Tuesday, January 20, 2026
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टियर-2 शहर बन रहे रियल एस्टेट के नए केंद्र, निवेश और बेहतर जीवनशैली का बढ़ा भरोसा

चंडीगढ़। देश में रियल एस्टेट निवेश को लेकर रुझान तेजी से बदल रहा है। बड़े शहरों में बढ़ती भीड़, ऊंची कीमतों और सीमित विकल्पों के बीच अब खरीदारों और निवेशकों की नजर टियर-2 शहरों पर टिक गई है। बेहतर बुनियादी ढांचा, सुनियोजित विकास और अपेक्षाकृत बेहतर जीवनशैली के चलते ये शहर अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि पहली पसंद बनते जा रहे हैं।रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में जमीन के सौदों का आंकड़ा पूरे साल 2024 से ज्यादा हो चुका है। यह सेक्टर को लेकर डेवलपर्स के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। आंकड़ों के अनुसार, H1 2025 में टियर-2 और टियर-3 शहरों में जमीन के सौदे टियर-1 शहरों से आगे निकल गए। इस दौरान टियर-2 और 3 शहरों में करीब 1,907 एकड़ जमीन के सौदे हुए, जबकि टियर-1 शहरों में यह आंकड़ा 991 एकड़ रहा।वहीं, प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट बताती है कि देश के प्रमुख 15 टियर-2 शहरों में रिहायशी संपत्तियों की बिक्री का कुल मूल्य Q1 2025 में 6 फीसदी बढ़कर 40,443 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह 38,102 करोड़ रुपये था। जानकारों के मुताबिक, यह बढ़त अस्थायी नहीं, बल्कि खरीदारों और निवेशकों की सोच में आए बड़े बदलाव का संकेत है।विशेषज्ञों का कहना है कि टियर-2 शहरों की सबसे बड़ी ताकत उनकी वैल्यू है। यहां लोगों को बड़े और बेहतर डिजाइन वाले घर, आधुनिक सुविधाएं और अच्छी तरह से विकसित सोसायटी मिल रही हैं, वह भी मेट्रो शहरों के मुकाबले कम कीमत पर। इसके साथ ही कम ट्रैफिक, साफ हवा और हरियाली लोगों को आकर्षित कर रही है। यही वजह है कि नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और युवा परिवार इन शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।जानकारों का मानना है कि टियर-2 शहरों की मजबूती के पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी प्रशासन की बड़ी भूमिका है। नए एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट विस्तार, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और आईटी पार्क से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, जिससे रियल एस्टेट को मजबूत आधार मिल रहा है। इसके चलते निवेशकों की सोच भी बदली है और अब फोकस त्वरित मुनाफे की बजाय स्थिर आय और लंबी अवधि के निवेश पर है।होमलैंड ग्रुप के सीईओ उमंग जिंदल कहते हैं कि आज घर की असली कीमत सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में उसकी भूमिका है। लोग ऐसे घर चाहते हैं जो सेहत, सामुदायिक जुड़ाव और स्मार्ट डिजाइन को बढ़ावा दें। यह बदलाव टियर-2 शहरों में ज्यादा साफ दिख रहा है। यहां की धीमी रफ्तार जिंदगी, साफ माहौल और बेहतर प्लानिंग लाइफस्टाइल प्रोजेक्ट्स के लिए आदर्श है। चंडीगढ़ इसका अच्छा उदाहरण है, जहां शहरी सुविधाएं और शांति साथ मिलती हैं। निवेश के लिहाज से भी यह मांग लंबे समय तक स्थिरता और मूल्य बढ़ने का भरोसा देती है।रॉयल एस्टेट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पियूष कंसल के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में ट्राइसिटी क्षेत्र को लेकर धारणा काफी बदली है। जो इलाका पहले रिटायरमेंट या सेकेंडरी मार्केट माना जाता था, अब एंड-यूजर्स और निवेशकों के लिए मुख्य डेस्टिनेशन बन चुका है।

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