Tuesday, January 20, 2026
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चंडीगढ़ में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन, साहित्यकारों ने साझा किए शोध व विचार

चंडीगढ़ । रीडर्स एंड राइटर्स सोसायटी ऑफ़ इंडिया, चंडीगढ़ और लोकल बहाई स्पिरिचुअल असेंबली के संयुक्त तत्वाधान में बहाई हाउस, सेक्टर-8C, चंडीगढ़ के सभागार में एक विशेष साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों— प्रो. अनिल सारवाल द्वारा लिखित ‘रबीन्द्रनाथ टैगोर एंड बहाई फेथ’ तथा डॉ. राजवंती मान की ‘जलियांवाला बाग़ की कराहें’ —का विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात इतिहासकार और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की डॉ. अंबेडकर चेयर के भूतपूर्व चेयरमैन डॉ. हरीश पुरी ने की। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. ओपी मिड्डा, डायरेक्टर, इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज़, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय रहे। कार्यक्रम में श्री अरुण नैथानी, वरिष्ठ मैगज़ीन संपादक, तथा प्रो. प्रसून प्रसाद, भूतपूर्व प्राध्यापिका, एम.सी.एम. डी.ए.वी. कॉलेज, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

साथ ही सम्मानित अतिथि डॉ. संगीता चौधरी और सलाहियत पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. सुनील भाटिया भी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत कोलकाता से आई विदुषी डॉ. संगीता चौधरी द्वारा प्रस्तुत मधुर रबीन्द्र संगीत से हुई। इसके बाद प्रो. अनिल सारवाल ने अपनी पुस्तक में वर्णित प्रमुख विषयों एवं विचारों पर प्रकाश डाला। रीडर्स एंड राइटर्स सोसायटी के अध्यक्ष विनोद खन्ना ने इसी पुस्तक पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. राजवंती मान ने बताया कि कैसे उन्होंने लंदन जाकर उस समय के प्रतिबंधित साहित्य को खोजा और जलियांवाला बाग़ नरसंहार पर गहन शोध करते हुए उसे पुस्तक के रूप में संकलित किया। अरुण नैथानी और प्रो. प्रसून प्रसाद ने ‘जलियांवाला बाग़ की कराहें’ पर अपने विचार रखते हुए इस पुस्तक को इतिहास के कई अनछुए पहलुओं को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बताया। प्रो. सारवाल की पुस्तक ‘रबीन्द्रनाथ टैगोर एंड बहाई फेथ’ टैगोर के दर्शन और बहाई विचारधारा के बीच समानताओं का विश्लेषण करती है तथा यह दर्शाती है कि दोनों दर्शन एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं। दोनों विचारधाराएं अपने समय से कहीं आगे की मानवीय सोच का प्रतिनिधित्व करती हैं। ट्राइसिटी के अनेक प्रबुद्ध साहित्यकारों सहित बाहरी राज्यों से आए विद्वानों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और प्रश्न–उत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाएँ साझा कीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. सुधीर बवेजा ने किया। अंत में प्रो. अनिल सारवाल ने सभी अतिथियों व उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।

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