Monday, January 19, 2026
HomeBusinessउद्योगों के लंबित मुद्दों का हल करने के लिए हुई एनसीएलटी की...

उद्योगों के लंबित मुद्दों का हल करने के लिए हुई एनसीएलटी की स्थापना:एम.एम.कुमार

पीएचडीसीसीआई ने किया आईबीसी कांफ्रेंस का आयोजन

इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन के लिए एनसीएलटी को मजबूत करने की जरूरत

चंडीगढ़। पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से चंडीगढ़ में आईबीसी पल्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 के तहत उभरते ट्रेंड्स, चुनौतियों और सुधारों पर ज़ोर दिया गया। इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के संस्थापक अध्यक्ष, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज एवं जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस (रिटायर्ड) एम.एम. कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने उद्योगों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को हल करने के लिए एनसीएलटी की स्थापना की है। जिसने जटिल औद्योगिक और कॉर्पोरेट मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आईबीसी 2016 ने कानूनी तंत्रों को आर्थिक वास्तविकताओं के साथ जोड़ते हुए, बैंकरप्सी समाधान प्रक्रिया को काफी आसान और तेज कर दिया है। जस्टिस कुमार ने कहा कि एनसीएलटी की स्थापना संवैधानिक मूल्यों, कानूनी इरादे और न्यायिक अनुभव के मेल को दिखाती है। अपने स्वागत भाषण में पीएचडीसीसीआई एनसीएलटी एवं आईबीसी कमेटी के चेयरमैन जीपी मदान ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन और आईबीसी भारत के कॉर्पोरेट फ्रेमवर्क के एक-दूसरे को पूरा करने वाले पिलर बन गए हैं।

उन्हें बढ़ते केस लोड से निपटने के लिए एनसीएलटी बेंच की संख्या बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने की तुरंत ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इससे पहले पीएचडीसीसीआई के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉ. जतिंदर सिंह ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्य बताते हुए न्यायिक विकास और इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन में प्रैक्टिकल चुनौतियों पर इसके फोकस पर ज़ोर दिया। एनसीएलटी के पूर्व ज्यूडिशियल मेंबर हरनाम सिंह ठाकुर ने पेंडिंग मामलों और इंडस्ट्रियल झगड़ों को कम करने के लिए बेंच और मेंबर की संख्या बढ़ाने और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की मांग का समर्थन किया। सीनियर एडवोकेट और एनसीएलटी बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, डॉ.यू.के चौधरी ने बताया कि न्यायिक प्रक्रियाएं हमेशा सख्ती से टाइम-बाउंड नहीं हो सकतीं,क्योंकि न्याय पक्का करने के लिए अदालतों को सभी पहलुओं पर सुनवाई करनी चाहिए। उन्होंने ज़्यादा प्रैक्टिकल टाइमलाइन की वकालत की और कहा कि हालांकि कंपनी एक्ट, 2013 में 63 सदस्यों का प्रावधान है, लेकिन याचिकाओं की संख्या पारंपरिक कंपनी मामलों से कई गुना ज़्यादा है। इस अवसर पर एनसीएलटी के पूर्व ज्यूडिशियल मेंबर राजशेखर वी.के., डॉ. पी.एस.एन. प्रसाद,एल.एन. गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विभिन्न ज्वलंत विषयों पर पैनल डिस्कशन का भी आयोजन किया गया, जिसमें कई विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments