषय पर अपने विचार साझा किए। प्रो. हर्ष गंधार ने सभी प्रतिभागियों और प्रस्तुतकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। डॉ. रविंदर कौर ने सेमिनार की संयोजक के रूप में कार्य किया। प्रोफेसर इमैनुएल नाहर, प्रोफेसर मधुरिमा वर्मा, प्रोफेसर शीना पाल और डॉ. कमला सेमिनार की सह-संयोजक थीं। प्रो. हर्ष गांधार इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक थे।
